भागना है तो भागो वरना… शुभेंदु अधिकारी ने घुसपैठियों को चेताया; बताया अब तक कितनों को खदेड़ा बांग्लादेश
शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा में बोलते हुए हाल ही में सत्ता से बेदखल हुई ममता बनर्जी की तृणमूल सरकार पर भी निशाना साधा। CM शुभेंदु ने सवाल उठाए कि बॉर्डर पर इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने के लिए BSF को जमीन क्यों नहीं दी गई।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी मंगलवार को विधानसभा में गरजे हैं। विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान उन्होंने घुसपैठियों के मुद्दे पर पिछली सरकार को तीखा हमला बोला। इस दौरान शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि सत्ता में आने के बाद से उनकी सरकार ने हजारों अवैध प्रवासियों की पहचान की है और उन्हें वापस भेजना शुरू कर दिया है। CM शुभेंदु ने घुसपैठियों को चेतावनी देते हुए कहा कि कई लोग भाजपा सरकार के डर से पहले ही बांग्लादेश भाग चुके हैं और बाकियों को भी भागना है तो वे जा सकते हैं।
CM शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि अब तक 10,000 अवैध प्रवासियों की पहचान करके उन्हें सीमा के पार भेजा जा चुका है। वहीं 1,800 अन्य लोग 12 केंद्रों में वापस भेजे जाने का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में अवैध रूप से रह रहे लोगों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। शुभेंदु अधिकारी ने कहा, ''हमने उन्हें सीमा के उस पार वापस भेजना शुरू कर दिया है। उन्हें जेल में नहीं डाला जाएगा और न ही कोई सजा दी जाएगी। उन्हें सीधे वापस भेज दिया जाएगा।''
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि कोई भी घुसपैठियां अगर भागना चाहता है कि उसे जल्दी चले जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ''जो लोग जाना चाहते हैं, वे जा सकते हैं। मेरा बयान सुनकर कई लोग पहले ही हकीमपुर के रास्ते भाग चुके हैं। अगर कोई अब भी बचा है, तो उसे जल्दी भाग जाना चाहिए।''
भारतीयों को चिंता की जरूरत नहीं: शुभेंदु अधिकारी
शुभेंदु अधिकारी ने इस बीच यह भी कहा कि भारत के नागरिकों को डरने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा, ''भारत के वास्तविक नागरिकों को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे किस धर्म या समुदाय से हैं या उनका राजनीतिक झुकाव क्या है।'' उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ केवल भारतीय नागरिकों को ही मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा, ''हम किसी भी अवैध प्रवासी को इन योजनाओं के लिए आवंटित धन का लाभ नहीं उठाने देंगे।'' उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के दायरे में नहीं आते हैं, उन्हें वापस भेज दिया जाएगा।
टीएमसी पर हमला
आगे तृणमूल कांग्रेस की पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सवाल उठाए कि सीमा पर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए सीमा सुरक्षा बल को जमीन क्यों नहीं दी गई। उन्होंने कहा, ''पिछली मुख्यमंत्री ने इसी विधानसभा में खड़े होकर बार-बार बीएसएफ की आलोचना की। बेहतर होता कि पहले जमीन दी जाती और फिर उनकी आलोचना की जाती।'' सदन में आंकड़े पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सत्ता संभालने के बाद से उनकी सरकार ने बीएसएफ को 142.79 एकड़ जमीन सौंपी है और सीमा पर बाड़ लगाने का काम जल्द ही शुरू किया जाएगा।
ममता बनर्जी पर कस दिया तंज
इस बीच अधिकारी ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तंज भी कस दिया। उन्होंने कहा कि क्या विधानसभा चुनाव के दौरान अपने ही बूथ पर हारने के बाद ममता बनर्जी अब भी जन-नेता हैं। बता दें कि शुभेंदु ने ममता को उनके गढ़ भवानीपुर में 15,105 मतों के अंतर से हराया था। मुख्यमंत्री ने चुनाव परिणाम का जिक्र करते हुए कहा, “अपने ही बूथ पर हारने के बाद भी क्या उन्हें (ममता) जन-नेता कहा जा सकता है?” शुभेंदु अधिकारी ने कहा, "विधानसभा में इस माइक के सामने खड़े होकर उन्होंने मुझसे कहा था कि 'आप नगरपालिका चुनाव हार गए।' आज वह घर पर बैठकर मेरी बात सुन रही हैं। मैंने उनसे कहा था कि लोग जवाब देंगे और उन्होंने जवाब दिया है।" शुभेंदु की इस टिप्पणी के बाद तृणमूल कांग्रेस के विधायकों के एक समूह ने सदन में हंगामा शुरू कर दिया।
लेखक के बारे में
Jagriti Kumariजागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।
और पढ़ें

