
बंगाल में SIR से पहले बड़ा फेरबदल, 64 आईएएस अफसरों और 10 जिलाधिकारियों के तबादले
मुख्यमंत्री और टीएमसी चीफ ममता बनर्जी ने SIR को NCR का दूसरा रूप बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मतदाता सूची से वोटरों को हटाने का एक तंत्र है। टीएमसी ने इस मुद्दे के खिलाफ 2 नवंबर को विशाल रैली की योजना बनाई है।
पश्चिम बंगाल सरकार ने 1 नवंबर से शुरू होने वाली विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया से पहले 64 आईएएस अधिकारियों और 10 जिला मजिस्ट्रेटों के तबादले किए हैं। इनमें उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, कूच बिहार, मुर्शिदाबाद, पुरुलिया, दार्जिलिंग, मालदा, बीरभूम, झारग्राम और पूर्व मिदनापुर जैसे जिले शामिल हैं। नबन्ना में राज्य के प्रशासनिक मुख्यालय ने एसआईआर शुरू होने के बाद तबादलों पर रोक के कारण यह आदेश पहले ही जारी कर दिए, ताकि बाधाओं से बचा जा सके।

मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने SIR को NCR का दूसरा रूप बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मतदाता सूची से वोटरों को हटाने का एक तंत्र है। टीएमसी ने इस मुद्दे के खिलाफ कोलकाता में 2 नवंबर को विशाल रैली की योजना बनाई है, जिसका नेतृत्व पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी करेंगे। पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह रैली टीएमसी के हाल के महीनों में सबसे बड़े जन अभियानों में से एक होगी और इसे चुनावी कैंपेन का प्रमुख हिस्सा बनाया जाएगा।
SIR कराने की तैयारी में चुनाव आयोग
चुनाव आयोग SIR लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार है, जबकि टीएमसी इसका हर स्तर पर विरोध करने को प्रतिबद्ध है। भारतीय जनता पार्टी ने एसआईआर का स्वागत किया है। बीजेपी का दावा है कि इस प्रक्रिया से एक करोड़ से अधिक अवैध वोटरों को हटाया जाएगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों को तत्काल तैयारी शुरू करने और अटके कामों को पूरा करने का निर्देश दिया है। प्रत्येक जिला निर्वाचन अधिकारी और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को एसआईआर से संबंधित मामलों के लिए अपने कार्यालयों में हेल्प डेस्क स्थापित करने के लिए कहा गया है।





