बंगाल में गुंडों पर लगेगी लगाम, दंगाइयों की भी खैर नहीं; सीएम शुभेंदु अधिकारी बोले-बहुत जरूरी था

लाइव हिन्दुस्तान, कोलकाता
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पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार ने सोमवार को दो नए कानून लागू कर लिए यह कानून प्रदेश में संगठित अपराध और हिंसक विरोध प्रदर्शनों पर अंकुश लगाने के लिए लागू किए हैं। इसको लेकर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का बयान आया है।

West Bengal introduces laws to control criminals CM Suvendu Adhikari Targest Communists and TMC

पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार ने सोमवार को दो नए कानून लागू कर लिए यह कानून प्रदेश में संगठित अपराध और हिंसक विरोध प्रदर्शनों पर अंकुश लगाने के लिए लागू किए हैं। इसको लेकर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का बयान आया है। शुभेंदु अधिकारी ने कहाकि यह बहुत जरूरी हो गया था। शुभेंदु ने कहाकि कम्यूनिस्ट ठगों ने 34 साल तक बंगाल पर शासन किया। फिर 15 साल तक टीएमसी के गुंडे यहां पर सत्ता में रहे। उन लोगों पर लगाम लगाने के लिए यह कानून बेहद जरूरी था। मुख्यमंत्री ने कहाकि हमारी सरकार ने विधानसभा में इसे पास किया और राज्यपाल ने इस पर मुहर लगा दी है।

गुंडा रोधी कानून

बंगाल में लागू इन कानूनों के तहत अधिकारियों को बिना मुकदमे के संदिग्धों को हिरासत में रखने और दंगाइयों की संपत्ति कुर्क करके नुकसान की भरपाई करने का अधिकार दिया गया है। शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को बरुईपार में इस कानून के बारे में ऐलान किया था। प्रदेश मुख्यालय नाबन्ना के मुताबिक यह कानून, राज्य में कानून-व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखने में अहम भूमिका निभाएगा। इसके साथ ही साथ संगठित अपराध और असामाजिक गतिविधियों पर लगाम लगाने में भी यह काफी जरूरी होगा। पश्चिम बंगाल जन सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण अधिनियम, 2026, को ‘गुंडा रोधी कानून’ भी कहा गया है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल लोक व्यवस्था अनुरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2026 सोमवार से प्रभावी हो गए। इन दोनों विधेयकों को राज्य विधानसभा ने 29 जून को पारित किया था।

पुलिस को मिले अधिकार

अधिकारियों के अनुसार, गुंडा रोधी कानून जिलाधिकारियों और पुलिस आयुक्तों को यह अधिकार देता है कि यदि किसी व्यक्ति के असामाजिक गतिविधियों में शामिल होने की आशंका हो, तो उसे अधिकतम 12 महीने तक एहतियाती हिरासत में रखने का आदेश दिया जा सकता है। हिरासत से जुड़े आदेश को 15 दिनों के भीतर राज्य सरकार को मंजूरी देनी होगी और तीन सप्ताह के भीतर उच्च न्यायालय के मौजूदा या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले सलाहकार बोर्ड द्वारा इसकी समीक्षा की जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि इस कानून में ‘गुंडा’ की परिभाषा का दायरा भी बढ़ाया गया है। अब इसमें केवल आदतन हिंसक अपराधी ही नहीं, बल्कि संगठित अपराध गिरोहों से जुड़े लोग, ऐसे अपराधों का वित्तपोषण या सहयोग करने वाले, शस्त्र अधिनियम, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी प्रदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत बार-बार अपराध करने वाले तथा समाज के लिए खतरा माने जाने वाले व्यक्तियों को भी शामिल किया गया है।

बदल गई है परिभाषा

इसके अलावा इस कानून में ‘असामाजिक गतिविधियों’ की परिभाषा का भी काफी विस्तार किया गया है। अब इसमें ऐसी गतिविधियां शामिल होंगी जो लोगों में भय या दहशत फैलाती हों और लोक व्यवस्था को खतरे में डालती हो। इसके अलावा, वैध व्यापार या कारोबार में बाधा उत्पन्न करने, संपत्ति पर अवैध कब्जा करने और सार्वजनिक या निजी संपत्ति को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियां भी इसमें शामिल की गई हैं। अवैध खनन, बिना अनुमति रेत खनन, वन एवं वन्यजीव अपराध जैसे आर्थिक और पर्यावरण संबंधी अपराधों को भी इस कानून के दायरे में लाया गया है।

