
हम सुपर एक्सपर्ट नहीं लेकिन आप फेल रहे... दिल्ली-NCR में पलूशन मुद्दे पर किस पर भड़के CJI
कोविड-19 महामारी के समय का ज़िक्र करते हुए कोर्ट ने कहा कि उस समय पराली जलाने का काम चरम पर था, फिर भी दिल्ली में आसमान साफ और नीला था, जिससे पता चलता है कि प्रदूषण के स्रोत ज़्यादा जटिल हैं और उसके विश्लेषण की जरूरत है।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण के मुद्दे पर आज (मंगलवार, 6 जनवरी) देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई की। सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि पीठ दिल्ली में प्रदूषण के कारण या समाधान की पहचान करने की जल्दबाजी में नहीं है लेकिन एयर क्वालिटी मॉनिटर करने वाली संस्था Commission for Air Quality Management (CAQM) ने अपना सही काम नहीं किया। सीजेआई ने CAQM को फटकार लगाते हुए दो टूक कहा कि आप अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहे हैं।
दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण संकट की सुनवाई करते हुए CJI ने वायु प्रदूषण के कारणों को चुनिंदा तरीके से बताने पर चिंता जताई और इस बात पर जोर दिया कि पॉलिसी से जुड़े फैसले अनुमानों के बजाय वैज्ञानिक सबूतों पर आधारित होने चाहिए। कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण के लिए सिर्फ बसों और ट्रकों को दोष देना आसान है, लेकिन सवाल किया कि अगर पब्लिक ट्रांसपोर्ट रोक दिया जाए तो आम आदमी कैसे यात्रा कर सकेगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि दूसरे योगदान देने वाले कारकों का ठीक से आकलन किए बिना अक्सर किसानों को ही प्रदूषण का पूरा दोष झेलना पड़ता है।
कोविड-19 के समय तो आसमान बिल्कुल साफ था: CJI
कोविड-19 महामारी के समय का ज़िक्र करते हुए कोर्ट ने कहा कि उस समय पराली जलाने का काम अपने चरम पर था, फिर भी दिल्ली में आसमान साफ और नीला था, जिससे पता चलता है कि प्रदूषण के स्रोत ज़्यादा जटिल हैं और उन्हें गहरे विश्लेषण की ज़रूरत है। बेंच ने इस बात पर ज़ोर दिया कि पहले प्रदूषण के असली कारणों की पहचान की जाए और फिर प्रभावी समाधानों की दिशा में काम किया जाए। कोर्ट ने कहा कि इसके लिए वह हड़बड़ी में नहीं है। पीठ ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इन कारणों को सार्वजनिक करें और साफ तौर पर बताएं कि वे उनसे कैसे निपटेंगे।
CAQM को फटकार
CJI सूर्यकांत ने CAQM को फटकार लगाते हुए कहा, “क्या आप कारणों की पहचान कर पाए हैं? यही मुख्य मुद्दा है… इन सभी दिनों में, बहुत सारा मटेरियल पब्लिक डोमेन में आ रहा है, विशेषज्ञ लेख लिख रहे हैं, लोगों की राय है, वे हमें मेल पर भेजते रहते हैं...भारी वाहन एक बड़ा हिस्सा योगदान दे रहे हैं, इसलिए पहला सवाल यह है कि हम उससे कैसे निपटें...NCR में, हाउसिंग एक्टिविटीज़ की बहुत बुरी खबरें हैं, निर्माण कार्य जारी हैं।”

हम सुपर एक्सपर्ट होने का दावा नहीं करते
CJI ने कहा कि मामले में एमिकस क्यूरी ने एक लंबी रिपोर्ट जमा की है, जिसमें कई दीर्घकालिक समाधान सुझाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक विशेषज्ञ संस्था को प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करने और सबसे ज़्यादा योगदान देने वालों का अनुमानित आकलन प्रदान करने का काम सौंपा जाना चाहिए। इस जानकारी को सार्वजनिक करने से नागरिकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि विशेषज्ञ प्रदूषण के असली कारण किसे मानते हैं। अपनी भूमिका स्पष्ट करते हुए, कोर्ट ने कहा कि वह इस मुद्दे पर खुद को सुपर एक्सपर्ट होने का दावा नहीं करता है, लेकिन पारदर्शी और जवाबदेह निर्णय लेने को सुनिश्चित करने के लिए सूचित विचार-विमर्श के लिए एक मंच प्रदान करेगा।





