हम हिटलर नहीं, पाकिस्तान के साथ बातचीत के रास्ते खुले रखने होंगे; मोहन भागवत ने ऐसा क्यों कहा
Mohan Bhagwat: संघ प्रमुख ने भविष्य की एक परिस्थिति का खाका खींचते हुए कहा कि अगर आने वाले समय में भारत पाकिस्तान को पूरी तरह परास्त कर देता है तो ऐसी स्थिति में वहां के लोगों को लेकर दो ही रास्ते होंगे।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने संगठन के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले के उस बयान का पुरजोर समर्थन किया है जिसमें उन्होंने पाकिस्तान के साथ बातचीत की खिड़की खुली रखने की वकालत की थी। संघ प्रमुख ने स्पष्ट किया कि होसबले का इशारा पड़ोसी देश की सरकार की तरफ नहीं, बल्कि वहां के आम लोगों की तरफ था। तिरुवनंतपुरम में आरएसएस के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित एक संवाद कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने यह बातें कहीं।
मई महीने में दत्तात्रेय होसबले द्वारा दिए गए एक इंटरव्यू का हवाला देते हुए जब भागवत से संघ के रुख के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि किसी भी देश को लेकर आरएसएस की कोई स्वतंत्र विदेश नीति नहीं होती और संगठन इस मामले में केंद्र सरकार के रुख और नीतियों का ही पालन करता है। लेकिन उन्होंने वहां के समाज को लेकर एक बड़ा दावा किया।
मोहन भागवत ने कहा, "पाकिस्तान में आज भी ऐसे बहुत से लोग हैं जो यह मानते हैं कि भारत का विभाजन गलत था। वहां के कई पत्रकार भी आरएसएस और उसके काम की तारीफ करते हैं। पाकिस्तान के भीतर एक बड़ा ऐसा वर्ग मौजूद है जो पाकिस्तान की मूल विचारधारा और टू-नेशन थ्योरी के खिलाफ है। उनका मानना है कि हमारा साथ रहना ज्यादा बेहतर था।"
हिटलर का भी जिक्र
संघ प्रमुख ने भविष्य की एक परिस्थिति का खाका खींचते हुए कहा कि अगर आने वाले समय में भारत पाकिस्तान को पूरी तरह परास्त कर देता है तो ऐसी स्थिति में वहां के लोगों को लेकर दो ही रास्ते होंगे। या तो उन्हें भारत के साथ मिलाना होगा या फिर उन्हें उसी देश में शांति से रहने लायक माहौल देना होगा। उन्होंने कहा, "इन दोनों ही परिस्थितियों के लिए बातचीत के दरवाजे खुले रखना बेहद जरूरी है। हम हिटलर की तरह नहीं हैं। यह न तो हमारी प्रकृति है और न ही हमारा रास्ता। इसलिए हमें कुछ रास्ते खुले रखने होंगे। हमें अन्याय और अत्याचार को पूरी तरह खत्म करना चाहिए, लेकिन जो कुछ भी अच्छा है उसे बचाकर रखना भी हमारा कर्तव्य है।"
होसबले ने क्या कहा था?
इससे पहले मई में दिए एक इंटरव्यू में जब दत्तात्रेय होसबले से पूछा गया था कि भारत को पाकिस्तान और उसके द्वारा प्रायोजित आतंकवाद से कैसे निपटना चाहिए? तब उन्होंने कहा था, "किसी भी देश की सुरक्षा और आत्मसम्मान की रक्षा सबसे पहले होनी चाहिए और मौजूदा सरकार को इसका पूरा ध्यान रखना चाहिए। लेकिन इसके साथ ही हमें बातचीत के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं करने चाहिए। हमें हमेशा संवाद के लिए तैयार रहना चाहिए।"
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