हम AI युग में हैं, फिर 3 मिनट के भाषण का 8 मिनट की ट्रांसक्रिप्ट कैसे? वांगचुक केस में SC के तीखे सवाल

Feb 16, 2026 10:37 pm ISTPramod Praveen भाषा, नई दिल्ली
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सिब्बल ने कोर्ट के सामने पेश किए गए ट्रांसलेट किए गए मटीरियल के असली होने पर सवाल उठाया और कहा कि वांगचुक ने अपनी हड़ताल जारी रखी और नेपाल का जिक्र करके युवाओं को भड़काना भी जारी रखा। यह लाइन कहाँ से आ रही है?

हम AI युग में हैं, फिर 3 मिनट के भाषण का 8 मिनट की ट्रांसक्रिप्ट कैसे? वांगचुक केस में SC के तीखे सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (16 फरवरी) को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के खिलाफ केंद्र द्वारा पेश एक वीडियो के ट्रांसक्रिप्ट (लिखित प्रतिलिपि) पर नाखुशी जताई और ट्रांसक्रिप्ट की लंबाई को लेकर तीखे सवाल उठाए। शीर्ष अदालत ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के दौर में अनुवाद बिल्कुल सटीक होना चाहिए। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज से कहा कि सरकार वांगचुक के बयानों की वास्तविक ट्रांसक्रिप्ट पेश करे, क्योंकि वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि कार्यकर्ता के नाम पर कुछ ऐसे शब्द जोड़े गए हैं, जो उन्होंने कभी कहे ही नहीं।

पीठ ने कहा, ''मिस्टर सॉलिसिटर, हमें भाषण की वास्तविक ट्रांसक्रिप्ट चाहिए। जिस पर उन्होंने भरोसा किया है और जो आप कह रहे हैं, वह अलग है। हम निर्णय करेंगे। उन्होंने जो कहा है, उसकी वास्तविक प्रतिलिपि होनी चाहिए। आपके पास अपने कारण हो सकते हैं।'' इसके साथ पीठ ने कहा, ''कम से कम उन्होंने जो कहा, उसका तो सही अनुवाद होना चाहिए…... आपका अनुवाद सात से आठ मिनट तक चलता है, जबकि भाषण केवल तीन मिनट का ही है। हम कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में हैं; अनुवाद में कम से कम 98 प्रतिशत की सटीकता होनी चाहिए।''

सिब्बल ने ट्रांस्क्रिप्ट पर सवाल उठाए

इससे पहले सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि वांगचुक की तरफ से पेश हुए कपिल सिब्बल ने अनुवाद पर सवाल उठाते हुए कहा, ''वांगचुक ने अपना अनशन जारी रखा…... और नेपाल का संदर्भ देकर युवाओं को उकसाना भी जारी रखा…... यह पंक्ति कहां से आ रही है? यह एक बहुत ही अनोखा नजरबंदी आदेश है - आप ऐसी बात पर भरोसा कर रहे हैं जो मौजूद ही नहीं है और फिर कहते हैं कि यह व्यक्तिपरक संतुष्टि पर आधारित है।''नटराज ने अदालत को बताया कि ट्रांसक्रिप्ट के लिए एक विभाग है और कहा, ''हम इसमें विशेषज्ञ नहीं हैं।'' इस मामले की सुनवाई बृहस्पतिवार को फिर से होगी।

वांगचुक की 24 बार चिकित्सकीय जांच की गई

केंद्र ने इससे पहले शीर्ष अदालत को बताया था कि वांगचुक की हिरासत के बाद से 24 बार चिकित्सकीय जांच की गई है और वह ''स्वस्थ, तंदुरुस्त और ठीक हैं।'' सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि जिन आधारों पर वांगचुक की नजरबंदी का आदेश जारी किया गया था, वे अब भी बने हुए हैं और स्वास्थ्य कारणों से उन्हें रिहा करना संभव नहीं होगा। उच्चतम न्यायालय वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका), 1980 के तहत उनकी (वांगचुक की) नजरबंदी को अवैध घोषित करने का अनुरोध किया गया है।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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