अभी तो शुरुआत है…जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से कॉकरोच जनता पार्टी को क्या हासिल हुआ?
जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के पहले प्रदर्शन के बाद युवाओं का कहना है कि कम से कम उन्हें अपना दर्द बयां करने का प्लैटफॉर्म मिला है। वहीं इस प्रदर्शन के बाद कई राजनीतिक दल भी सीजेपी के समर्थन में सामने आए हैं।

'कॉक्रोच जनता पार्टी' (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके के शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचते ही हजारों की भीड़ ने उनका स्वागत किया और फिर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। प्रदर्शन के लिए आए लोग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। सीजेपी के इस आंदोलन में शामिल होने पूरे देश से लोग पहुंचे थे। यह उन लोगों का आंदोलन था जो कि पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में कमियों को लेकर आक्रोशित भी हैं और दुखी भी लेकिन उन्हें इसे जाहिर करने का कोई मंच ही नहीं मिला।
जंतर-मंतर पर क्या हुआ
अभइजीत दीपके के जंतर-मंतर पहुंचते ही लोगों का पहुंचना भी शुरू हो गया। थोड़ी ही देर में जंतर-मंतर का प्रदर्शन स्थल खचाखच भर गया। इस भीड़ में सारे लोग प्रदर्शन ही करने वाले नहीं थे बल्कि बड़ी संख्या में वे लोग भी थे जो इस पल को कैमरे में कैद कर लेना चाहते थे। यूट्यूबर भी बड़ी संख्या में पहुंचे थे। दीपके ने कहा कि लोग सवाल कर रहे थे कि ऑनलाइन कैंपेन से क्या होने वाला है। अब आप खुद ही देख लीजिए कि कितने कॉकरोच बाहर निकल आए हैं।
कॉकरोच जनता पार्टी के इस आंदोलन में ऐक्टिविस्ट सोनम वांगचुक भी शामिल हुए। उन्होंने भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की वकालत की। जंतर-मंतर पर जमा भीड़ और नारेबाजी के बीच अगर लोगों से उनकी व्यक्तिगत समस्याओं के बारे में जाना जाए तो एक बड़ी समस्या उभरकर सामने आती है।
'पेपर लीक पर जवाब जरूरी'
इस आंदोलन का मुख्य मुद्दा पेपर लीक ही था। लोग नारे लगा रहे थे, 'कितनी बार आएगी, पेपर लीक की सरकार।' एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि उनके बेटे ने नीट-यूजी का पेपर दिया था। उन्होंने कहा, मैं राजस्थान से आया हूं। परीक्षा में होने वाली इस तरह की गड़बड़ियों से बच्चों का उत्साह खत्म हो जाता है। उन्होंने कहा, मेरा बेटा बुरी तरह परेशान हो गया है और वह अब पढ़ाई-लिखाई करने को तैयार ही नहीं है। उन्होंने कहा, अगर कोई गड़बड़ी होती है तो उसकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
पुणे से आए एक शख्स ने कहा, यह तो बस शुरुआत है। बात सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की नहीं है। भारत में इस समय बहुत सारी समस्याएं हैं। इस आंदोलन से पता चलता है कि लोग अब परिव्रतन चाहते हैं। अलवर से आए 21 साल के लक्ष्य वर्मा ने कहा, पेपर लीक होता है तो स्टूडेंट वैसे भी परेशान होते हैं। ऊपर से अगर वे आवाज उठाते हैं तो लाठी चार्ज कर दिया जाता है। उन्होंने कहा, मैं यहां रुकने के प्लान से आया हूं।
स्टूडेंट्स के समर्थन में पहुंचे लोग
बहुत सारे लोगों को नीट या फिर सीबीएसई के पेपर से कोई लेना-देना नहीं था लेकिन वे स्टूडेंट्स का समर्थन करने के लिए पहुंचे थे। एक महिला ने कहा, इस देश के एजुकेशन सिस्टम में बहुत कमी है। मैं खुद कई बार सरकारी नौकरियों के पेपर दे चुकी हूं लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। उत्तर प्रदेश से पहुंचे दो शिक्षकों ने कहा, मैं बहुत सारे छात्रों को पढ़ाता हूं। वे सबसे ज्यादा परेशान तब होते हैं जब पेपर लीक हो जाता है। हमारे पास उनके सवालों के जवाब नहीं होते हैं। कोई तो होना चाहिए जो उनके सवाल के जवाब दे।
सीजेपी को क्या हुआ हासिल
सीजेपी अब तक सिर्फ सोशल मीडिया पर थी। कुछ ही दिनों में सीजेपी के सोशल मीडिया पर 2.2 करोड़ से ज्यादा फॉलोअर हैं। पहली बार लोगों को इसके संस्थापक से रूबरू होने का मौका मिला। कई राजनीतिक पार्टियां भी इस आंदोलन के समर्थन में आ गई हैं। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लिखा, गुरूरमंद हुक्मरानों तक पहुंचे ये आवाज, अब नौजवानों ने कर दिया है इंकलाब'। शिवसेना (UBT) चीफ उद्ध ठाकरे ने कहा, नीट पेपर लीक ने लाखों युवाओं का सपना तोड़ा है। ये सभी पीड़ित आज कॉकरोच बनकर अपनी बात रख रहे हैं। इन लोगों को कम मत समझिए। जंतर-मंतर का यह आंदोलन सरकार को चेतावनी है।
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लेखक के बारे में
Ankit Ojhaविद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।
राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।
अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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