आखिर क्यों रो पड़े सीएम विजय, करूर हादसा पीड़ितों के परिजनों से मुलाकात में हो गए इमोशनल
करूर हादसे के पीड़ितों के परिजनों से मुलाकात के दौरान तमिलनाडु के सीएम जोसेफ विजय रो पड़े। इस दौरान नियुक्ति पत्र लेने आई एक युवती ने बताया कि विजय इस कदर भावुक हो गए थे कि पांच मिनट तक उनके मुंह से शब्द ही नहीं निकले।

करूर हादसे के पीड़ितों के परिजनों से मुलाकात के दौरान तमिलनाडु के सीएम जोसेफ विजय रो पड़े। इस दौरान नियुक्ति पत्र लेने आई एक युवती ने बताया कि विजय इस कदर भावुक हो गए थे कि पांच मिनट तक उनके मुंह से शब्द ही नहीं निकले। प्रियदर्शिनी नाम की इस युवती का भाई सितंबर में हुए इस हादसे में मारा गया था। उसने बताया कि सीएम विजय की आंखों से आंसू बरस रहे थे। विजय ने करूर भगदड़ के पीड़ित 31 परिवारों के सदस्यों को शुक्रवार को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र सौंपे। इसके अलावा, उन्होंने इरोड निवासी के. कंदासामी की पत्नी के. शांति को 10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता भी प्रदान की। उनके बेटे की मौत 27 सितंबर 2025 को विजय की पार्टी तमिलिगा वेत्री कषगम (टीवीके) की रैली के दौरान हुई भगदड़ में हुई थी। इस हादसे में 41 लोग मारे गए थे।
भाई को याद करते हुए रो पड़ी प्रियदर्शिनी
अपने भाई को याद करते हुए प्रियदर्शिनी रो पड़ीं। एनडीटीवी के मुताबिक नियुक्ति पत्र लेने पहुंची प्रियदर्शिनी ने कहाकि उसका बड़ा भाई उसके पिता समान था। जब वह मां बनने वाली थी तो उसने काफी देखभाल की थी। मुश्किल वक्त में वह हमेशा उसके लिए खड़ा रहता था। अब प्रियदर्शिनी ऑनलाइन एमबीए की पढ़ाई कर रही हैं। साथ ही वह अपने छोटे बच्चे को भी पाल रही हैं। उन्होंने इस नियुक्ति पत्र को एक नई शुरुआत बताया। इस मौके पर प्रियदर्शिनी ने कहाकि वह अपने भाई विजय को धन्यवाद भी अदा किया। उन्होंने कहाकि मैंने एक अन्य जिले में पोस्टिंग के लिए कहा है और सीएम ने उन्हें आश्वस्त किया है।
धनलक्ष्मी ने खो दिया था 17 साल का बेटा
इस मौके पर एक अन्य महिला निवेदिता भी मौजूद थीं। निवेदिता के पति करूर हादसे के दौरान मारे गए थे। उन्होंने कहाकि मैं हर दिन अपने पति को याद करती हूं। अब यह नौकरी मेरे परिवार के लिए बहुत बड़ा सहारा होने वाली है। उन्होंने कहाकि शुक्रिया विजय अन्ना। यहां की दर्दभरी कहानियों में एक कहानी धनलक्ष्मी की है।
धनलक्ष्मी ने करूर हादसे में अपने 17 साल के बेटे को खो दिया था। उसने सिर्फ 10 दिन पहले ही इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन लिया था। धनलक्ष्मी बताती हैं कि वह एयरोनॉटिकल इंजीनियर बनना चाहता था। लेकिन सिर्फ 10 दिन में उसका यह सपना टूट गया। अपने आंसुओं पर काबू पाते हुए, उन्होंने कहाकि इस नौकरी की बदौलत उनके परिवार को बड़ा सहारा मिला है। विजय भाई ने वही किया है जो शायद मेरा बेटा करता।
मई में मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद करूर की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा के दौरान विजय ने भगदड़ में जान गंवाने वाले 41 लोगों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी। लाभार्थियों को जूनियर असिस्टेंट, कार्यालय सहायक और चौकीदार जैसे पदों पर नियुक्ति दी गई है। ये नियुक्तियां स्कूल शिक्षा, राजस्व, ग्रामीण विकास, शहरी मामलों, पुलिस, पंजीकरण, नगर पंचायत विभागों तथा करूर कलेक्टर कार्यालय में की गई हैं।
