7 बार के सांसद को मंत्री पद से हटा सकती है भाजपा, क्यों हो रही लखनऊ भेजने की तैयारी?
यूपी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर बीजेपी ने तैयारियां तेज कर दी हैं। चर्चा है कि 'एक व्यक्ति-एक पद' फॉर्मूले के तहत केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी को मोदी कैबिनेट से मुक्त किया जा सकता है। पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ें।

क्या 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले पंकज चौधरी को केंद्रीय मंत्री पद से मुक्त किया जा सकता है? मोदी कैबिनेट में होने वाले संभावित फेरबदल की सुगबुगाहट के बीच यह सवाल राजनीतिक गलियारों में तेजी से तैर रहा है। माना जा रहा है कि पंकज चौधरी को यूपी बीजेपी अध्यक्ष के तौर पर उनके सांगठनिक कामकाज पर पूरा ध्यान केंद्रित करने के लिए मंत्री पद से कार्यमुक्त किया जा सकता है। उन्हें दिल्ली से हटाकर सीधे लखनऊ भेजा जा सकता है।
इस वजह से चर्चाओं को मिल रहा है बल
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पंकज चौधरी की विदाई की अटकलें इसलिए और तेज हो गई हैं क्योंकि गुरुवार को बीजेपी ने दो केंद्रीय मंत्रियों- रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन को 18 जून को होने वाले चुनाव के लिए राज्यसभा का टिकट देने से इनकार कर दिया। गौरतलब है कि रवनीत सिंह बिट्टू रेल व खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री हैं, जबकि जॉर्ज कुरियन अल्पसंख्यक कार्य व पशुपालन राज्य मंत्री हैं। वहीं, पंकज चौधरी वर्तमान में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री हैं और उन्होंने दिसंबर 2025 में यूपी बीजेपी अध्यक्ष का कार्यभार भी संभाला था।
'एक व्यक्ति-एक पद' के फॉर्मूले पर काम कर रही है BJP
बीजेपी आमतौर पर कुछ अपवादों को छोड़कर 'एक व्यक्ति-एक पद' के सिद्धांत का पालन करती आई है। हाल ही में कॉर्पोरेट मामलों के राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा को भी दिल्ली बीजेपी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। अतीत में भी बीजेपी अपनी चुनावी प्राथमिकताओं के आधार पर पदाधिकारियों की भूमिकाएं तय करती रही है। राजनीतिक जरूरतों को पूरा करने के लिए कई बार नेताओं को सरकार से संगठन में या संगठन से सरकार में भेजा गया है।
यूपी में पंकज चौधरी के सामने हैं ये बड़ी चुनौतियां
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) और उसकी सहयोगी कांग्रेस का मुकाबला करने के लिए पंकज चौधरी को जमीन पर काफी मेहनत करनी है। एक वरिष्ठ बीजेपी सदस्य के मुताबिक, पंकज चौधरी फिलहाल अपनी नई टीम को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं, जो इन अहम चुनावों में पार्टी का नेतृत्व करेगी। विश्लेषकों का भी मानना है कि इन बड़ी जिम्मेदारियों के लिए प्रदेश अध्यक्ष का 'फुल-टाइम' ध्यान देना जरूरी है, इसलिए उन्हें मंत्री पद से मुक्त करना एक समझदारी भरा कदम हो सकता है।
संगठन को मजबूत करने के अलावा पंकज चौधरी को इन मोर्चों पर काम करना होगा-
- सरकार और कैडर में तालमेल: पार्टी कार्यकर्ताओं और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना।
- सदस्यता और जनसंपर्क अभियान: पार्टी के सदस्यता अभियान और आउटरीच कार्यक्रमों की सीधी निगरानी करना।
- जातीय और क्षेत्रीय समीकरण: गैर-यादव ओबीसी, विशेषकर कुर्मी समुदाय के बीच पार्टी की पैठ मजबूत करते हुए क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को साधना।
- चुनावी मशीनरी की तैयारी: 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए जमीनी स्तर पर पूरी मशीनरी को तैयार करना।
महाराजगंज से 7 बार के सांसद हैं पंकज चौधरी
पूर्वी यूपी की राजनीति के दिग्गज माने जाने वाले पंकज चौधरी महाराजगंज से 7 बार के सांसद हैं। उनके पास लंबा संगठनात्मक और प्रशासनिक दोनों तरह का अनुभव है। यूपी बीजेपी अध्यक्ष के रूप में उनकी नियुक्ति को क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा गया था। अपनी मौजूदा दोहरी भूमिका के जरिए वह फिलहाल राज्य संगठन और केंद्र सरकार के बीच समन्वय बनाए हुए हैं। हालांकि, मोदी कैबिनेट में संभावित फेरबदल और यूपी चुनाव के लिए तेज होती तैयारियों के बीच, पंकज चौधरी की भावी भूमिका लखनऊ से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक दिलचस्पी का विषय बनी हुई है।
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