Hindi NewsIndia NewsWant to chop off heads Farooq Abdullah enraged by BJP MLA demand for separation of Jammu and Kashmir
सिर काटना है? BJP विधायक की जम्मू और कश्मीर को अलग करने की मांग पर भड़के फारूक अब्दुल्ला

सिर काटना है? BJP विधायक की जम्मू और कश्मीर को अलग करने की मांग पर भड़के फारूक अब्दुल्ला

संक्षेप:

बीजेपी विधायक शाम लाल शर्मा ने कहा था कि जम्मू के लोगों के साथ भेदभाव होता है, ऐसे में जम्मू और कश्मीर को अलग कर देना चाहिए। उनके इस बयान पर फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि सिर और धड़ को अलग नहीं किया जा सकता। 

Jan 12, 2026 04:52 pm ISTAnkit Ojha लाइव हिन्दुस्तान
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नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने बीजेपी नेता की जम्मू और कश्मीर को अलग करने की मांग पर कहा है यह कभी नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि जम्मू और कश्मीर एक दूसरे के अभिन्न अंग हैं और इनको अलग करने का विचार भी नहीं किया जा सकता है। बीजेपी विधायक शाम लाल शर्मा ने जम्मू और कश्मीर को अलग करने की बात कही थी। वहीं बीजेपी ने उनके इस बयान से दूरी बना ली है। जम्मू-कश्मीर में बीजेपी अध्यक्ष सत शर्मा ने कहा कि उनके बयान से पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है।

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वहीं बीजेपी नेता के इस बयान को लेकर फारूक अब्दुल्ला ने कहा, जम्मू और कश्मीर को अलग करना शरीर से सिर को अलग करने जैसा होगा। जम्मू एक शरीर का सिर है तो कश्मीर उसका धड़ है। उन्होंने कहा कि लद्दाख के लोग भी जम्मू-कश्मीर में ही लौटना चाहते हैं। बता दें कि 2019 में सरकार ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को हटाकर उसका विशेष दर्जा खत्म कर दिया था। इसके बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था।

हाल ही में बीजेपी विधायक शाम लाल शर्मा ने कहा कि जम्मू रीजन के लोगों के साथ भेदभाव होता है। ऐसे में इसे कश्मीर से अलग कर देना चाहिए। उनके इस विवादित बयान पर पार्टी ने भी दूरी बना ली।

कश्मीरी पंडित कर रहे अलग भूभाग की मांग

कश्मीरी पंडितों के एक संगठन ने समुदाय के खिलाफ हुई हिंसा और उसके विस्थापन को कानूनी रूप से “नरसंहार” घोषित करने की मांग दोहराते हुए घाटी में केंद्र के प्रत्यक्ष संरक्षण में एक अलग भू-भाग स्थापित किए जाने की मांग की है।

विस्थापित कश्मीरी पंडितों का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख संगठन पनुन कश्मीर ने यह मांग प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को संबोधित पांच पन्नों के एक ज्ञापन में उठाई है।

संगठन ने यहां ज्ञापन जारी करते हुए कश्मीर घाटी से समुदाय के विस्थापन को स्वतंत्र भारत के सबसे गंभीर अपराधों में से एक बताया और कहा कि लक्षित हत्याओं, धमकियों और धार्मिक सफाए के बाद कश्मीरी पंडित पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से आंतरिक निर्वासन में जीवन बिता रहे हैं।

संगठन के महासचिव कुलदीप रैना द्वारा हस्ताक्षरित ज्ञापन में कहा गया, “शुरुआत में जिसे एक अस्थायी संकट माना गया था, वह संस्थागत उदासीनता के कारण स्थायी अन्याय में बदल गया है। पनुन कश्मीर का मानना है कि कोई भी प्रशासनिक राहत, कल्याणकारी पैकेज या पुनर्वास योजना न्याय के दो मूलभूत कदमों—नरसंहार की औपचारिक कानूनी मान्यता और एक अलग, सुरक्षित भू-भाग —का विकल्प नहीं हो सकती।”

Ankit Ojha

लेखक के बारे में

Ankit Ojha
अंकित ओझा पिछले 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। अंकित ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया से स्नातक के बाद IIMC नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा किया है। इसके बाद कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर डिग्री हासिल की है। राजनीति, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय डेस्क पर कार्य करने का उनके पास अनुभव है। इसके अलावा बिजनेस और अन्य क्षेत्रों की भी समझ रखते हैं। हिंदी, अंग्रेजी के साथ ही पंजाबी और उर्दू का भी ज्ञान है। डिजिटल के साथ ही रेडियो और टीवी के लिए भी काम कर चुके हैं। और पढ़ें
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