इससे पहले, मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने राज्य सरकार को 41 मृतकों के परिजनों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने की अनुमति दी थी, लेकिन यह भी स्पष्ट किया था कि ये नियुक्तियां अस्थायी आधार पर होंगी। इस अवसर पर लोक निर्माण एवं खेल विकास मंत्री आधव अर्जुन, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री के. ए. सेंगोट्टैयन, दुग्ध विकास मंत्री सी. विजयलक्ष्मी, कांग्रेस सांसद ज्योतिमणि, मुख्य सचिव एम. साईकुमार, करूर के जिलाधिकारी सी. मुथुकुमारन तथा राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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Deepak Mishraमूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले दीपक मिश्रा के लिए पत्रकारिता में आना कोई संयोग नहीं था। घर में आने वाली तमाम मैगजीन्स और अखबार पढ़ते-पढ़ते खुद अखबार में खबर लिखने तक पहुंच गए। हालांकि सफर इतना आसान भी नहीं था। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद जब घरवालों को इस इरादे की भनक लगी तो खासा विरोध भी सहना पड़ा। फिर मन में ठाना कि चलो जमीनी अनुभव लेकर देखते हैं। इसी मंशा के साथ ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान आजमगढ़ के लोकल टीवी में काम करना शुरू किया। कैमरे पर शहर की गतिविधियां रिकॉर्ड करते, न्यूज बुलेटिन लिखते और कुछेक बार उन्हें कैमरे के सामने पढ़ते-पढ़ते इरादा मजबूत हो गया कि अब तो मीडिया में ही जाना है।
आजमगढ़ के डीएवी डिग्री कॉलेज से इंग्लिश, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री विषयों में ग्रेजुएशन के बाद वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर डिग्री। इसके बाद अखबारों में नौकरी का सिलसिला शुरू हुआ आज अखबार से। फिर दैनिक जागरण के बाइलिंगुअल अखबार आई नेक्स्ट में वाराणसी में डेस्क पर नौकरी। वहां से सेंट्रल डेस्क कानपुर का सफर और फिर पत्रिका अखबार के इवनिंगर न्यूज टुडे में सेंट्रल डेस्क हेड की जिम्मेदारी। बाद में पत्रिका अखबार के लिए खेल डेस्क पर भी काम करने का मौका मिला। पत्रिका ग्रुप में काम करते हुए 2014 फीफा वर्ल्ड कप की कवरेज के लिए अवॉर्ड भी मिला।
यूपी में वापसी हुई फिर से दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में और जिम्मेदारी मिली गोरखपुर में डेस्क हेड की। आई नेक्स्ट की दूसरी पारी में दो बार गोरखपुर एडिशन के संपादकीय प्रभारी की भी भूमिका निभाई। वहीं, कुछ अरसे तक इलाहाबाद में डेस्क हेड की जिम्मेदारी भी संभाली। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में काम करने के दौरान, डिजिटल फॉर्मेट के लिए वीडियो स्टोरीज करते रहे। इसमें कुंभ 2019 के लिए वीडियो स्टोरीज भी शामिल हैं। बाद में यहां पर पॉडकास्ट के दो शो किए। जिनमें से एक आईपीएल रिकॉर्ड बुक और दूसरा शहर का किस्सा रहा।
जून 2021 से लाइव हिन्दुस्तान में होम टीम का हिस्सा। इस दौरान तमाम चुनाव, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों की खबरें की। साथ ही क्रिकेट टीम के साथ सहभागिता निभाते हुए आईपीएल और टी-20 विश्वकप, चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कवरेज में सक्रिय भूमिका निभाई। कुंभ 2025 के दौरान लाइव हिन्दुस्तान के लिए वीडियो स्टोरीज कीं।
अगर रुचि की बात करें तो फिल्में देखना, किताबें पढ़ना, कुछ नई स्किल्स सीखते रहना प्रमुख हैं। मिररलेस कैमरे के साथ वीडियो शूट करना और प्रीमियर प्रो पर एडिटिंग में दक्षता। प्रिय विषयों में सिनेमा और खेल दिल के बेहद करीब हैं।


