नंदीग्राम पर ममता ने साधी चुप्पी, उधर कांग्रेस ने उतार दिया उम्मीदवार; शुभेंदु के गढ़ में महासंग्राम

लाइव हिन्दुस्तान, कोलकाता
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West Bengal Bypolls: कांग्रेस ने नंदीग्राम से मिलन प्रधान और रेजीनगर से मोहम्मद अब्दुल्लाहिल को उम्मीदवार बनाया है। नंदीग्राम सीट शुभेंदु के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान और 9 अक्टूबर को मतगणना होगी

नंदीग्राम-रेजीनगर उपचुनाव के लिए कांग्रेस का बड़ा दांव, जानें किसे बनाया उम्मीदवार
नंदीग्राम-रेजीनगर उपचुनाव के लिए कांग्रेस का बड़ा दांव, जानें किसे बनाया उम्मीदवार

पश्चिम बंगाल के दो बेहद अहम विधानसभा क्षेत्रों नंदीग्राम और रेजीनगर में होने वाले उपचुनाव को लेकर कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। कांग्रेस ने नंदीग्राम से मिलन प्रधान और रेजीनगर से मोहम्मद अब्दुल्लाहिल कफी को मैदान में उतारा है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने दोनों उम्मीदवारों के नामों को मंजूरी दी है। कांग्रेस की ओर से शुक्रवार को इसकी आधिकारिक घोषणा की गई।

नंदीग्राम कभी बंगाल की पूर्व मु्ख्यमंत्री ममता बनर्जी का गढ़ हुआ करता था लेकिन अब शुभेंदु अधिकारी का यहां बोलबाला है। दिलचस्प बात ये है ममता बनर्जी ने नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर चुप्पी साधी हुई है वहीं कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार का ऐलान कर दिया है। टीएमसी के कई नेता खुद ममता बनर्जी से नंदीग्राम से चुनाव लड़ने की अपील कर चुके हैं।

इन दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा, जबकि 9 अक्टूबर को वोटों की गिनती की जाएगी। ऐसे में दुर्गापूजा के मौसम से ठीक पहले होने वाला यह उपचुनाव पश्चिम बंगाल की राजनीति में काफी अहम माना जा रहा है। कांग्रेस के उम्मीदवारों की घोषणा ऐसे समय हुई है जब दोनों सीटों पर राजनीतिक मुकाबला तेजी से आकार ले रहा है। खासकर नंदीग्राम की लड़ाई पर पूरे बंगाल की नजर है, क्योंकि यह सीट पिछले कुछ वर्षों में राज्य की सबसे चर्चित राजनीतिक सीटों में रही है।

विधानसभा क्षेत्रजिलाकांग्रेस उम्मीदवारउपचुनाव का कारण
रेजीनगरमुर्शिदाबादमोहम्मद अब्दुल्लाहील कफीहुमायूं कबीर (AJUP संस्थापक) द्वारा सीट खाली करना
नंदीग्रामपूर्ब मेदिनीपुरमिलन प्रधानमुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा सीट खाली करना (भवानीपुर सीट बरकरार रखी)

क्यों खाली हुई नंदीग्राम सीट?

नंदीग्राम सीट के खाली होने की वजह इस बार का विधानसभा चुनाव है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 2026 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम और भवानीपुर, दोनों सीटों से जीत हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने भवानीपुर सीट अपने पास रखी और नंदीग्राम विधानसभा सदस्य के पद से इस्तीफा दे दिया। इसी कारण नंदीग्राम में उपचुनाव की नौबत आई।

नंदीग्राम का राजनीतिक महत्व समझने के लिए 2021 का विधानसभा चुनाव भी याद करना जरूरी है। उस चुनाव में ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच इसी सीट पर हाई-वोल्टेज मुकाबला हुआ था, जिसमें अधिकारी ने ममता को शिकस्त दी थी। 2026 में भी अधिकारी ने नंदीग्राम से जीत हासिल की, लेकिन दो सीटों से जीतने के बाद उन्हें एक सीट छोड़नी पड़ी।

अब उनके इस्तीफे के बाद होने वाला उपचुनाव इस सवाल के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि नंदीग्राम में भाजपा अपनी पकड़ बरकरार रख पाती है या विपक्ष इस सीट पर नया समीकरण बनाने में सफल होता है।

रेजीनगर सीट क्यों हुई खाली?

