वेनेजुएला में अमेरिका की 'कानून तोड़ हरकत', भारतीय नेताओं ने क्या दी प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि दुनिया में अंतर्राष्ट्रीय कानून की खुले आम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इस वक्त दुनिया जिसकी लाठी उसकी भैंस के कानून पर चल रही है। वहीं, हैदराबाद सांसद ओवैसी ने अमेरिका के ऐक्शन से भारत को सीखने की सलाह दी।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में संयुक्त राज्य अमेरिका की सेना ने एक संप्रभु देश के ऊपर न केवल हमला किया, बल्कि वहां के तथाकथित निर्वाचित राष्ट्रपति को उठाकर अपने देश भी ले आए। मादुरो के ऊपर भले ही तानाशाही और देश को बर्बाद करने के आरोप हों, लेकिन किसी देश के राष्ट्रपति को इस तरह से उठाकर ले आना अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है। ट्रंप के समर्थक माने-जाने वाले कई वैश्विक नेताओं ने ट्रंप के इस कदम की तारीफ की। तटस्थ रहने वालों ने तारीफ तो नहीं कि लेकिन इसका खुला विरोध भी नहीं किया। अंत में वह लोग हैं, जो या तो ट्रंप या अमेरिका के घोर विरोधी माने जाते हैं, उन्होंने ट्रंप के इस कदम की जमकर आलोचना की।
संयुक्त राज्य अमेरिका ने जिस तरह से 21वीं सदी में दुनिया को जिस तरीके से उपनिवेशवाद का एक नया उदाहरण पेश किया उस पर भारत के कई नेताओं की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। सबसे पहले भारत के विदेश मंत्रालय ने इस मामले पर गहरी चिंता जताई और वेनेजुएला में मौजूद भारतीय लोगों को भी सुरक्षित रहने के लिए कहा।
दुनिया में जंगल राज: थरूर
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दुनिया में अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन चल रहा है। संयुक्त राष्ट्र चार्टर की भी खुली अनदेखी की जा रही है अब केवल जंगल राज है। उन्होंने लिखा, "पिछले कुछ वर्षों से लगातार अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन होता है, आज जंगल राज चल रहा है, जिसकी लाठी उसकी भैंस नया सिद्धांत है।"
साम्राज्यवादी राजनीति की वापसी: सिंघवी
कांग्रेस के नेता और सुप्रीम कोर्ट के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अमेरिका की इस कार्रवाई को साम्राज्यवादी राजनीति की वापसी बताते हुए ट्रंप को सनकी शासक करार दिया। उन्होंने लिखा, "क्रूज मिसाइल से सत्ता परिवर्तन, युद्धपोत द्वारा स्थापित लोकतंत्र, और स्व-घोषित सिद्धांत के तहत संप्रभुता का पुनर्लेखन? यह नेतृत्व नहीं, बल्कि 21वीं सदी की शब्दावली में 19वीं सदी का साम्राज्यवाद है। अगर अंतरराष्ट्रीय कानून का महत्व केवल दो कमजोरों के लिए है, तो संयुक्त राष्ट्र को बंद कर देना चाहिए। दुनिया को नियमों की जरूरत है, न कि सनकी शासकों की।"
अमेरिका के ऐक्शन से भारत सीखे: ओवैसी
इस बीच हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी का भी एक बयान सामने आया है। उन्होंने अमेरिका की कार्रवाई को एक उदाहरण करार देते हुए भारत को इससे सीखने की सलाह दी। उन्होंने कहा, “अगर ट्रंप अपनी सेना भेजकर वेनेजुएला के नेता (वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का जिक्र करते हुए) को पकड़ सकते हैं, तो प्रधानमंत्री मोदी अपनी सेना को पाकिस्तान भेजकर 26/11 मुंबई आतंकी हमले के हमलावर मसूद अजहर को क्यों नहीं पकड़ सकते? अगर ट्रंप ऐसा कर सकते हैं, तो आप (मोदी) भी कर सकते हैं।”
इसके अलावा केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन ने भी अमेरिका के इस कदम की आलोचना की। उन्होंने अमेरिका को एक साम्राज्यवादी ताकत करार देते हुए कहा कि पूरी दुनिया को इसकी कड़ी निंदा करनी चाहिए। यह हरकत लैटिन अमेरिका में शांति को खराब करने वाली है।
इससे पहले अमेरिका ने नार्को आतंकवाद का आरोप लगाते हुए वेनेजुएला के राष्ट्रपति (अमेरिकी शब्दों में तानाशाह) निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को उनके घर से उठा लिया था। इसके बाद उन्हें एक युद्धपोत के जरिए अमेरिका लाया गया। बकौल ट्रंप इस घटनाक्रम के बाद वेनेजुएला की सत्ता अमेरिका संभालेगा, जबकि मादुरो के ऊपर न्यूयॉर्क की कोर्ट में मुकदमा चलाया जाएगा। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने मादुरो को शांतिपूर्ण तरीके से सत्ता छोड़ने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। इसके बाद अमेरिका ने यह कार्रवाई की।

लेखक के बारे में
Upendra Thapakउपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।
और पढ़ें



