Hindi NewsIndia NewsWe are not here to shout Shashi Tharoor reprimands his own party over the ruckus in Parliament
हम यहां चिल्लाने नहीं आए हैं, संसद में हंगामे पर शशि थरूर ने अपनी ही पार्टी की लगा दी क्लास

हम यहां चिल्लाने नहीं आए हैं, संसद में हंगामे पर शशि थरूर ने अपनी ही पार्टी की लगा दी क्लास

संक्षेप:

संसद में हंगामे को लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अपनी ही पार्टी को नसीहत दे डाली। उन्होंने विपक्षी सांसदों ने से कहा कि जनता हमें यहां अपना प्रतिनिधित्व करने के लिए भेजती है ना कि हंगामा करने और चिल्लाने के लिए। 

Dec 05, 2025 01:42 pm ISTAnkit Ojha लाइव हिन्दुस्तान
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मोदी सरकार की तारीफ करने और कांग्रेस की बैठकों में ना शामिल होने को लेकर शशि थरूर पिछले कुछ दिनों से पार्टी नेताओं के निशाने पर हैं। लोकसभा में उन्होंने एक बार फिर पार्टी नेताओं के साथ अनबन को खुलकर जाहिर कर दिया। लोकसभा में विपक्ष के हंगामे के दौरान शशि थरूर अपने ही नेताओं को नसीहत देने लगे। उन्होंने कहा कि संसद की कार्यवाही को ठीक से चलने देना चाहिए।

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थरूर ने कहा, मैंने शुरू से ही कहा है। सोनिया गांधी जी समेत मेरी पार्टी के सभी नेता जानते है। हो सकता है कि मैं अपनी पार्टी में अकेला ऐसी बात करने वाला हूं। लेकिन हमारी जनता ने हमें संसद में अपना प्रतिनिधित्व करने के लिए भेजा है। इस तरह से हंगामा करने और चिल्लाने के लिए नहीं भेजा है। जनता ने हमें उनकी समस्याओं को संसद में रखने के लिए यहां भेजा है।

बता दें कि संसद का शीत सत्र शुरू होने के साथ ही विपक्ष ने कई मुद्दों को लेकर हंगामा शुरू कर दिया है। विपक्ष का कहना है कि संसद में एसआईआर को लेकर चर्चा होनी चाहिए। बीते दिनों एसआईआर को लेकर ही कांग्रेस की एक रणनीतिक बैठक में थरूर नहीं पहुंचे थे। बैठक के एक दिन बाद ही वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में पहुंच गए। इसके बाद संसद के शीतसत्र को लेकर बनाई जाने वाली योजनाओं पर कांग्रेस की बैठक में भी शशि थरूर नहीं पहुंचे। बाद में उन्होंने बताया कि वह अपनी 90 साल की मां के साथ थे।

शुक्रवार को डीएमके के वरिष्ठ नेता टी आर बालू ने तमिलनाडु में एक दरगाह के निकट स्थित मंदिर में ‘कार्तिगई दीपम’ से जुड़ा मुद्दा शुक्रवार को लोकसभा में उठाया और मद्रास उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश पर टिप्पणी की, जिस पर सत्तापक्ष ने तीखी आपत्ति जताई। बालू ने सदन में शून्यकाल के दौरान यह विषय उठाया और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का नाम लिए बगैर आरोप लगाया कि एक दल द्वारा सांप्रदायिक टकराव की स्थित पैदा की जा रही है। उन्होंने इस मामले में फैसला देने वाले न्यायाधीश को एक संगठन से जोड़कर उनका उल्लेख किया। इस पर सदन में हंगामा शुरू हो गया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि बालू असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल नहीं कर सकते।

Ankit Ojha

लेखक के बारे में

Ankit Ojha
अंकित ओझा पिछले 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। अंकित ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया से स्नातक के बाद IIMC नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा किया है। इसके बाद कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर डिग्री हासिल की है। राजनीति, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय डेस्क पर कार्य करने का उनके पास अनुभव है। इसके अलावा बिजनेस और अन्य क्षेत्रों की भी समझ रखते हैं। हिंदी, अंग्रेजी के साथ ही पंजाबी और उर्दू का भी ज्ञान है। डिजिटल के साथ ही रेडियो और टीवी के लिए भी काम कर चुके हैं। और पढ़ें
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