
रिटायरमेंट के बाद क्या करेंगे? CJI गवई ने बताया; विदाई पर SC समुदाय से बेटे की तुलना क्यों लगे करने
दलित समुदाय से आने वाले CJI बीआर गवई ने कहा कि अनुसूचित जाति में क्रीमी लेयर लागू करने के फैसले के लिए मेरे समुदाय में मेरी बहुत बुराई हुई है.. हालांकि एक जज से अपने फैसले का बचाव करने की उम्मीद नहीं की जाती है।
Justice BR Gavai Retirement Farewell Speech: देश के 52वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बीआर गवई का आज (शुक्रवार, 21 नवंबर को) अंतिम कार्य दिवस था। वह रविवार यानी 23 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। उनके सम्मान में पहले सुप्रीम कोर्ट में सेरिमोनियल बेंच में उन्हें विदाई दी गई। इसके बाद शाम में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की तरफ से विदाई दी गई। इस मौके पर उन्होंने कहा कि वह वकील और जज के रूप में करीब चार दशक की अपनी यात्रा के समापन पर संतोष और संतृप्ति की भावना के साथ और ‘न्याय के विद्यार्थी’ के रूप में न्यायालय छोड़ रहे हैं।
SCBA द्वारा आयोजित विदाई समारोह में जस्टिस गवई ने अपने 2024 के उस फैसले का बचाव किया, जिसमें उन्होंने अनुसूचित जातियों पर क्रीमी लेयर का नियम लागू करने की वकालत की थी। उन्होंने कहा कि 2024 के फैसले की वजह से उनका उन्हीं के समुदाय के बीच तीखी आलोचना की गई थी। उन्होंने आगे कहा कि हालांकि एक जज से अपने फ़ैसले का बचाव करने की उम्मीद नहीं की जाती है, लेकिन वह इस फैसले पर चर्चा करेंगे क्योंकि अब उन्हें कोई न्यायिक काम नहीं करना है।
मेरे ही समुदाय में मेरी बहुत बुराई हुई: CJI गवई
दलित समुदाय से आने वाले CJI गवई ने कहा, "अनुसूचित जाति में क्रीमी लेयर लागू करने के फैसले के लिए मेरे समुदाय में मेरी बहुत बुराई हुई है.. हालांकि एक जज से अपने फैसले का बचाव करने की उम्मीद नहीं की जाती है। मैंने एक उदाहरण दिया था कि क्या दिल्ली के सबसे अच्छे कॉलेज, सेंट स्टीफंस में पढ़ने वाले चीफ सेक्रेटरी के बेटे को ग्राम पंचायत या जिला परिषद स्कूल में पढ़ने वाले खेतिहर मजदूर के बेटे के साथ मुकाबला करने के लिए मजबूर किया जा सकता है? आर्टिकल 14 बराबरी में विश्वास करता है लेकिन बराबरी का मतलब सभी के साथ एक जैसा बर्ताव नहीं है। डॉ. आंबेडकर ने कहा था कि अगर हम सभी के साथ एक जैसा बर्ताव करेंगे, तो असमानता कम होने के बजाय, इससे और असमानता बढ़ेगी। इसलिए जो पीछे हैं, उनके साथ खास बर्ताव ही बराबरी का कॉन्सेप्ट मांगता है।"
मैं खुद से एक सवाल पूछता हूँ
इसके बाद उन्होंने कहा, "मैं खुद से एक सवाल पूछता हूँ कि क्या आदिवासी इलाके में रहने वाले SC कैटेगरी के किसी बच्चे को, जिसके पास हायर एजुकेशन के लिए कोई साधन नहीं है, मेरे बेटे से मुकाबला करने के लिए मजबूर किया जा सकता है, जो अपने पिता के पद और पिता की उपलब्धियों की वजह से सबसे अच्छी स्कूलिंग और सबसे अच्छी शिक्षा पा रहा है.. क्या यह सही मायने में बराबरी होगी या यह गैर-बराबरी को बढ़ावा देगी?" जिस समय जस्टिस गवई यह बात कह रहे थे, उस समय उनके बेटे ज्योतिरादित्य गवई वहीं मौजूद थे।
अपने लॉ क्लर्क का भी किया जिक्र
जस्टिस गवई ने राजनीति और तर्क की भी चर्चा की और अपने ही समुदाय से आने वाले अपने कोर्ट क्लर्क का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "हालाँकि कई बार पॉलिटिक्स लॉजिक से ज़्यादा जरूरी हो जाती है। लेकिन मुझे खुशी है कि जब मैंने वह फैसला लिखा, तो मेरे अपने एक लॉ क्लर्क, जो महाराष्ट्र में एक सीनियर ऑफिसर के बेटे हैं और शेड्यूल्ड कास्ट से हैं, ने कहा 'हर समय यह बात मुझे परेशान करती है कि मुझे सबसे अच्छी एजुकेशन मिलती है, तो मुझे शेड्यूल्ड कास्ट का फायदा क्यों मिलना चाहिए।' उन्होंने कहा 'इसके बाद मैं शेड्यूल्ड कास्ट का कोई फायदा नहीं लूँगा'। तो उस एक लड़के ने वह बात समझ ली जो पॉलिटिशियन समझने से मना कर देते हैं, और इसके कारण वही जानते हैं।"
1990 में हुआ कुछ ऐसा कि अपना लिया कानून पेशा
वकील और जज बनने के अपने करियर के बारे में बात करते हुए, CJI गवई ने अपने माता-पिता और भारत के संविधान का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि संविधान के मूल्य उनके पिता ने शुरू से ही उनके मन में बिठा दिए थे। उन्होंने कहा, “मैं अपने पिता की वजह से कानूनी पेशे में आया। यह भी हो सकता था कि मैं उनके नक्शेकदम पर चलते हुए राजनीति में आ जाता, लेकिन मैं किस्मत का शुक्रगुजार हूं कि 1990 में कुछ ऐसा हुआ कि मैंने पूरी तरह से प्रैक्टिस पर ध्यान देने और दूसरी रुचियों को छोड़ने का फैसला किया। मेरी मां ने कड़ी मेहनत और मेहनत की इज्ज़त, किसी भी काम की इज्ज़त के सिद्धांतों को अपनाया। मेरे माता-पिता ने मुझे जो मूल्य दिए, वे हमेशा मेरे साथ रहेंगे, और मैं हमेशा उनका शुक्रगुजार रहूंगा।”
रिटायरमेंट के बाद क्या करेंगे?
बार एंड बेंच के मुताबिक, रिटायरमेंट के बाद की योजनाओं के बारे में संकेत देते हुए उन्होंने कहा, "मैं अपने इलाके के आदिवासियों के लिए काम करना चाहूंगा क्योंकि वे मेरे बहुत करीब हैं.. मुझे जजों और उनके परिवारों से बहुत प्यार मिला है।" जस्टिस गवई महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। उनके पिता आर एस गवई एक राजनेता थे। वह केरल और सिक्किम के गवर्नर भी रहे हैं। CJI गवई ने बताया कि वे 18 साल तक वकील और 22 साल छह दिन तक जज रहे।





