UPI पेमेंट करने पर लगेगा चार्ज? यूजर्स के लिए राहत भरी खबर! सबसे बड़ा भ्रम दूर

हिन्दुस्तान, नई दिल्ली, विशेष संवाददाता।
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क्या UPI पर लगेगा चार्ज? PCI ने साफ किया कि आम ग्राहकों और छोटे व्यापारियों के लिए UPI भुगतान बिल्कुल मुफ्त रहेगा। जानिए बड़े मर्चेंट्स और नेटवर्क सुरक्षा को लेकर क्या है नया अपडेट।

क्या बंद होने वाली है UPI की फ्री सर्विस? जानिए PCI ने ट्रांजैक्शन फीस पर क्या-क्या कहा
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यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) पर शुल्क लगाने की तमाम चर्चा के बीच पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) ने कहा कि आम ग्राहकों और छोटे व्यापारियों के लिए भुगतान पहले की तरह मुफ्त रहेगा। अब असल मुद्दा यह है कि तेजी से बढ़ रहे डिजिटल भुगतान नेटवर्क को लंबे समय तक कैसे मजबूत और टिकाऊ बनाया जाए। उसकी को ध्यान में रखकर कुछ फैसले लिए जा रहे हैं।

शुक्रवार को पीसीआई की तरफ से एक्स पर किए गए पोस्ट में बिंदुवार सवाल को जवाब दिया गया। पीसीआई की तरफ से लिखा गया कि सरकार और भुगतान क्षेत्र से जुड़े पक्षों के तहत वर्ष 2016 में यूपीआई की शुरुआत से ही ग्राहकों से किसी भी तरह का ट्रांजैक्शन शुल्क नहीं लिया जाता है। आगे भी उपभोक्ता बिना किसी शुल्क के यूपीआई के जरिए डिजिटल भुगतान कर सकेंगे।

उन्होंने लिखा कि टे दुकानदारों और किराना व्यापारियों से भी यूपीआई भुगतान स्वीकार करने पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) नहीं लिया जाएगा। यूपीआई को छोटे कारोबारियों तक डिजिटल भुगतान की सुविधा पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार किया गया था और उनकी सुरक्षा व सुविधा आगे भी प्राथमिकता रहेगी। यूपीआई अब दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम डिजिटल भुगतान प्रणाली बन चुकी है। हर महीने अरबों लेनदेन होने के कारण इस व्यवस्था को सुरक्षित, मजबूत और टिकाऊ बनाए रखने के लिए जरूरी निवेश और ढांचे पर चर्चा हो रही है। हालांकि इससे ग्राहकों और छोटे व्यापारियों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।

दुनिया भर के देशों में शुल्क की व्यवस्था

पीसीआई ने लिखा कि राष्ट्रीय डिजिटल भुगतान व्यवस्था को चलाने में तकनीक, साइबर सुरक्षा, ग्राहक सहायता और नियामकीय अनुपालन पर लगातार खर्च होता है। फिलहाल यह खर्च बैंक और भुगतान सेवा प्रदाता वहन कर रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं को सुरक्षित और निर्बाध डिजिटल भुगतान की सुविधा मिलती रहे। अब यदि भविष्य में बड़े व्यापारियों पर मर्चेंट सर्विस चार्ज लागू होता है, तो इसका मतलब यह नहीं होगा कि ग्राहकों को यूपीआई इस्तेमाल करने के लिए कोई शुल्क देना पड़ेगा। यह शुल्क केवल व्यापारी और भुगतान सेवा प्रदाता के बीच का व्यावसायिक समझौता होगा। दुनिया के कई देशों में भी ऐसी व्यवस्था लागू है, जबकि उपभोक्ताओं के लिए डिजिटल भुगतान सेवाएं सामान्य रूप से उपलब्ध रहती हैं।

शुल्क लगाने के पीछे कई तर्क दिए

पीसीआई ने शुल्क लगाने के फैसले के पीछे तर्क दिया है कि यूपीआई आज देश के डिजिटल भुगतान ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। इसलिए बढ़ते लेनदेन के साथ सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकथाम, तकनीकी ढांचे और नवाचार में लगातार निवेश जरूरी है,जिसे आने वाले वर्षों में भी उपभोक्ताओं और कारोबारियों को सुरक्षित, तेज और भरोसेमंद डिजिटल भुगतान की सुविधा मिलती रहे। बीते 10 वर्षों से बैंक, भुगतान सेवा प्रदाता, फिनटेक कंपनियां, एनपीसीआई और आरबीआई तकनीक, साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकने, नवाचार और ग्राहक सेवाओं पर लगातार निवेश कर रहे हैं। इसी वजह से यूपीआई 24 घंटे और सातों दिन सुरक्षित तरीके से काम कर रहा है।

Amit Kumar

लेखक के बारे में

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डिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


अमित न केवल समाचारों के त्वरित प्रकाशन में माहिर हैं, बल्कि वे खबरों के पीछे छिपे 'क्यों' और 'कैसे' को विस्तार से समझाने वाले एक्सप्लेनर लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं। डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों, जैसे कि कीवर्ड रिसर्च, ट्रेंड एनालिसिस और एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन को वे बखूबी समझते हैं। उनकी पत्रकारिता की नींव 'फैक्ट-चेकिंग' और सत्यापन पर टिकी है। एक मल्टीमीडिया पत्रकार के तौर पर अमित का सफर देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ रहा है। उन्होंने अमर उजाला, वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे बड़े मीडिया घरानों के साथ काम किया है।


अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

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