भारत में हुई ब्रिक्स की बैठक में किस बात पर हो गया मतभेद, खूब लिया गया इजरायल का नाम

हिन्दुस्तान टीम
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भारत की अध्यक्षता में हुई ब्रिक्स देशों की बैठक में पश्चिमी एशिया के संघर्ष  को लेकर मतभेद की वजह से सहमति नहीं बन पाई। जानकारी के मुताबिक इजरायल के हमले की निंदा को लेकर मतभेद की वजह से संयुक्त बयान नहीं जारी किया गया।

भारत में हुई ब्रिक्स की बैठक में किस बात पर हो गया मतभेद, खूब लिया गया इजरायल का नाम

भारत की अध्यक्षता में हुई ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में पश्चिम एशिया संघर्ष पर मतभेद उभरने के कारण शुक्रवार को संयुक्त बयान जारी नहीं हो सका। इसके बाद अध्यक्ष की तरफ से सदस्य देशों द्वारा उठाए गए साझा मुद्दों को शामिल करते हुए 63 बिंदुओं का एक व्यापक बयान जारी किया गया।

इजरायली हमलों की निंदा की मांग, नहीं बन पाई सहमति

बयान में ईरान अमेरिका का नाम लिए बगैर अंतरराष्ट्रीय कानून के विपरीत एकतरफा दंडात्मक उपायों खासकर आर्थिक प्रतिबंधों की निंदा गई है। ईरान ने गुरुवार को बैठक में कहा था कि ब्रिक्स के मंच से ईरान पर अमेरिका और इजरायली हमले की निंदा की जानी चाहिए। उसने ब्रिक्स के सदस्य यूएई पर हमले में अमेरिका का साथ देने का भी आरोप लगाया था। सूत्रों का कहना है कि इसके चलते संयुक्त बयान पर विदेश मंत्रियों के बीच सहमति नहीं बन पाई। बाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संयुक्त बयान जारी नहीं हो पाने के लिए भी नाम लिए बगैर यूएई को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि संयुक्त बयान जारी नहीं होने की वजह ईरान का दो मुद्दों पर असहमत होना रहा। इनमें एक जलमार्गों से निर्बाध आवाजाही का मामला था तथा दूसरा मुद्दा फलस्तीन का था।

मध्य एशिया पर विचारों में मतभेद

अध्यक्ष की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर कुछ सदस्यों के विचार भिन्न थे। ब्रिक्स सदस्यों ने अपने-अपने राष्ट्रीय दृष्टिकोण व्यक्त किए और कई परिप्रेक्ष्य साझा किए। उनके द्वारा व्यक्त किए गए विचारों में वर्तमान संकट के जल्द समाधान की आवश्यकता, संवाद और कूटनीति का महत्व, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान, अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन, जलमार्गों से समुद्री व्यापार के सुरक्षित और निर्बाध प्रवाह का महत्व और नागरिक बुनियादी ढांचे और नागरिकों के जीवन की सुरक्षा शामिल थी।

मंत्रियों ने अंतरराष्ट्रीय कानून के विपरीत एकतरफा दंडात्मक उपायों की निंदा की। मंत्रियों ने विश्वव्यापी मानवीय संकटों से निपटने के लिए बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं में कमी पर चिंता व्यक्त की।

ब्रिक्स चेयर की तरफ से जारी बयान में फलस्तीन को लेकर पहले से मजबूत रुख अपनाया गया है। इसमें 1967 की सीमाओं के तहत पूर्ण आजाद फलस्तीन का समर्थन किया गया। इसमें गाजा पट्टी और वेस्ट बैंक भी उसका हिस्सा हों तथा संयुक्त राष्ट्र में उसकी पूर्ण सदस्यता हो। गाजा पट्टी में निर्बाध मानवीय सहायता पहुंच सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

(रिपोर्ट- मदन जैड़ा, हिन्दुस्तान)

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Ankit Ojha

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Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


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अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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