तड़ीपार भी कर सकेंगे

नए प्रावधानों के तहत जिलाधिकारी और पुलिस आयुक्त तड़ीपार करने के आदेश भी जारी कर सकेंगे, जिसके तहत संदिग्ध अपराधियों को एक वर्ष तक किसी निर्धारित क्षेत्र में प्रवेश करने से रोका जा सकेगा। अधिकारियों के अनुसार, इस अधिनियम के तहत सभी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होंगे, जिससे पुलिस को बिना वारंट तलाशी लेने, जब्ती करने और गिरफ्तारी करने का अधिकार मिलेगा। पश्चिम बंगाल लोक व्यवस्था अनुरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत सरकार को दंगों या हिंसक प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक या निजी संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई के लिए आरोपियों की संपत्तियों को कुर्क कर उनकी नीलामी करने का अधिकार दिया गया है।

विपक्ष ने क्या कहा

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा में इन विधेयकों का समर्थन करते हुए कहा था कि राजनीतिक हिंसा, संगठित अपराध गिरोहों और तोड़फोड़ की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए राज्य को कड़े कानूनी प्रावधान करने की आवश्यकता है। उनका कहना था कि मौजूदा कानून पर्याप्त रूप से निरोधक नहीं हैं। वहीं, विपक्ष, विशेष रूप से तृणमूल कांग्रेस, ने इन कानूनों की आलोचना करते हुए इन्हें दमनकारी बताया और आरोप लगाया कि इन प्रावधानों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों और असहमति जताने वालों के खिलाफ किया जा सकता है।

Deepak Mishra

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Deepak Mishra

मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले दीपक मिश्रा के लिए पत्रकारिता में आना कोई संयोग नहीं था। घर में आने वाली तमाम मैगजीन्स और अखबार पढ़ते-पढ़ते खुद अखबार में खबर लिखने तक पहुंच गए। हालांकि सफर इतना आसान भी नहीं था। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद जब घरवालों को इस इरादे की भनक लगी तो खासा विरोध भी सहना पड़ा। फिर मन में ठाना कि चलो जमीनी अनुभव लेकर देखते हैं। इसी मंशा के साथ ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान आजमगढ़ के लोकल टीवी में काम करना शुरू किया। कैमरे पर शहर की गतिविधियां रिकॉर्ड करते, न्यूज बुलेटिन लिखते और कुछेक बार उन्हें कैमरे के सामने पढ़ते-पढ़ते इरादा मजबूत हो गया कि अब तो मीडिया में ही जाना है।

आजमगढ़ के डीएवी डिग्री कॉलेज से इंग्लिश, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री विषयों में ग्रेजुएशन के बाद वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर डिग्री। इसके बाद अखबारों में नौकरी का सिलसिला शुरू हुआ आज अखबार से। फिर दैनिक जागरण के बाइलिंगुअल अखबार आई नेक्स्ट में वाराणसी में डेस्क पर नौकरी। वहां से सेंट्रल डेस्क कानपुर का सफर और फिर पत्रिका अखबार के इवनिंगर न्यूज टुडे में सेंट्रल डेस्क हेड की जिम्मेदारी। बाद में पत्रिका अखबार के लिए खेल डेस्क पर भी काम करने का मौका मिला। पत्रिका ग्रुप में काम करते हुए 2014 फीफा वर्ल्ड कप की कवरेज के लिए अवॉर्ड भी मिला।

यूपी में वापसी हुई फिर से दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में और जिम्मेदारी मिली गोरखपुर में डेस्क हेड की। आई नेक्स्ट की दूसरी पारी में दो बार गोरखपुर एडिशन के संपादकीय प्रभारी की भी भूमिका निभाई। वहीं, कुछ अरसे तक इलाहाबाद में डेस्क हेड की जिम्मेदारी भी संभाली। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में काम करने के दौरान, डिजिटल फॉर्मेट के लिए वीडियो स्टोरीज करते रहे। इसमें कुंभ 2019 के लिए वीडियो स्टोरीज भी शामिल हैं। बाद में यहां पर पॉडकास्ट के दो शो किए। जिनमें से एक आईपीएल रिकॉर्ड बुक और दूसरा शहर का किस्सा रहा।

जून 2021 से लाइव हिन्दुस्तान में होम टीम का हिस्सा। इस दौरान तमाम चुनाव, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों की खबरें की। साथ ही क्रिकेट टीम के साथ सहभागिता निभाते हुए आईपीएल और टी-20 विश्वकप, चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कवरेज में सक्रिय भूमिका निभाई। कुंभ 2025 के दौरान लाइव हिन्दुस्तान के लिए वीडियो स्टोरीज कीं।

अगर रुचि की बात करें तो फिल्में देखना, किताबें पढ़ना, कुछ नई स्किल्स सीखते रहना प्रमुख हैं। मिररलेस कैमरे के साथ वीडियो शूट करना और प्रीमियर प्रो पर एडिटिंग में दक्षता। प्रिय विषयों में सिनेमा और खेल दिल के बेहद करीब हैं।

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