अफीम के बदले कनाडा से भारत भेजे जा रहे हथियार,पार्सल से खुला नार्को-टेरर का जाल
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने ड्रग्स तस्करी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। खालिस्तानी अर्शदीप डल्ला खाने पीने की आड़ में अफीम तस्करी करवा रहा था। इन पैसों का इस्तेमाल देश विरोधी गतिविधियों में होता था।

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए विदेश में बैठे घोषित खालिस्तान समर्थक आतंकी अर्शदीप सिंह उर्फ अर्श डल्ला द्वारा संचालित अंतरराष्ट्रीय नार्को-टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है।मयह गिरोह कनाडा जाने वाले कूरियर पार्सल में खाने-पीने के सामान की आड़ में अफीम की तस्करी कर रहा था।
इस ड्रग्स तस्करी से मिलने वाले पैसों का इस्तेमाल ‘ड्रग्स के बदले हथियार’ (ड्रग्स फॉर वेपन्स) चक्र के जरिए भारत में आतंकी गतिविधियों को फाइनेंस करने के लिए किया जा रहा था। पुलिस ने पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में एक साथ छापेमारी कर गिरोह के चार मुख्य सरगनाओं को गिरफ्तार किया है, जबकि कनाडा में बैठे अर्श डल्ला और उसके सहयोगियों पर शिकंजा कसा जा रहा है।
मिठाई के डिब्बे में अफीम से खुला राज
क्राइम ब्रांच के स्पेशल कमिश्नर एचजीएस धालीवाल के मुताबिक, इस ऑपरेशन की शुरुआत सात फरवरी 2026 को दिल्ली के मोती नगर स्थित एक अंतरराष्ट्रीय कूरियर कंपनी के दफ्तर से मिले सीक्रेट इनपुट के बाद हुई। पुलिस ने कनाडा जा रहे एक संदिग्ध पार्सल को रोका, जिसमें ऊपर स्नैक्स, बिस्कुट और मिठाइयां रखी थीं। सघन जांच में बॉक्स के नीचे पेशेवर तरीके से बनाए गए गुप्त केबिन से 2.998 किलोग्राम अफीम बरामद हुई।
एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जब जांच आगे बढ़ाई गई, तो पंजाब, हरियाणा और राजस्थान तक फैले इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां खुलती चली गईं। पुलिस ने मुख्य ‘डिस्पैचर’ सिमरनजीत सिंह (24, निवासी बठिंडा, पंजाब) को 3 किलो अफीम के एक अन्य पार्सल के साथ रंगे हाथों दबोच लिया। सिमरनजीत अनजान लोगों के नाम पर फर्जी केवाईसी दस्तावेज तैयार कर कूरियर कंपनियों से पार्सल बुक कराने का काम करता था। एजेंसियों से बचने के लिए आरोपी भारत में रहते हुए भी सिर्फ कनाडाई व्हाट्सएप नंबरों, स्नैपचैट और सिग्नल जैसी एन्क्रिप्टेड ऐप्स का इस्तेमाल करते थे।
ड्रग्स फॉर वेपन्स : नशा बाहर, आधुनिक हथियार अंदर
जांच में सामने आया कि कनाडा भेजी गई अफीम को आतंकी अर्श डल्ला और उसके गुर्गे वहां बेचते थे। इस कमाई का एक हिस्सा कनाडा में डल्ला के गिरोह के विस्तार और आपराधिक गतिविधियों में लगाया जाता था, जबकि बाकी रकम भारत-विरोधी विदेशी आकाओं तक पहुंचाई जाती थी। इस रकम के बदले विदेशी आका पंजाब की सीमा पर ड्रोन के जरिए अत्याधुनिक हथियार भारत भेज रहे थे। इन हथियारों को पंजाब और दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय गैंगस्टर्स व अर्श डल्ला के स्लीपर सेल्स तक पहुंचाया जाना था, ताकि देश में टारगेट किलिंग और दहशत फैलाई जा सके।
चार राज्यों में छापेमारी
● सिमरनजीत के मोबाइल और एन्क्रिप्टेड चैट (व्हाट्सऐप/सिग्नल) के फोरेंसिक विश्लेषण से मिले सुरागों के आधार पर पुलिस ने ताबड़तोड़ छापेमारी की।
● 28 वर्षीय हरदीप सिंह (बरनाला, पंजाब) मॉड्यूल का ‘ऑपरेशनल कोऑर्डिनेटर’ था। यह जीपीएस लोकेशन के जरिए खुफिया ठिकानों से अफीम की डिलीवरी उठाता था और पूरा लेन-देन संभालता था।
● 30 वर्षीय यादविंदर सिंह उर्फ जशन संधू (सिरसा, हरियाणा) देश में सक्रिय गुर्गों और विदेश में बैठे खालिस्तानी आकाओं के बीच मुख्य वित्तीय कड़ी (पुल) था।
● 23 वर्षीय जीवन सिंह (बालोतरा, राजस्थान) राजस्थान नेटवर्क का मुख्य डिस्पैचर था, जिसने अफीम की स्थानीय खरीद और सप्लाई सुनिश्चित की। इसके जरिए ही बठिंडा से जा रहे एक और पार्सल का सुराग पुलिस को मिला था। (हिन्दुस्तान प्रिंट के सहयोग से)


