स्कूल ऑनलाइन क्लासेज के बारे में सोचें, PM मोदी की बड़ी अपील; तेल संकट पर क्या बोले

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प्रधानमंत्री ने कहा, 'पहले कोविड-19 महामारी का संकट आया, उसके बाद वैश्विक आर्थिक चुनौतियां आईं और अब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ रहा है। इन सभी परिस्थितियों का प्रभाव पूरी दुनिया में लगातार महसूस किया जा रहा है और भारत भी इससे अछूता नहीं है।'

PM Modi

'मैं कुछ स्कूलों से भी आग्रह करूंगा कि वे फिलहाल ऑनलाइन कक्षाओं की व्यवस्था को प्राथमिकता दें।' यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया संकट के बीच सोमवार को गुजरात में कही। खास बात है कि पीएम दो दिनों में दो बार WFH यानी घर से दफ्तर का काम, स्कूलों में ऑनलाइन क्लासेज समेत कई उपायों पर जोर दे चुके हैं। साथ ही उन्होंने खाद्य तेलों और ईंधन की खपत कम करने की भी अपील की है। खास बात है कि पीएम मोदी की तरफ से की जा रहीं लगातार अपीलों के बाद देश में कोविड के दौर में लागू हुए नियमों के लौटने की चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। हालांकि, सरकार ने अब तक कोई नियम लागू करने का ऐलान नहीं किया है।

दफ्तरों और स्कूलों से अपील

प्रधानमंत्री ने कहा कि डिजिटल तकनीक ने कई चीजों को आसान बना दिया है। उन्होंने सरकारी और निजी दोनों कार्यालयों में डिजिटल बैठकों और घर से काम करने की व्यवस्था को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा, 'मैं कुछ स्कूलों से भी आग्रह करूंगा कि वे फिलहाल ऑनलाइन कक्षाओं की व्यवस्था को प्राथमिकता दें।'

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार आम नागरिकों पर संकट के न्यूनतम प्रभाव को सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश को जन भागीदारी की शक्ति की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, 'भारत का नागरिक होने के नाते हमें अपने कर्तव्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए।'

भारत पर पड़ रहे असर को माना

पीएम मोदी ने सोमवार को 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के साथ शुरू हुए पश्चिम एशिया संघर्ष के भारत पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को स्वीकार किया। इस संघर्ष के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं और वैश्विक तेल कीमतों में भारी उछाल आया। उन्होंने पश्चिम एशिया में संघर्ष से उत्पन्न स्थिति को इस दशक के प्रमुख संकटों में से एक बताया।

कोविड काल से की तुलना

प्रधानमंत्री ने कहा, 'पहले कोविड-19 महामारी का संकट आया, उसके बाद वैश्विक आर्थिक चुनौतियां आईं और अब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ रहा है। इन सभी परिस्थितियों का प्रभाव पूरी दुनिया में लगातार महसूस किया जा रहा है और भारत भी इससे अछूता नहीं है।' पीएम मोदी ने वहां मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा, 'जिस तरह हम कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में एकजुट थे, उसी तरह हम इस संकट से भी निश्चित रूप से पार पा लेंगे।'

ऑनलाइन क्लासेज और वर्क फ्रॉम होम पर जोर क्यों

उन्होंने बताया कि भारत आयात पर विदेशी मुद्रा के रूप में 'लाखों करोड़ रुपये' खर्च करता है और कहा कि विदेशों से मंगाई जाने वाली वस्तुओं की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जबकि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं बाधित हो गई हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, 'छोटे-बड़े हर प्रयास से हमें आयातित उत्पादों की खपत कम करनी चाहिए और विदेशी मुद्रा खर्च को बढ़ाने वाली निजी गतिविधियों से बचना चाहिए।'

कच्चे तेल के आयात का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि दुनिया का एक बड़ा हिस्सा उसी क्षेत्र (पश्चिम एशिया) से तेल प्राप्त करता है जो वर्तमान में संघर्ष में उलझा हुआ है। उन्होंने कहा, 'इसलिए जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती हम सभी को मिलकर छोटे-छोटे सामूहिक संकल्प लेने होंगे।' उन्होंने कहा कि खाद्य तेलों की खपत कम करने का आह्वान करते हुए कहा कि देश इनके आयात पर काफी विदेशी मुद्रा खर्च करता है।

Nisarg Dixit

लेखक के बारे में

Nisarg Dixit

निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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