किसकी होगी तृणमूल कांग्रेस? चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी और रितब्रत से दावों पर मांगा जवाब
Mamata Banerjee Ritabrata: पश्चिम बंगाल में सत्ता गंवाने के बाद ममता बनर्जी अब अपनी पार्टी तृणमूल कांग्रेस को भी गंवाती हुई नजर आ रही हैं। चुनाव आयोग ने गुरुवार को ममता बनर्जी और रितब्रत बनर्जी को टीएमसी के ऊपर दावों को लेकर जवाब मांगा है।

Mamata Banerjee Ritabrata: पश्चिम बंगाल में सत्ता गंवाने के बाद ममता बनर्जी अब अपनी पार्टी 'तृणमूल कांग्रेस (TMC)' गंवाने की कगार पर हैं। रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व में बागी विधायकों का एक धड़ा पार्टी के ऊपर अपना दावा ठोक रहा है। इसी क्रम में गुरुवार को चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी और रितब्रत बनर्जी दोनों को पत्र लिखकर अपना-अपना दावा पेश करने के लिए कहा है। आयोग ने इसके लिए उन्हें 6 जुलाई शाम 5.30 तक का समय दिया है।
चुनाव आयोग की तरफ से जारी सूचना के मुताबिक, दोनों ममता बनर्जी और रितब्रत के नेतृत्व वाले गुटों को पत्र भेजा गया है। इस पत्र में उन्हें अपने-अपने दावों के संबंध में विस्तार से जवाब देने के लिए कहा गया है। बता दें कि दोनों गुटों का दावा है कि असली तृणमूल कांग्रेस का नेतृत्व वह कर रहे हैं। इसके साथ ही दोनों पक्ष पार्टी के चुनाव चिन्ह, बैंक खातों और अन्य अधिकारों पर भी अपना दावा ठोक रहे हैं।
4 मई के बाद परेशान ममता बनर्जी
गौरतलब है कि 4 मई के पहले तृणमूल कांग्रेस का नेतृत्व पूरी तरह से ममता बनर्जी की पीछे ही खड़ा हुआ था। लेकिन 4 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद पार्टी का बिखराव शुरू हो गया। सबसे पहले नेताओं ने ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक पर निशाना साधा। इसके बाद पहली बार विधायक बने रितब्रत के नेतृत्व में बागी विधायकों का एक धड़ा अलग हो गया। इसके बाद एक के बाद एक कई सांसद भी ममता का साथ छोड़कर अलग हो गए। हालत यह है कि एक समय पर प्रधानमंत्री पद के लिए विपक्ष की उम्मीदवार मानी जा रही ममता बनर्जी अब अपनी पार्टी खोने की कगार पर हैं।
बागियों का दावा 80 में से 65 विधायकों का समर्थन
रितब्रत के नेतृत्व में बागी गुट का दावा है कि उनके साथ तृणमूल कांग्रेस के 80 विधायकों में से 65 का समर्थन है। वर्तमान में रितब्रत ही विधानसभा नेता प्रतिपक्ष के पद पर बैठे हुए हैं। ऐसे में उनका दावा और भी ज्यादा मजबूत हो जाता है। एक तरफ जहां बागी गुट अपने आप को असली तृणमूल कांग्रेस बता रहा है। वहीं दूसरी तरफ ममता बनर्जी के समर्थकों का तर्क है कि पार्टी की असली ताकत उसके ढांचे में होती है, यह पूरा ढांचा ममता बनर्जी के पीछे खड़ा हुआ है।
शरद पवार, उद्धव ठाकरे के गुट में शामिल होंगी ममता?
ममता बनर्जी भले ही अपनी पार्टी को बचाने के लिए जोर लगा रही हों। लेकिन सच्चाई तो यह है कि बाजी काफी हद तक उनके हाथ से निकल चुकी है। उनके ज्यादातर विधायक और सांसद उनका साथ छोड़ चुके हैं। जमीनी स्तर पर भी कार्यकर्ता पार्टी से अलग हो रहे हैं। ऐसे में उनके लिए पार्टी की इस लड़ाई को जीतना आसान नहीं है।
भले ही कांग्रेस से अलग होकर ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस की नींव अपने हाथ से रखी हो, लेकिन विधायकों के बहुमत के आधार पर पार्टी का नेतृत्व तय होगा। यह पूरा घटनाक्रम देश कुछ ही समय पहले महाराष्ट्र में देख चुका है। जहां शरद पवार ने भी कांग्रेस से अलग होकर अपनी पार्टी बनाई थी, लेकिन जब भतीजे दिवंगत अजित पवार अलग हुए, तो चुनाव चिन्ह और पार्टी उनके साथ चली गई। शरद पवार को अपनी ही पार्टी का एक गुट मान लिया गया। इसके अलावा बालासाहेब ठाकरे ने जिस शिवसेना की स्थापना की थी। आज उनके बेटे उसी पार्टी के एक गुट के रूप में रह गए हैं, जबकि वास्तविक शिवसेना एकनाथ शिंदे के हाथ में है।
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लेखक के बारे में
Upendra Thapakउपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।
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