ममता बनर्जी को छोड़ने वाले मुश्किल में, खतरे में विधायकी? बड़े नेताओं को नोटिस
नंदीग्राम और रेजिनगर सीट पर उपचुनाव से पहले ऋताब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले गुट को पश्चिम बंगाल विधानसभा सचिवालय ने नोटिस भेजा है। साथ ही एक सप्ताह में जवाब भी मांगा है। टीएमसी ने 10 विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

पश्चिम बंगाल में उपचुनाव और नगर निकाय चुनाव से पहले एक और बड़ा सियासी घटनाक्रम होने के आसार हैं। खबर है कि बागी गुट के कम से कम 10 विधायकों को विधानसभा सचिवालय की तरफ से नोटिस थमाया गया है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई वाले गुट ने मांग की थी कि इन विधायकों को अयोग्य ठहराया जाए। इसके अलावा यह मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच गया है।
नोटिस पाने वाले विधायकों को 10 दिनों के अंदर जवाब दाखिल करना होगा। इनमें ऋतब्रत बनर्जी के अलावा अरूप रॉय, फिरहाद हकीम, संदीपन साहा, अखरुजमान अंसारी, शिउली साहा, सबीना यास्मीन, बिप्लब मित्रा, जावेद खान और रथिन घोष शामिल हैं। पीटीआई भाषा के अनुसार, अंसारी ने कहा, 'हम पार्टी के भीतर इस मामले पर चर्चा करेंगे और समय पर उचित जवाब देंगे।'
चुनाव से पहले बड़ी उथल पुथल के आसार
खास बात है कि बंगाल में दो सीटों नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने हैं। वहीं, इसके बाद नगर निकाय चुनाव भी हैं। अटकलें ये भी हैं कि टीएमसी के दोनों गुटों में से असली कौन सा है, इसे लेकर फैसला पहले ही हो सकता है। ऐसे में इस नोटिस ने दोनों समूहों में तानातनी और बढ़ा दी हैं। वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने इस संबंध में 7 जुलाई को विधानसभा अध्यक्ष रथिन बोस को पत्र लिखा था।
ममता बनर्जी को देना है जवाब
खास बात है कि यह नोटिस ममता बनर्जी को चुनाव आयोग से मिले अल्टीमेटम के एक दिन पहले ही आया है। दरअसल, निर्वाचन आयोग ने चुनाव चिह्न विवाद में बनर्जी को जवाब दाखिल करने के लिए 16 अक्टूबर का समय दिया था। पार्टी सांसद कल्याण बनर्जी ने बताया था कि आयोग की तरफ से 16 और 17 सितंबर को बुलाया गया है, लेकिन इस संबंध में अंतरिम आदेश जारी नहीं हुआ है।
दरअसल, आयोग ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी, तो 17 सितंबर को शाम 4 बजे राष्ट्रीय राजधानी के निर्वाचन सदन में आगे की सुनवाई होगी, जिसके बाद आयोग इस विवाद पर अपना अंतिम फैसला सुना सकता है।
चुनाव आयोग ने मांगे थे दस्तावेज
इससे पहले 12 सितंबर को चुनाव आयोग ने ऋताब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले बागी गुट से और दस्तावेज जमा करने के लिए कहा था। उसी समय मीडिया रिपोर्ट्स में कालीघाट टीएमसी नाम से चल रही ममता बनर्जी की पार्टी के नेता भी मौजूद रहे थे। इनमें डेरेक ओब्रायन, कल्याण बनर्जी, सागरिका घोष, साकेत गोखले का नाम भी शामिल है।
सांसद भी टूट रहे?
लोकसभा में टीएमसी के पास कुल 27 सांसद थे, जो अब घटकर 7 रह गए हैं। पार्टी के 20 सांसदों ने NCPI यानी नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया नाम के एक छोटे दल में विलय कर लिया था। इसी बीच अटकलों का दौर शुरू हो गया कि इनमें से भी 17 सांसद अब भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं और दल बदल दुर्गा पूजा के बाद या पहले हो सकता है।
हालांकि, गुट ने इससे इनकार कर दिया था और दावा करने वाले सांसद जगदीशचंद्र बसुनिया के दावे को उनकी व्यक्तिगत राय बताया था। खास बात है कि भाजपा ने भी साफ कर दिया है कि पार्टी अभी किसी भी नेता को लेने के बारे में नहीं सोच रही है।


