स्टालिन के जबड़े पर था विजय थलपति का निशाना? भड़के पूर्व सीएम- जेल में मेरी हड्डियां तोड़ी गईं
तमिलनाडु विधानसभा में विजय के ‘जॉ जेस्चर’ पर विवाद के बीच एमके स्टालिन ने पलटवार किया। स्टालिन ने विजय पर विधानसभा को रील बनाने की जगह बनाने का आरोप लगाया और अपने टूटे जबड़े व जेल में हुई पिटाई का जिक्र किया।

तमिलनाडु की राजनीति में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के विधानसभा में किए गए एक इशारे को लेकर विवाद बढ़ गया है। पूर्व सीएम व डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने विजय पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि विधानसभा में अनावश्यक विवादों की बात करने के बजाय सरकार को कानून-व्यवस्था, कल्याण, तमिलनाडु के अधिकार और राज्य के विकास पर ध्यान देना चाहिए।
विवाद उस समय शुरू हुआ जब 7 सितंबर को विधानसभा में विजय ने डीएमके पर कथित भ्रष्टाचार को लेकर निशाना साधते हुए भाषण दिया। इस दौरान उन्होंने एक हाथ से अपने जबड़े को छुआ था। डीएमके नेताओं ने इसे स्टालिन के जबड़े की चोट से जोड़ते हुए आपत्तिजनक बताया। विजय ने बाद में सफाई दी कि उनका बॉडी लैंग्वेज वाला यह इशारा अनजाने में हुआ था और इसका मकसद किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।
‘विधानसभा को रील बनाने की जगह बना दिया’
स्टालिन ने विजय को ‘थंबी’ यानी छोटा भाई कहकर संबोधित किया और कहा कि उन्हें विधानसभा में अनावश्यक विवादों से बचना चाहिए। स्टालिन ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में कहा कि विजय ने विधानसभा को ही रील बनाने की जगह बना दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विजय उस पुल पर खड़े होकर फोटोशूट कर रहे हैं जिसे उनकी सरकार ने बनाया था और प्रशासन भी सिनेमा शूटिंग की तरह चला रहे हैं। स्टालिन के मुताबिक, प्रशासन की अक्षमता छिपाने के लिए इस तरह की रील पोस्ट की जा रही हैं और इससे पूरी एक पीढ़ी को गुमराह किया जा रहा है।
‘मेरे जबड़े की हड्डियां टूट गई थीं’
स्टालिन ने विजय के जबड़े वाले इशारे के जवाब में 1976 के आपातकाल के दौरान जेल में बिताए अपने समय का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उस दौरान उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था और वहां उनके साथ मारपीट हुई थी।
स्टालिन के मुताबिक, जेल में बंद लोगों को बेहद खराब परिस्थितियों में रखा गया था। उन्होंने कहा कि एक छोटे कमरे में 10 लोगों को बंद किया गया था और वहां सिर्फ एक यूरिनल था। उनके अनुसार, रात में सोने नहीं दिया जाता था और पुलिस लाठियों और जूतों से मारती थी। उन्होंने यह भी कहा कि कैदियों से भी उन्हें पिटवाया गया।
स्टालिन ने कहा कि इसी मारपीट के दौरान उनके जबड़े की हड्डियां टूट गई थीं और आज भी उनके शरीर पर उन चोटों के निशान हैं। उन्होंने जेल में उनके साथ रहे डीएमके सांसद चिट्टी बाबू की मौत का भी जिक्र किया।
‘इतिहास नहीं बदला जा सकता’
स्टालिन ने कहा कि आपातकाल के दौरान उनका संघर्ष डीएमके के इतिहास का हिस्सा है और इतिहास को बदला नहीं जा सकता। उन्होंने विजय से तमिलनाडु और डीएमके के इतिहास को पढ़ने की अपील की।
उन्होंने कहा कि डीएमके का यह इतिहास पार्टी के संस्थापक सीएन अन्नादुरई के समय से जुड़ा है और इस इतिहास का हिस्सा होना उनके लिए गर्व की बात है। स्टालिन ने विजय से कहा कि अगर उन्हें कोई संदेह है तो वे आधिकारिक रिकॉर्ड और उनके संघर्ष का इतिहास पढ़ सकते हैं।
सारकारिया आयोग के मुद्दे पर भी निशाना
स्टालिन ने विजय की ओर से सारकारिया आयोग और पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि पर लगाए गए आरोपों का भी जवाब दिया। विजय ने डीएमके सरकार पर भ्रष्टाचार, टेंडर और कमीशन से जुड़ी कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए थे। स्टालिन ने कहा कि आयोग के गठन के बाद केंद्र और तमिलनाडु में कई सरकारें बदल चुकी हैं। उनका तर्क था कि अगर आरोपों में दम होता तो कार्रवाई हो चुकी होती।
उन्होंने विजय पर राजनीतिक बदले की भावना से करुणानिधि के खिलाफ पुराने आरोप दोहराने का आरोप लगाया। स्टालिन ने ईडी की एक चिट्ठी के हवाले से डीएमके नेताओं पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों पर भी सवाल उठाया और दावा किया कि ईडी द्वारा दर्ज किए गए मामलों की बड़ी संख्या में दोषसिद्धि नहीं हुई है।
‘मुख्यमंत्री के शब्द और बॉडी लैंग्वेज में गरिमा होनी चाहिए’
स्टालिन ने कहा कि विधानसभा का इस्तेमाल अनावश्यक विवादों के लिए नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक, सदन को कानून-व्यवस्था, कल्याणकारी योजनाओं, तमिलनाडु के अधिकारों और राज्य के विकास जैसे मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए।
उन्होंने विजय को याद दिलाया कि मुख्यमंत्री बनने के बाद वह उनके घर आए थे और चुनाव प्रचार के दौरान स्टालिन की आलोचना करने के लिए माफी मांगी थी। स्टालिन ने कहा, "जब आप मुख्यमंत्री बने, तो आप मुझसे मिलने मेरे घर आए थे। तब मैंने आपका हाथ पकड़कर आपका स्वागत किया था। उस समय बातचीत के दौरान आपने मुझसे कहा कि 'चुनाव प्रचार के दौरान मैंने आपके बारे में बहुत आलोचनात्मक बातें कही थीं। इसके लिए मुझे खेद है, सर।' इस पर मैंने कहा, कोई बात नहीं भाई। मैं ऐसी बातें दिल में नहीं रखता। अब आप एक राज्य के मुख्यमंत्री हैं। आप जिसके बारे में भी बात करें, पूरी गरिमा के साथ करें।"
स्टालिन ने अब विजय से कहा कि वह मुख्यमंत्री हैं और उन्हें इस पद की गरिमा के अनुरूप बोलना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के शब्दों और बॉडी लैंग्वेज में मुख्यमंत्री पद की गरिमा दिखनी चाहिए, क्योंकि नेता जनता के लिए रोल मॉडल होते हैं।


