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भारत को वेनेजुएला का तेल बेचेगा अमेरिका, ट्रंप सरकार तैयार; किसके खाते में जाएगा पैसा?

भारत को वेनेजुएला का तेल बेचेगा अमेरिका, ट्रंप सरकार तैयार; किसके खाते में जाएगा पैसा?

संक्षेप:

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, और उसकी रिफाइनरियां वेनेजुएला के भारी कच्चे तेल को संसाधित करने में सक्षम हैं। 2019 से पहले भारत वेनेजुएला का प्रमुख खरीदार था। जानिए पूरा मामला क्या है?

Jan 10, 2026 06:28 am ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, वाशिंगटन
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ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिया है कि वह भारत को वेनेजुएला का कच्चा तेल खरीदने की अनुमति देने के लिए तैयार है, लेकिन यह सब एक नए अमेरिका-नियंत्रित ढांचे के तहत होगा। यह कदम ऐसे समय में आया है जब अमेरिका भारत पर रूसी कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने के लिए दबाव बना रहा है और हाल ही में वेनेजुएला में अमेरिकी हस्तक्षेप के बाद राजनीतिक बदलाव हुए हैं।

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वरिष्ठ ट्रंप प्रशासन अधिकारी ने बताया कि वाशिंगटन वेनेजुएला के तेल को वैश्विक बाजार में बेचने के लिए तैयार है, जिसमें भारत भी शामिल है। अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस्टोफर राइट ने फॉक्स बिजनेस को दिए इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका वेनेजुएला के तेल को फिर से बहने देगा, लेकिन केवल एक ऐसे ढांचे के तहत जिसमें बिक्री अमेरिकी सरकार द्वारा नियंत्रित और बाजार में बेची जाएगी तथा आय वाशिंगटन द्वारा नियंत्रित खातों में जमा होगी।

राइट ने कहा- सीधी बात है। आप या तो अमेरिका के साथ मिलकर तेल बेच सकते हैं, या तेल नहीं बेच सकते। उन्होंने इसे वेनेजुएला के पिछले नेतृत्व से जुड़ी आपराधिक गतिविधियों और अस्थिरता को समाप्त करने के लिए लेवरेज बताया। अमेरिकी नीति के तहत वेनेजुएला के तेल निर्यात पर अनिश्चितकाल तक नियंत्रण रहेगा, जबकि कुछ खेपें गैर-अमेरिकी खरीदारों को भी भेजी जा सकेंगी।

यह घोषणा 3 जनवरी 2026 को अमेरिकी बलों द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करने और उन्हें अमेरिका ले जाने के बाद आई है। मादुरो पर ड्रग्स और हथियार तस्करी के आरोप हैं। ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका वेनेजुएला के तेल क्षेत्र पर नियंत्रण लेगा, और अमेरिकी कंपनियां अरबों डॉलर निवेश करके उत्पादन बढ़ाएंगी।

इस हफ्ते काराकास और वाशिंगटन के बीच एक समझौता हुआ, जिसमें 30-50 मिलियन बैरल (लगभग 2 अरब डॉलर मूल्य) वेनेजुएला का कच्चा तेल अमेरिका को निर्यात किया जाएगा। वेनेजुएला के पास भंडारण टैंकों और जहाजों में लाखों बैरल तेल फंसा हुआ है, जिसे अब अमेरिकी नियंत्रण में वैश्विक बाजार में बेचा जाएगा। राइट ने न्यूयॉर्क में एक ऊर्जा सम्मेलन में कहा कि अमेरिका पहले 30-50 मिलियन बैरल फंसे तेल को बेचेगा, और फिर भविष्य के उत्पादन को जारी रखेगा।

भारत के लिए क्या मतलब?

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, और उसकी रिफाइनरियां वेनेजुएला के भारी कच्चे तेल को संसाधित करने में सक्षम हैं। 2019 से पहले भारत वेनेजुएला का प्रमुख खरीदार था, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण आयात रुक गया था। अब, अमेरिकी ढांचे के तहत भारत फिर से वेनेजुएला का तेल खरीद सकता है, जो रूसी तेल पर निर्भरता कम करने का विकल्प देगा। ऐसी खबरे हैं कि रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी भारतीय रिफाइनरियां पहले से ही अमेरिकी अनुमति के लिए बातचीत कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय रिफाइनरियों को सस्ता भारी क्रूड मिल सकता है, जिससे मार्जिन बेहतर होंगे और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। हालांकि, आयात की मात्रा सीमित रह सकती है, क्योंकि अमेरिका नियंत्रण बनाए रखेगा।

Amit Kumar

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