
बुजुर्ग ने अपनी जमीन पर बनवाया मिनी तिरुपति मंदिर, 4 महीने पहले ही खुला; भगदड़ कैसे मची
रिपोर्ट में बताया गया कि मंदिर में एक ही प्रवेश और निकास द्वार है। संकरी गली के दोनों ओर रेलिंग लगी हुई है। यहीं पर शनिवार को भगदड़ मची, जब एकादशी पूजा के लिए सैकड़ों भक्त मंदिर में उमड़ पड़े। इसके लिए कोई तैयारी नहीं थी।
आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम में वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में मची भगदड़ के चलते 10 लोगों की मौत हो गई। निर्माणाधीन मंदिर, एक ही प्रवेश व निकास द्वार और एकादशी की भीड़ को इसकी मुख्य वजह बताया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 80 वर्षीय मुकुंद पांडा ने अपनी जमीन पर भगवान वेंकटेश्वर को समर्पित यह मंदिर बनवाया। चार महीने पहले ही भक्तों के लिए इसे खोला गया था। मंदिर को तिरुमाला के भव्य श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर की तर्ज पर बनाया गया। इसीलिए इसे 'मिनी तिरुपति' भी कहा जाता है।
रिपोर्ट में बताया गया कि मंदिर में एक ही प्रवेश और निकास द्वार है। संकरी गली के दोनों ओर रेलिंग लगी हुई है। यहीं पर शनिवार को भगदड़ मची, जब एकादशी पूजा के लिए सैकड़ों भक्त मंदिर में उमड़ पड़े। टेंपल मैनेजमेंट की ओर से एकादशी की भीड़ के बारे में प्रशासन को सूचना नहीं दी गई थी। इसलिए भीड़ को मैनेज करने की कोई योजना नहीं थी। सैकड़ों भक्त 'मिनी तिरुपति' में प्रार्थना करने पहुंचे थे। भगदड़ मचने से हालात बेकाबू हो गई और इतना बड़ा हादसा हुआ।
प्रशासन को पहले से नहीं दी गई सूचना
मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि अगर पुलिस को पहले से सूचना दी जाती, तो वे भीड़ को मैनेज करने की योजना लागू कर सकते थे। उन्होंने कहा, 'हम योजना के कारण ही चक्रवात में अधिक जानमाल की हानि को रोक सके। दुर्भाग्य से भगदड़ में इतने लोग मारे गए। इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों से सख्ती से निपटा जाएगा और उन्हें हिरासत में लिया जाएगा।' आंध्र प्रदेश सरकार में मंत्री अनम रामनारायण रेड्डी ने कहा कि जहां यह त्रासदी हुई, वह मंदिर राज्य सरकार की ओर से प्रबंधित नहीं है। इस मंदिर की क्षमता केवल 2,000 से 3,000 लोगों की है। आज एकादशी होने के कारण एक साथ 25,000 लोग पहुंच गए थे। इसके हिसाब से इंतजाम नहीं किए गए और न ही सरकार को सूचना दी गई थी।





