ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने दिल्ली पहुंचे पुतिन, जानें कब आ रहे हैं शी जिनपिंग

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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार को दिल्ली पहुंच गए हैं। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के का बाद यह उनका पहला भारत दौरा है। आज ही पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता होगी। इसमें पांचवीं पीढ़ी के विमानों के सह उत्पादन पर बात हो सकती है।

Putin in India
पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के सह उत्पादन पर हो सकती है बात।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार को राजधानी दिल्ली पहुंच चुके हैं। वह 18वें ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने तीन दिन के लिए भारत आए हैं। आज ही रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी के बीच द्विपक्षीय वार्ता हो सकती है। इसमें पांचवीं पीढ़ी के विमान मिलकर बनाने को लेकर चर्चा होने की संभावना है। विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने व्लादमीर पुतिन का एयरपोर्ट पर स्वागत किया। यूक्रेन के साथ युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार वह पिछले साल भारत आए थे।

कब आ रहे हैं शी जिनपिंग

विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, शी जिनपिंग शनिवार सुबह दिल्ली पहुंचेंगे और सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद 13 सितंबर की शाम को लौटेंगे। इस दौरान शनिवार शाम को ब्रिक्स सम्मेलन के इतर उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना है। इससे पूर्व वे अक्तूबर, 2019 में प्रधानमंत्री मोदी के साथ शिखर वार्ता के लिए चेन्नई आए थे। उससे पहले 2014 में उन्होंने भारत यात्रा की थी।

सरकारी समाचार एजेंसी 'तास' के अनुसार, उशाकोव ने कहा कि शुक्रवार को राष्ट्रपति पुतिन वार्षिक ब्रिक्स कारोबार मंच के पूर्ण सत्र को संबोधित करेंगे। यह सत्र परंपरागत रूप से शिखर सम्मेलन से पहले आयोजित किया जाता है और ब्रिक्स देशों के कारोबारी प्रतिनिधियों के बीच संवाद के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है। उशाकोव ने कहा कि इसी दिन रूसी राष्ट्रपति प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे और दोनों देशों के उद्योग एवं व्यापार मंत्रालयों द्वारा आयोजित 'इनोप्रोम प्रदर्शनी' का भी अवलोकन करेंगे।

उन्होंने कहा कि शिखर सम्मेलन का मुख्य कार्यक्रम 12 सितंबर से शुरू होगा, जिसमें ब्रिक्स नेताओं की बैठक होगी। इस बैठक में भारतीय अध्यक्षता में प्रस्तावित विभिन्न पहल और राजनीति एवं सुरक्षा, अर्थव्यवस्था एवं वित्त तथा सांस्कृतिक एवं मानवीय संबंधों के क्षेत्र में ब्रिक्स रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की संभावनाओं पर चर्चा की जाएगी।

पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के बीच शुक्रवार को होने वाली द्विपक्षीय वार्ता के दौरान लड़ाकू विमान के सह-उत्पादन पर भी चर्चा होने की संभावना है। सूत्रों का कहना है कि भारत, रूस की मदद से पांचवी पीढ़ी का लड़ाकू विमान बनाने का इच्छुक है।

रूस बना चुका है पांचवीं पीढ़ी का विमान

वहीं, रूस ने भी इस मामले पर सैद्धांतिक सहमति जताई है। रूस पहले ही पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान एसयू-57 तैयार कर चुका है। वह इसे भारत को बेचने का भी इच्छुक है। लेकिन भारत ने पिछले कुछ साल से अपनी रणनीति में बदलाव किया है तथा देश में ही रक्षा साजो-सामान के निर्माण का फैसला लिया है। ‘द साल्ट’ से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को लेकर जिस समझौते पर बात चल रही है, उसमें भी 96 विमानों का निर्माण कम से कम 50 फीसदी स्वदेशी सामान के साथ भारत में होना है।

यह सौदा तात्कालिक जरूरत को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। लेकिन भारत अपनी रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए दूरगामी परियोजनाओं पर कार्य कर रहा है जिसके तहत पांचवीं पीढ़ी का जेट तैयार करना प्रमुख लक्ष्य है।

हाल में क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्रि पेस्कोव ने भारतीय मीडिया से ऑनलाइन वार्ता में कहा था कि भारत को एसयू-57 बेचना उसके एजेंडे में जरूर है लेकिन भारत के साथ हमारी साझेदारी खरीदने-बेचने तक सीमित नहीं है बल्कि हम सह-उत्पादन और तकनीक हस्तांतरण पर भी विकल्प खुले रखते हैं।

रक्षा मंत्रालय के पास दूसरे कई विकल्प

डीआरडीओ की एयरोनाटिकल डेवलपमेंट एजेंसी पांचवीं पीढ़ी के विमान की संभावनाओं पर काम कर रही है, यह बिना किसी देश की मदद से संभव नहीं है। रूस से बातचीत के अलावा रक्षा मंत्रालय ने दूसरे विकल्प भी खुले रखे हैं, जिनमें जापान और फ्रांस समेत अन्य देश शामिल हैं।

ब्रह्मोस की तर्ज पर निर्माण की संभावना

सूत्रों के अनुसार, रूस से पांचवीं पीढ़ी के विमान के सह-उत्पादन जिसमें एसयू-57 भी हो सकता है या किसी दूसरे नाम से भी हो सकता है, के लिए ब्रह्मोस की तर्ज पर आगे बढ़ने की योजना है। जिस प्रकार भारत और रूस ने ब्रह्मोस मिसाइल तैयार करने के लिए संयुक्त उपक्रम स्थापित किया है, उसी तर्ज पर पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान भी देश में निर्मित होगा। बता दें कि ब्रह्मोस के अलावा भारत-रूस संयुक्त रूप से एके 203 राइफल का भी संयुक्त उत्पादन कर रहे हैं। यदि इस पर बात बनती है तो यह दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में तीसरा संयुक्त उपक्रम होगा।

Ankit Ojha

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Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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