तब संसद में क्यों रहे चुप, क्यों नहीं रोका? CM ने कांग्रेस को घेरा; ‘वंदे मातरम’ पर INDIA अलायंस में कोहराम
वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस ने उमर अब्दुल्ला पर सवाल उठाया तो जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री भी चुप नहीं रहे। उन्होंने इंडिया गठबंधन के सहयोगी को लेकर निशाना साधा है। जानिए क्या कहा…

वंदे मातरम् को लेकर अब इंडिया गठबंधन के सहयोगियों में भी टकराव होता नजर आ रहा है। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इसको लेकर कांग्रेस को घेर लिया है। पूरे वंदे मातरम् के दौरान खड़े रहने को लेकर कांग्रेस द्वारा आपत्ति पर उमर अब्दुल्ला ने कांग्रेस को निशाने पर लिया है। उमर अब्दुल्ला ने यहां तक कह डाला कि जब पूरे वंदे मातरम् को लेकर संसद में चर्चा हो रही थी तो कांग्रेस चुप क्यों रही। आखिर कांग्रेस ने तब इसे रोका क्यों नहीं? उन्होंने कहाकि अब तो इसको लेकर कानून बन चुका है। अगर कोई पूरे वंदे मातरम् के दौरान खड़ा नहीं होता है तो यह कानून का उल्लंघन होगा। उमर अब्दुल्ला ने सवाल पूछा कि क्या कांग्रेसी चाहते हैं कि कश्मीर के लोग जेल में रहें।
बेवजह राजनीतिक रंग दिया गया
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मुद्दे को बेवजह राजनीतिक रंग दिया गया। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि उसे (कांग्रेस को) संसद में इसे रोकना चाहिए था। लेकिन, अब कानून बन चुका है। ऐसे में, किसी कार्यक्रम में जहां दो राज्यपाल, एक उपराज्यपाल और हमारे उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मौजूद हों, वहां राष्ट्रगीत तो बजाया ही जाएगा।
अब्दुल्ला ने कहा कि कानूनी तौर पर, जहां भी राष्ट्रगीत बजाया जाता है, वहां ‘वंदे मातरम्’ के सभी अंतरे गाना अनिवार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ जम्मू-कश्मीर के लिए नहीं है। यह पूरे देश पर लागू होता है। कांग्रेस-शासित राज्यों में भी सरकारी कार्यक्रमों में ऐसा ही होगा। अब्दुल्ला ने कहा कि जो लोग पूरा राष्ट्रगीत गाते समय खड़े नहीं होते, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने सवाल किया कि क्या कांग्रेस चाहती है कि इसी बहाने कश्मीरियों को जेल भेजा जाए। उन्होंने कहा कि अब यह एक कानूनी जिम्मेदारी है। आज भी समापन समारोह में केंद्रीय मंत्री मौजूद रहेंगे। वहां राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत दोनों बजाए जायेंगे।
तो सत्ता में आने पर रद्द कर दे कांग्रेस
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी पार्टी ने पूरे गीत को नहीं अपनाया है और अगर भविष्य में कांग्रेस सरकार इसे रद्द करती है, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस सत्ता में आएगी- और मैं प्रार्थना करता हूं कि कांग्रेस जल्द से जल्द सत्ता में आए - तो वह संसद में इसे रद्द कर सकती है। उसे ऐसा करने दें, हमें कोई आपत्ति नहीं है। असल में, एक पार्टी के तौर पर हमने कभी वंदे मातरम् को नहीं अपनाया है और भविष्य में भी नहीं अपनायेंगे। लेकिन हमारी जो भी कानूनी और वैधानिक जिम्मेदारियां हैं, हमें उन्हें पूरा करना होगा। अब्दुल्ला ने इस विवाद को राई का पहाड़ बनाने की कोशिश करार दिया।
कैसे शुरू हुआ विवाद
बता दें कि यह पूरा विवाद उस वक्त शुरू हुआ जब सोमवार को ‘इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ जम्मू एंड कश्मीर’ (आईएफएफजेके) में जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेकां के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला की उपस्थिति में पूरा राष्ट्रगीत बजाया गया। केंद्र शासित प्रदेश में नेकां के नेतृत्व वाली सरकार को बाहर से समर्थन दे रही कांग्रेस ने इस घटना पर सार्वजनिक रूप से सख्त असहमति व्यक्त की है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मंगलवार को एक्स पर ‘आईएफएफजेके’ का एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि वंदे मातरम् का पूरा संस्करण उस समन्वयवादी और बहुलवादी भावना के साथ मेल नहीं खाता, जिसकी परिकल्पना हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने भारत के लिए की थी और जिसे उन्होंने पोषित किया था। उन्होंने गठबंधन सहयोगियों से कांग्रेस के 1937 के उस प्रस्ताव का सम्मान करने का आग्रह किया, जिसमें भारत की धार्मिक विविधता और अंतरात्मा का आदर करने के लिए इस गीत के संक्षिप्त संस्करण को अपनाया गया था।


