
क्या गलत किया दीपक कुमार ने, उत्तराखंड के कोटद्वार मामले पर क्या बोले असदुद्दीन ओवैसी
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि दीपक साहब आए। आकर उन्होंने कहा कि 20 साल से दुकान यहां पर है, तुम कुछ भी नहीं कर सकते। ये पहलवान भाग गए। अब बीजेपी की सरकार, बीजेपी की पुलिस उसी दीपक कुमार पर केस लगा दी। क्या गलत किया था उसने।
लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तराखंड को कोटद्वार मामले में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। बुधवार को उन्होंने कहा कि पुलिस दीपक से बात करने के लिए मीडिया को जाने नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि गुनाह क्या है। मामला बीते सप्ताह दुकान के नाम को लेकर शुरू हुए विवाद से जुड़ा है, जिसमें जिम संचालक दीपक कुमार और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं में झड़प हो गई थी।
ओवैसी ने कहा, 'उत्तराखंड में एक हमारे हिंदू नौजवान हैं, दीपक कुमार नाम था उसका...। अब मीडिया वाले उसके घर जा रहे हैं, तो पुलिस उन्हें जाने नहीं दे रही है। क्यों भाई क्या हुआ। अरे क्यों नहीं मिल सकते। आखिर क्यों तुम उसके छिपाकर रखे। उसका जुर्म सिर्फ इतना ही था कि वह 70 साल के वकील की दुकान पर गया। वहां बाबा ड्रेस लिखा हुआ था, तो बजरंग दल के लोग बोले नाम निकालो बाबा। अब यह बाबा नाम कहां से आया, फारसी का शब्द है।'
उन्होंने आगे कहा, 'दीपक साहब आए। आकर उन्होंने कहा कि 20 साल से दुकान यहां पर है, तुम कुछ भी नहीं कर सकते। ये पहलवान भाग गए। अब बीजेपी की सरकार, बीजेपी की पुलिस उसी दीपक कुमार पर केस लगा दी। क्या गलत किया था उसने। एक गरीब की मदद करना गुनाह है क्या। फिर उसकी जिम के सामने जाकर खड़े होकर गालियां उसको दीं।'
क्या था विवाद
पीटीआई भाषा के मुताबिक, पिछले काफी समय से कोटद्वार में कपड़ों की एक दुकान के नाम 'बाबा' को लेकर बजरंग दल विरोध कर रहा है। दुकानदार मोहम्मद शोएब पर दुकान का नाम बदलने का दवाब डाला जा रहा है। दुकान के नाम से कोटद्वार के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर 'सिद्धबली बाबा' का भ्रम होने का आरोप लगाते हुए पिछले सप्ताह बुधवार को बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने उसके बाहर प्रदर्शन किया था।
उस दौरान उनका दुकान मालिक और उसके जिम संचालक दोस्त दीपक कुमार से झड़प और मारपीट हुई। कुमार ने अपना नाम मोहम्मद दीपक बताते हुए बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को वहां से जाने को मजबूर कर दिया।
इसके बाद एक बार फिर शनिवार को बड़ी संख्या में बजरंग दल के कार्यकर्ता 'बाबा' दुकान तथा जिम संचालक दीपक कुमार के जिम पर प्रदर्शन करने पहुंच गए। इस दौरान इन लोगों ने नारेबाजी करते हुए सड़क जाम कर दिया । लेकिन पुलिस की मुस्तैदी से संघर्ष टल गया था।
अब शांति है
बवाल के बाद पुलिस ने सोमवार को पार्षदों, व्यापार मंडलों और मुस्लिम समाज के लोगों के साथ एक शांति बैठक की थी। इससे पहले रविवार को पुलिस ने शहर का सौहार्द बिगाड़ने के आरोप में 30-40 अज्ञात लोगों तथा अन्य लोगों के खिलाफ तीन मुकदमे दर्ज किए थे। कोटद्वार के अपर पुलिस अधीक्षक चंद्र मोहन सिंह ने बताया था कि शहर में स्थिति नियंत्रण में है लेकिन शान्ति व्यवस्था और सदभाव बनाए रखने के लिए नगर के व्यापार मण्डल के पदाधिकारियों, पार्षदों एवं मुस्लिम समाज समेत सभी वर्गों के लोगों के साथ कोटद्वार थाने में शांति बैठक की गई।

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Nisarg Dixitनिसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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