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तुम लोगों को छूट, तो भारत पर आपत्ति क्यों? भरी सभा में पीयूष गोयल ने कर दी जर्मनी-यूके की बोलती बंद

तुम लोगों को छूट, तो भारत पर आपत्ति क्यों? भरी सभा में पीयूष गोयल ने कर दी जर्मनी-यूके की बोलती बंद

संक्षेप:

पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि भारत जल्दबाजी में या 'किसी तरह के दबाव में आकर' कोई समझौता नहीं करेगा जबकि एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारत और अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के 'बहुत करीब' हैं।

Sat, 25 Oct 2025 08:13 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, बर्लिन
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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को पश्चिमी देशों पर तीखा प्रहार करते हुए सवाल उठाया कि जब यूरोपीय देश खुद रूस से तेल खरीदने के लिए अमेरिकी प्रतिबंधों से छूट मांग रहे हैं, तो फिर भारत को क्यों निशाना बनाया जा रहा है? बर्लिन ग्लोबल डायलॉग सम्मेलन के दौरान यूके की ट्रेड मंत्री क्रिस ब्रायंट के साथ एक चर्चा में गोयल ने ऐसे सवाल किए कि नेताओं की बोलती बंद हो गई।

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गोयल ने कहा, “मैंने आज के अखबार में पढ़ा कि जर्मनी अमेरिकी प्रतिबंधों से तेल के लिए छूट मांग रहा है। ब्रिटेन को तो पहले ही छूट मिल चुकी है। तो फिर भारत को क्यों निशाना क्यों बनाया जा रहा है?”

इस पर ब्रिटिश मंत्री ब्रायंट ने 'नहीं नहीं' करते हुए कहा कि उनके देश को मिली अमेरिकी छूट केवल रॉसनेफ्ट की एक विशिष्ट सहायक कंपनी के लिए है। इतना सुनते ही गोयल ने तुरंत पलटवार करते हुए कहा, “हमारे पास भी तो रॉसनेफ्ट की एक सहायक कंपनी है.. फिर भारत को क्यों...।” फिर क्या था... मंत्री की बोलती बंद हो गई।

अमेरिकी दबाव और बढ़े टैरिफ

गोयल की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिका और उसके सहयोगी भारत पर रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदने को लेकर दबाव बढ़ा रहे हैं। पिछले महीने ट्रंप प्रशासन ने भारत के कुछ उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाते हुए कुल टैरिफ को लगभग 50 प्रतिशत तक पहुंचा दिया था। नई दिल्ली ने इन टैरिफ को “अनुचित, अन्यायपूर्ण और अव्यवहारिक” करार दिया है।

ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि भारत जैसे देशों पर दबाव डालने से रूस आर्थिक रूप से कमजोर होगा और उसे यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। इसी बीच, यूरोपीय संघ (EU) ने हाल ही में तीन भारतीय कंपनियों पर भी रूस की सेना से कथित संबंधों के कारण प्रतिबंध लगाए हैं। इसके अलावा, अमेरिका ने पिछले हफ्ते रॉसनेफ्ट और लुकोइल, रूस की दो सबसे बड़ी तेल कंपनियों पर भी प्रतिबंध लागू किए हैं।

"हम दबाव में समझौते नहीं करते"

पीयूष गोयल ने भारत की स्वतंत्र व्यापार नीति पर जोर देते हुए कहा कि देश किसी भी “दबाव या समयसीमा” में समझौते नहीं करता। उन्होंने कहा, “हम कभी भी ‘डेडलाइन’ या ‘सिर पर तनी बंदूक’ के साथ कोई व्यापार समझौता नहीं करते। अगर कोई टैरिफ लगाता है, तो लगाए। हम नए बाजारों की तलाश में हैं, घरेलू मांग मजबूत कर रहे हैं और दीर्घकालिक लचीलापन विकसित कर रहे हैं।”

गोयल ने बताया कि भारत की आर्थिक रणनीति का उद्देश्य अगले 20–25 वर्षों में 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना है। उन्होंने कहा, “हम भविष्य को ध्यान में रखकर बातचीत करते हैं। भारत के लिए जो सबसे बेहतर सौदा होगा, वही करेंगे।”

"राष्ट्रीय हित सर्वोपरि"

गोयल ने कहा कि भारत के सभी व्यापारिक संबंध राष्ट्रीय हित के आधार पर तय होते हैं, न कि बाहरी दबावों पर। उन्होंने कहा, “भारत ने कभी भी किसी बाहरी के कहने पर यह नहीं तय किया कि उसका मित्र कौन होगा। अगर कल को कोई हमसे कहे कि आप ईयू से संबंध न रखें या केन्या से व्यापार न करें- तो यह हमारे लिए स्वीकार्य नहीं है।”

गोयल ने यह भी बताया कि व्यापार समझौते सिर्फ टैरिफ या बाजार पहुंच तक सीमित नहीं हैं, बल्कि “विश्वास और रिश्तों” पर आधारित होते हैं। वर्तमान में भारत की यूरोपीय संघ और अमेरिका दोनों से द्विपक्षीय व्यापार समझौतों पर बातचीत चल रही है। प्रस्तावित भारत–अमेरिका व्यापार समझौते का लक्ष्य 2030 तक व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। सत्र के अंत में गोयल ने भरोसा जताया कि भारत की आर्थिक बुनियाद बेहद सुदृढ़ है। उन्होंने कहा कि हमारे पास 1.4 अरब युवा, महत्वाकांक्षी लोग हैं। हम आगे की ओर देख रहे हैं, और किसी दबाव में आकर अल्पकालिक या कमजोर सौदे नहीं करेंगे।

Amit Kumar

लेखक के बारे में

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अमित कुमार एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में नौ वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। हिन्दुस्तान डिजिटल के साथ जुड़ने से पहले अमित ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया है। अमित ने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला (डिजिटल) से की। इसके अलावा उन्होंने वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे मीडिया हाउस में काम किया है, जहां उन्होंने न्यूज रिपोर्टिंग व कंटेंट क्रिएशन में अपनी स्किल्स को निखारा। अमित ने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी, हिसार से मास कम्युनिकेशन में मास्टर (MA) किया है। अपने पूरे करियर के दौरान, अमित ने डिजिटल मीडिया में विभिन्न बीट्स पर काम किया है। अमित की एक्सपर्टीज पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेट रिपोर्टिंग और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई है। अमित नई मीडिया तकनीकों और पत्रकारिता पर उनके प्रभाव को लेकर काफी जुनूनी हैं। और पढ़ें
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