
सावरकर की प्रतिमा का अनावरण, अमित शाह बोले- अंडमान-निकोबार द्वीप समूह नहीं, तपोभूमि है
अमित शाह ने कहा कि मैंने सेलुलर जेल का रिकॉर्ड बहुत डिटेल में पढ़ा है, सिर्फ 2 प्रांत ऐसे हैं जिनके स्वतंत्रता सेनानियों को यहां फांसी नहीं दी गई।' यह एक बहुत बड़ा मौका है। इस तपोभूमि पर वीर सावरकर की मूर्ति का अनावरण किया गया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह व RSS के सरसंघचालक मोहन भागवत ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में विनायक दामोदर सावरकर की प्रतिमा का अनावरण किया। मूर्ति को दक्षिण अंडमान जिले के एक पार्क में स्थापित किया गया है। विनायक दामोदर सावरकर की कविता 'सागर प्राण तलमलाला' के 115 साल पूरे होने पर शाह ने कहा, 'अंडमान और निकोबार सिर्फ आइलैंड्स की एक चेन नहीं है। यह कई स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, समर्पण और देशभक्ति से बनी एक तपोभूमि है। यहां कई लोगों ने अपनी जान दी।'
अमित शाह ने कहा कि मैंने सेलुलर जेल का रिकॉर्ड बहुत डिटेल में पढ़ा है, सिर्फ 2 प्रांत ऐसे हैं जिनके स्वतंत्रता सेनानियों को यहां फांसी नहीं दी गई।' उन्होंने कहा कि यह एक बहुत बड़ा मौका है, इस तपोभूमि पर वीर सावरकर की इंसानी कद की मूर्ति का अनावरण किया गया। इसका अनावरण उस संगठन के सरसंघचालक मोहन भागवत ने किया जो एक तरह से सावरकर की विचारधारा को सही मायने में आगे बढ़ा रहा है। गृह मंत्री ने कहा, 'यह एक पवित्र भूमि है। वीर सावरकर की मूर्ति भी पवित्र है और मोहन भागवत की ओर से इसका अनावरण और भी अच्छा है। यह सोने पर सुहागा हो गया है।'
पार्क के भीतर रुद्राक्ष के पेड़ रोपे
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रतिमा के अनावरण के बाद शाह और भागवत ने पार्क के भीतर रुद्राक्ष के पेड़ रोपे। कार्यक्रम स्थल पर उपराज्यपाल व द्वीप विकास एजेंसी के उपाध्यक्ष डीके जोशी ने गृह मंत्री और आरएसएस प्रमुख का स्वागत किया। इसके बाद शाह और भागव श्री विजयपुरम स्थित बीआर आंबेडकर प्रौद्योगिकी संस्थान के लिए रवाना हुए। वीर सावरकर को अंग्रेजों ने 1911 में पोर्ट ब्लेयर (वर्तमान श्री विजयपुरम) की सेलुलर जेल में कैद किया था। अधिकारियों के अनुसार, शाह गुरुवार रात करीब साढ़े 12 बजे यहां पहुंचे, जबकि भागवत शाम को ही यहां पहुंच गए थे। रविवार को वह सुबह करीब 10 बजे डीबीआरएटी में एक अन्य सभा में शामिल होंगे और दोहर 1:50 बजे द्वीप समूह से रवाना होंगे।





