अमेरिका ने 3 भारतीयों को मार डाला, पीएम मोदी निंदा तक नहीं कर रहे; विपक्ष के तीखे सवाल
ओमान के तट पर अमेरिकी नौसेना के मिसाइल हमले में 3 भारतीय नाविकों की मौत के बाद देश में सियासी भूचाल आ गया है। कांग्रेस और ओवैसी ने पीएम मोदी की 'चुप्पी' और ट्रंप से दोस्ती पर तीखे सवाल उठाए हैं। जानिए क्या है पूरा मामला।
ओमान के तट और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास एक कॉमर्शियल तेल टैंकर पर अमेरिकी नौसेना द्वारा किए गए मिसाइल हमले में 3 भारतीय नाविकों की जान चली गई है। इस घटना ने देश में एक बड़े राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। कांग्रेस और एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी सहित तमाम विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोला है और इस मामले में उनकी 'चुप्पी' और अमेरिका से जवाबदेही न मांगने को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
विपक्ष के तीखे सवाल: "जश्न का वक्त है, लेकिन निंदा का नहीं"
विपक्षी दलों ने मोदी सरकार पर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अपने नागरिकों की सुरक्षा करने में विफल रहने का आरोप लगाया है। एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने एक्स पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास जश्न मनाने का वक्त है, लेकिन अमेरिकी हमले में मारे गए भारतीयों की मौत की निंदा करने का समय नहीं है।" ओवैसी ने कहा कि भारतीयों की जान बचाना सरकार का पहला कर्तव्य है। यह दुखद और व्यथित करने वाला है कि प्रधानमंत्री के पास समारोहों के लिए समय है लेकिन भारतीयों की जान लेने के लिए अमेरिकी सेना की निंदा करने का समय नहीं है।
उन्होंने सवाल किया कि क्या भारत के इतिहास में कभी इससे कमजोर सरकार रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि रूस अब भी भारतीयों को सैनिकों के रूप में भर्ती कर रहा है ''जो मारे जा रहे हैं'' लेकिन सरकार असहाय है। ओवैसी ने बृहस्पतिवार को कहा, ''सरकार फिल्मों में चीन का नाम लेने या गलवान की लड़ाई दिखाने की अनुमति नहीं देती और अब अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में भारतीय नाविकों के साथ यह हुआ है। एक देश के रूप में हम इससे बेहतर के हकदार हैं। जय हिंद।''
कांग्रेस ने ट्रंप-मोदी की दोस्ती को घेरा
मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस घटना को अमेरिका की "लापरवाह सैन्य कार्रवाई" करार देते हुए कड़ी निंदा की है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बहुचर्चित दोस्ती पर निशाना साधते हुए कहा, "पीएम मोदी, जो अक्सर राष्ट्रपति ट्रंप के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों को एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में पेश करते हैं, वे अपनी जिम्मेदारी से नहीं भाग सकते। यह कैसा रिश्ता है जो भारतीयों की जान और हितों की रक्षा करने में ही विफल हो गया?" कांग्रेस ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह अमेरिका की जिम्मेदारी तय करने के लिए सख्त कूटनीतिक कदम उठाए, पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा दे और मृतकों के पार्थिव शरीर जल्द से जल्द स्वदेश लाने की व्यवस्था करे।
क्या है पूरा मामला?
बुधवार, 10 जून 2026 को ओमान के तट के पास पलाऊ के झंडे वाले ऑइल टैंकर 'MT Settebello' पर अमेरिका ने हमला किया। इस जहाज पर 24 भारतीय क्रू मेंबर्स सवार थे। इस भीषण हमले में 3 भारतीयों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान आंध्र प्रदेश के रहने वाले चीफ इंजीनियर सुरेश पटनाला (44), हिमाचल प्रदेश के 23 वर्षीय डेक कैडेट आदित्य शर्मा और इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया के रूप में हुई है।
अमेरिका की सफाई
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का कहना है कि इस जहाज ने ईरान पर लगे प्रतिबंधों का उल्लंघन कर ईरानी तेल ले जाने की कोशिश की थी। अमेरिका का दावा है कि USS अब्राहम लिंकन से उड़ान भरने वाले F/A-18 सुपर हॉर्नेट फाइटर जेट ने जहाज को तब निशाना बनाया जब क्रू ने अमेरिकी नेवी की रेडियो चेतावनियों और निर्देशों को नजरअंदाज किया।
भारत सरकार का रुख और कड़ा विरोध
विपक्ष के चौतरफा हमलों के बीच, भारत सरकार ने अमेरिका की इस कार्रवाई पर सख्त ऐतराज जताया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के प्रभारी जेसन मीक्स को तलब कर कड़ा राजनयिक विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "हम अपने नाविकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं। 'सेटेबेलो' पर हुए इस हमले को लेकर हमने अमेरिकी पक्ष के सामने अपना कड़ा विरोध और गहरी चिंता व्यक्त की है।"
सरकार ने बताया है कि जहाज के बाकी बचे 21 भारतीय क्रू मेंबर्स को सुरक्षित निकाल लिया गया है और मृतकों के परिवारों को 'सीमेंस वेलफेयर फंड सोसाइटी' की ओर से 10-10 लाख रुपये की तत्काल सहायता राशि देने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, पीड़ित परिवार अब भी इस बात की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं कि आखिर चेतावनी मिलने के बावजूद जहाज को आगे क्यों ले जाया गया और उनके अपनों की जान क्यों गई।
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