मुर्शिदाबाद की रेजीनगर विधानसभा सीट भी विधायक के इस्तीफे के कारण खाली हुई है। यहां से आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के संस्थापक हुमायूं कबीर ने जीत दर्ज की थी। कबीर ने रेजीनगर के साथ-साथ नवदा विधानसभा सीट से भी जीत हासिल की थी। इसके बाद रेजीनगर की सीट खाली हुई और यहां उपचुनाव की जरूरत पड़ी।

रेजीनगर में कांग्रेस ने मोहम्मद अब्दुल्लाहिल कफी को उम्मीदवार बनाकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। मुर्शिदाबाद की राजनीति में इस सीट के नतीजे का असर आने वाले दिनों में राज्य की विपक्षी राजनीति पर भी पड़ सकता है।

नंदीग्राम में फिर ममता बनाम शुभेंदु की छाया?

नंदीग्राम उपचुनाव का सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल सिर्फ यह नहीं है कि भाजपा, कांग्रेस या तृणमूल में से कौन जीतता है। असली चर्चा इस बात को लेकर है कि क्या ममता बनर्जी खुद नंदीग्राम से चुनाव लड़ेंगी?

हाल के दिनों में तृणमूल कांग्रेस के एक बागी धड़े ने सार्वजनिक तौर पर ममता बनर्जी से नंदीग्राम से चुनाव लड़ने की अपील की है। इस धड़े ने यहां तक कहा है कि अगर ममता उम्मीदवार बनती हैं तो वह उनके खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारेगा।

हालांकि, ममता बनर्जी के नंदीग्राम से चुनाव लड़ने की अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, इसलिए इसे फिलहाल राजनीतिक अटकल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

टीएमसी के सामने एक और बड़ी चुनौती

नंदीग्राम उपचुनाव ऐसे समय हो रहा है जब तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर दो धड़ों के बीच विवाद चल रहा है। दोनों पक्ष पार्टी और उसके चुनाव चिह्न पर अपना दावा जता रहे हैं। इस विवाद का असर उपचुनाव की रणनीति पर पड़ना तय माना जा रहा है।

इसी वजह से नंदीग्राम में मुकाबला सिर्फ भाजपा बनाम तृणमूल नहीं रह गया है। कांग्रेस और वामपंथी दलों की रणनीति, तृणमूल के भीतर चल रहा विवाद और ममता बनर्जी की संभावित भूमिका- इन सभी पर चुनाव की दिशा काफी हद तक निर्भर कर सकती है।

6 अक्टूबर को वोटिंग, 9 अक्टूबर को आएगा फैसला

चुनाव आयोग पहले ही दोनों सीटों के लिए उपचुनाव कार्यक्रम जारी कर चुका है। 6 अक्टूबर को मतदान होगा और 9 अक्टूबर को मतगणना की जाएगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 16 सितंबर, नामांकन पत्रों की जांच 17 सितंबर और नाम वापस लेने की आखिरी तारीख 19 सितंबर है।

इस तरह कांग्रेस के उम्मीदवारों की घोषणा के साथ ही नंदीग्राम और रेजीनगर का चुनावी मुकाबला अब औपचारिक तौर पर तेज हो गया है। आने वाले दिनों में भाजपा और तृणमूल के उम्मीदवारों के नाम सामने आने के बाद दोनों सीटों की तस्वीर और साफ होगी।

नंदीग्राम में खास तौर पर यह उपचुनाव इसलिए भी अहम है क्योंकि यहां का नतीजा सिर्फ एक विधानसभा सीट का परिणाम नहीं होगा, बल्कि यह बंगाल की बदली हुई राजनीतिक ताकत और 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद बने नए समीकरणों का भी बड़ा संकेत दे सकता है।

Amit Kumar

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