नेपाल बॉर्डर पर पकड़ा गया अमेरिकी नागरिक, मिला चीनी पासपोर्ट; कौन है जॉर्डन ब्राउन?
भारत-नेपाल बॉर्डर पर एक अमेरिकी नागरिको को गिरफ्तार किया गया है जिसके पास कोई भी वैलिड डॉक्युमेंट नहीं है। वह भारत से नेपाल में घुसने की कोशिश कर रहा था। उसका दावा है कि वह नवंबर 2025 से ही गोवा में रह रहा था।
भारत-नेपाल सीमा पर सशस्त्र सीमा बल ने एक ऐसे शख्स को पकड़ा है जिसके पास कोई भी वैध दस्तावेज मौजूद ही नहीं हैं। जानकारी के मुताबिक वह भारत से नेपाल जाने की कोशिश कर रहा था तभी मेनिहवा इलाके में सोनौली थाने के अंतरगत उसे पकड़ लिया गया। पूछताछ करने पर उसने अपना नाम जॉर्डन ब्राउन बताया है। उसने कहा कि वह अमेरिका का नागरिक है और 2025 से ही गोवा में रह रहा है। जॉर्डन ने कई हैरान करने वाली बातें बताई हैं।
गोवा में रह रहा था जॉर्डन ब्राउन
जॉर्डन ने कहा कि समुद्र के रास्ते से वह भारत आया था। ब्राउन के खिलाफ एक केस दर्ज किया गया है। महाराजगंज के एसपी सिद्धार्थ ने कहा कि ब्राउन के पास कोई भी वैध दस्तावेज मौजूद नहीं हैं। बल्कि उसके पास से चीनी पासपोर्ट जब्त किया गया है। वहीं ब्राउन का दावा है कि थाइलैंड में उसका पासपोर्ट खो गया था। इसके बाद वह किसी तरह श्रीलंका पहुंचा और वहां से समंदर के रास्ते गोवा आकर रहने लगा।
जॉर्डन ब्राउन ने बताया कि वह अमेरिका के कैलिफोर्निया का रहने वाला है। वह नंबर 2025 से ही गोवा में रहने का दावा करता है। अब वह नेपाल जाने की कोशिश कर रहा था तभी एसएसबी ने उसे पकड़ लिया। उसके खिलाफ इमिग्रेशन ऐंड फॉरेनर्स ऐक्ट की धारा 21 और 23 के तहत सोनौली थाने में केस दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि उसके पास से कोई ऐसी चीज नहीं मिली है जिससे किसी साजिश का पता चले। हालांकि एजेंसियां उसकी ठीक से जांच करेंगी। पता लगाया जाएगा कि वह कैसे भारत में प्रवेश कर गया और इतने दिनों तक छिपकर रहा।
जॉर्डन के पास से क्या-क्या मिला
पुलिस के मुताबिक जॉर्डन ब्राउन के पास से 31,460 रुपये मिले हैं। इसके अलावा उसके पास दो मोबाइल फोन, नेपाल की करेंसी, धार्मिक किताबें, एआई ट्रांसलेटर, एक चीनी पासपोर्ट, एक डायरी, एक हाथ घड़ी मिली है। आपको बता दें कि बीते दिनों पांच यूक्रेनी और एक अमेरिकी नागरिक को एनआईए ने गिरफ्तार किया था। उनपर आतंकी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप था। उन सभी को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया था।
बताया गया कि ये सभी आरोपी टूरिस्ट वीजा पर म्यांमार से मिजोरम आए थे। उनका संबंध म्यांमार के जुंटा से है। एनआईए ने बताया कि उन्हें ड्रोन वायरफेयर की ट्रेनिंग भी दी गई थी। फिलहाल ये आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं। एजेंसियों का कहना है कि टेरर लिंक के हिसाब से मामले की जांच की जा रही है।
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लेखक के बारे में
Ankit Ojhaविद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।
राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।
अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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