ममता बनर्जी की शरण में वापस लौटे बागी मुस्लिम विधायक, बोले- दीदी ही हमारी नेता हैं
कासेम सिद्दीकी की मुस्लिम समुदाय के बीच काफी मजबूत पकड़ मानी जाती है। पिछले साल तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के बाद पार्टी ने उन्हें राज्य का महासचिव बनाया था

बंगाल चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस में मचे कलह के बाद अब ममता बनर्जी से बागी हुए विधायक वापस टीएमसी में लौट गए हैं। उत्तर 24 परगना जिले की आमडांगा विधानसभा सीट से TMC विधायक कासेम सिद्दीकी ने बागी गुट को छोड़कर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खेमे में लौटने की घोषणा कर दी है। घर वापसी के बाद उन्होंने कहा है कि ‘दीदी ही सब कुछ हैं।’
बता दें कि इससे पहले पार्टी के 50 से ज्यादा विधायक ममता बनर्जी से बागी हो गए थे। ये विधायक विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले बागी गुट में शामिल हो गए थे और ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। हालांकि अब मुस्लिम विधायक ने ममता बनर्जी की जमकर तारीफ की है।
क्या बोले सिद्दीकी?
ममता बनर्जी के प्रति अपनी वफादारी का दावा करते हुए कासेम सिद्दीकी ने बागी गुट को छोड़ने के पीछे की वजह भी स्पष्ट की। सिद्दीकी ने एक बयान में कहा कि उनके साथ धोखा हुआ था। उन्होंने कहा, “हमें बताया गया था कि दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं और यह हस्ताक्षर दीदी तक पहुंचेंगे। हमें यह समझाया गया था कि बागी गुट भी ममता बनर्जी के नेतृत्व में ही काम करेगा।”
सिद्दीकी ने आगे बताया कि जब वे वहां गए, तो देखा कि उस गुट के कामकाज में TMC सुप्रीमो का कोई नाम या जिक्र ही नहीं था। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “दीदी ही हमारे लिए सब कुछ हैं। उन्होंने ही हमें टिकट दिया और विधानसभा भेजा। हमने उनकी तस्वीर दिखाकर लोगों से वोट मांगे और लोगों ने भी उन्हें देखकर ही हमें चुना। हम जब तक राजनीति में हैं, दीदी के साथ ही रहेंगे।”
पार्टी ने बनाया था महासचिव
गौरतलब है कि हुगली जिले के फुरफुरा शरीफ दरगाह से संबंध रखने वाले 'पीरजादा' कासेम सिद्दीकी की मुस्लिम समुदाय के बीच काफी मजबूत पकड़ मानी जाती है। वे पिछले साल ही तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए थे। इसके बाद पार्टी ने उन्हें राज्य का महासचिव बनाया था और विधानसभा चुनाव में आमडांगा सीट से टिकट थमाया। सिद्दीकी ने अपनी जीत ली।
TMC में कलह जारी
इधर तृणमूल कांग्रेस में आपसी कलह जारी है। पार्टी के दोनों गुटों ने 28 अगस्त को मेयो रोड पर गांधी प्रतिमा के पास तृणमूल छात्र परिषद का स्थापना दिवस मनाने की अनुमति के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले कालीघाट गुट ने सोमवार को कोर्ट में अर्जी दाखिल कर पारंपरिक जगह पर कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति के लिए तत्काल सुनवाई की मांग की।
जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने जल्द सुनवाई की याचिका को स्वीकार कर लिया और मामले पर मंगलवार को सुनवाई होगी। गौरतलब है कि तृणमूल कांग्रेस पारंपरिक रूप से हर साल मेयो रोड पर अपनी छात्र शाखा का स्थापना दिवस मनाती रही है। हालांकि इस साल 2026 के विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार और उसके बाद पार्टी में विभाजन के कारण यह कार्यक्रम विवाद का विषय बन गया है।


