Hindi NewsIndia NewsUsing only abusive language does not constitute a crime under the SC ST Act the Supreme Court
एससी एसटी एक्ट के तहत सिर्फ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना अपराध नहीं, SC ने समझाया

एससी एसटी एक्ट के तहत सिर्फ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना अपराध नहीं, SC ने समझाया

संक्षेप:

कानून के तहत जो कोई भी, SC या ST का सदस्य न होते हुए जानबूझकर किसी अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्य को सार्वजनिक स्थान पर अपमानित करने के इरादे से अपमानित करता है या डराता है, किसी SC या ST के सदस्य को सार्वजनिक स्थान पर जाति के नाम से गाली देता है, वह दंडनीय अपराध है।

Jan 20, 2026 06:12 am ISTNisarg Dixit हिन्दुस्तान
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत अपराध नहीं है। कोर्ट ने कहा कि जब तक कि इसका इस्तेमाल किसी व्यक्ति को उसकी जाति के आधार पर अपमानित करने के इरादे से न किया गया हो। जस्टिस जेबी पारदीवाला और आलोक अराधे की पीठ ने पिछले सप्ताह पारित फैसले में एक व्यक्ति के खिलाफ एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत आपराधिक कार्यवाही को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की है।

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पीठ ने अपीलकर्ता केशव महतो उर्फ केशव कुमार महतो की ओर पटना उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई की। बेंच ने कहा कि मौजूदा मामले में ‘ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट दोनों ने एससी/एसटी एक्ट के तहत कार्यवाही को जारी रखने में गलती की है। जबकि न तो दर्ज प्राथमिकी में और न ही आरोपपत्र में दूर-दूर तक जाति-आधारित अपमान या धमकी के किसी भी कृत्य का आरोप लगाया गया था।’

सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3 (1) के संबंधित प्रावधानों को दोहराया जो अपराधों और अत्याचारों के लिए सजा तय करते हैं। इस कानून के तहत जो कोई भी, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य न होते हुए जानबूझकर किसी अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्य को सार्वजनिक स्थान पर अपमानित करने के इरादे से अपमानित करता है या डराता है, किसी अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्य को सार्वजनिक स्थान पर जाति के नाम से गाली देता है, वह दंडनीय अपराध है।

दरअसल, अपीलकर्ता केशव कुमार महतो ने सुप्रीम कोर्ट में पटना उच्च न्यायालय के 15 फरवरी 2025 के फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें ट्रायल कोर्ट के समन आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया था। उच्च न्यायालय ने ‌महतो की उस अपील को खारिज कर दिया था जिसमें आंगनवाड़ी केंद्र में जाति-आधारित गाली-गलौज और मारपीट के आरोप में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर शुरू की गई कार्यवाही को रद्द करने की मांग की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट पूर्व के फैसले का हवाला देते हुए एससीएसटी एक्ट की धारा 3(1)(आर) के प्रावधानों का जिक्र करते हुए कहा कि इसके तहत किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के लिए, दो शर्तें पूरी होनी चाहिए, यानी, पहला, यह तथ्य कि शिकायतकर्ता अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का था और दूसरा, शिकायतकर्ता के प्रति कोई भी अपमान या धमकी उस व्यक्ति के अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य होने के कारण होनी चाहिए।

पीठ ने कहा है कि ‘दूसरे शब्दों में, धारा 3(1)(आर) के तहत अपराध केवल इस तथ्य पर आधारित नहीं हो सकता कि सूचना देने वाला/शिकायतकर्ता अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य है, जब तक कि अपमान या धमकी समुदाय के ऐसे सदस्य को अपमानित करने के इरादे से न हो। इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने अपीलकर्ता के खिलाफ इस कानून के तहत आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।

Nisarg Dixit

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Nisarg Dixit

निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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