वंदे मातरम् पर अब इस राज्य में छिड़ा विवाद, असेंबली के पहले सत्र में ही रार; CM बोले- जरूरी नहीं कि...
इस विवाद पर केरल के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने कहा कि राष्ट्र गीत 'वंदे मातरम्' को पूरा गाना या बजाना अनिवार्य नहीं है, क्योंकि इस संबंध में संसद ने कोई कानून पारित नहीं किया है।

केरल की चुनी नई विधानसभा के पहले सत्र में ही राजनीतिक विवाद उठ खड़ा हुआ है। वहां पड़ोसी राज्य तमिलनाडु की ही तरह राष्ट्र गीत वंदे मातरम् गाने पर विवाद छिड़ गया है। विवाद ने तब जन्म लिया, जब जब कांग्रेस के नेतृत्व वाली UDF सरकार ने राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के सदन में संबोधन से पहले ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण न बजाने का फ़ैसला किया। पूरा राष्ट्र गीत बजाने की जगह केवल दो अंतरा ही बजाया गया। इस पर राज्यपाल ने कड़ी आपत्ति जताई।
इस पर केरल के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने कहा कि राष्ट्र गीत 'वंदे मातरम्' को पूरा गाना या बजाना अनिवार्य नहीं है, क्योंकि इस संबंध में संसद ने कोई कानून पारित नहीं किया है। इससे पहले, राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने शुक्रवार को इस बात पर नाराजगी जतायी कि जब वह संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार के नीतिगत अभिभाषण के लिए विधानसभा में मौजूद थे, तब 'वंदे मातरम्' पूरा नहीं गाया गया।
'वंदे मातरम्' के शुरुआती अंतरे ही बजाए गए
केरल विधानसभा में राज्यपाल के नीतिगत अभिभाषण से पहले और बाद में एक बैंड दल ने 'वंदे मातरम्' के शुरुआती अंतरे प्रस्तुत किए थे। राज्यपाल ने विधानसभा से लौटने के बाद लोक भवन में पत्रकारों से कहा कि यह पहले से तय था कि जब भी राज्यपाल सदन में मौजूद हों, तब 'वंदे मातरम्' पूरा गाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विधानसभा में गीत केवल बजाया गया, गाया नहीं गया।
'वंदे मातरम्' को पूरा गाना अनिवार्य नहीं
सतीशन ने इस मामले में संवाददाताओं के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस और उसका यूडीएफ गठबंधन एक राजनीतिक विचारधारा के ढांचे के भीतर काम करते हैं और वे पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के फैसलों के अनुसार संचालित होते हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व का स्पष्ट रुख है और वही गठबंधन पर भी लागू होता है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि 'वंदे मातरम्' को पूरा गाना अनिवार्य नहीं है, क्योंकि संसद ने इस संबंध में कोई कानून पारित नहीं किया है। उन्होंने कहा, ''संसद द्वारा केवल कुछ दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।''
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।


