MLA के बाद अब MP की बारी, बड़ी टूट की राह पर TMC; ममता बनर्जी की पार्टी में होगा AAP वाला खेला?

लाइव हिन्दुस्तान
Follow us on Google News
share

West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में अब संसद तक भूचाल पहुंच गया है। लोकसभा में अलग गुट बनाने की खबरों ने पार्टी में हलचल मचा दी है।

MLA के बाद अब MP की बारी, बड़ी टूट की राह पर TMC; ममता बनर्जी की पार्टी में होगा AAP वाला खेला?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में अंदरूनी भूचाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। पार्टी को बचाने के लिए ममता बनर्जी और उनके नेतृत्व में लगातार प्रयास जारी हैं, लेकिन लोकसभा और राज्यसभा में भी विद्रोह की आशंका ने पार्टी की चिंता बढ़ा दी है। टीएमसी ने संसद में अपने सांसदों के अलग गुट बनाने की खबरों का गंभीरता से संज्ञान लिया है। पार्टी नेताओं ने रविवार को स्पष्ट किया कि दलबदल विरोधी कानून के कारण ऐसा प्रयास बेहद जटिल और व्यावहारिक रूप से लगभग असंभव है। लोकसभा में TMC के 28 सांसद हैं। किसी भी विद्रोही गुट को अलग होने के लिए कम से कम दो-तिहाई यानी 19 सांसदों का समर्थन जरूरी होगा।

हालांकि, पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों का कहना है कि इतनी संख्या जुट जाने के बावजूद बागी सांसद स्वतंत्र संसदीय समूह नहीं बना सकते। उन्हें किसी मौजूदा राजनीतिक दल में विलय होना ही पड़ेगा। एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि कानून में अलग समूह बनाने का कोई प्रावधान नहीं है। दो-तिहाई सांसद भी पार्टी छोड़ें तो उनका एकमात्र रास्ता दूसरे दल में विलय है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ असंतुष्ट सांसद संसद के दोनों सदनों में समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। अगर वे जरूरी संख्या हासिल कर लेते हैं तो अलग संसदीय दल की मान्यता की मांग कर सकते हैं। कुछ चर्चाओं में लोकसभा स्पीकर के पास पार्टी के संसदीय नेता बदलने की अर्जी देने की संभावना भी जताई जा रही है, लेकिन TMC इसे सिरे से खारिज कर रही है।

टीएमसी नेताओं का तर्क है कि संसदीय दल का नेता दल द्वारा चुना जाता है, स्पीकर इसका फैसला नहीं कर सकता। एक नेता ने इन खबरों को INDIA ब्लॉक की सोमवार को होने वाली बैठक से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक हलकों में कई परिदृश्यों पर चर्चा हो रही है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया में काफी समय लगेगा क्योंकि मानसून सत्र अभी दूर है। इन सब के बीच पार्टी के अंदर दो प्रमुख परिदृश्यों की चर्चा है। पहला- विधानसभा वाला मॉडल, जिसमें 80 में से 58 विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में अलग होकर प्रमुख विपक्षी दल का दर्जा हासिल कर लिया था। दूसरा- आम आदमी पार्टी (AAP) वाला मॉडल, जिसमें राघव चड्ढा समेत कुछ राज्यसभा सांसदों ने दलबदल कानून का सहारा लेकर भाजपा में विलय कर लिया। दोनों मामलों में कानूनी प्रक्रिया लंबी और जटिल है।

बता दें कि विधानसभा चुनाव में मिली शिकस्त और उसके बाद TMC विधायक दल में हुए बड़े विद्रोह के बाद पार्टी की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं। संसद में भी ऐसी स्थिति न बनने देने के लिए नेतृत्व अलर्ट मोड पर है। TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी शनिवार को दिल्ली पहुंचे, जबकि पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी INDIA ब्लॉक बैठक से पहले रविवार को राष्ट्रीय राजधानी पहुंच गईं। बताया जा रहा है कि दोनों संसदीय सदस्यों के साथ स्थिति का जायजा लेंगे।

बागी विधायकों के उपनेता संदीपन साहा पहले ही दावा कर चुके हैं कि विधानसभा जैसी घटनाएं अब संसदीय विंग में भी हो रही हैं। पार्टी की हार के बाद कई नेताओं ने अभिषेक बनर्जी की नेतृत्व शैली की खुली आलोचना भी की है। TMC अब इन आंतरिक चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीति बनाने में जुट गई है। गौरतलब है कि टीएमसी के लोकसभा में 28 और राज्यसभा में 13 सांसद हैं।

इस खबर पर आपकी क्या राय है?

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap

देवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।

देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।

मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।

और पढ़ें