नोएडा डीएम मेधा रूपम को लगी HC की फटकार, अब सुप्रीम कोर्ट जाएगी यूपी सरकार

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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अकृति चौधरी की NSA के तहत हिरासत के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को उत्तर प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। हाईकोर्ट ने हिरासत रद्द करते हुए नोएडा DM को फटकार लगाई थी।

अकृति चौधरी की हिरासत पर हाईकोर्ट का फैसला नहीं मंजूर, यूपी सरकार ने उठाया बड़ा कदम
अकृति चौधरी की हिरासत पर हाईकोर्ट का फैसला नहीं मंजूर, यूपी सरकार ने उठाया बड़ा कदम

उत्तर प्रदेश सरकार इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने जा रही है। अपने आदेश में हाईकोर्ट ने गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम को कड़ी फटकार लगाई गई थी। यह मामला दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा अकृति चौधरी को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिए जाने को लेकर है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बुधवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ को बताया कि हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की जाएगी। गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम भी इस आदेश को चुनौती देते हुए अलग से अपील दाखिल करेंगी।

हाईकोर्ट ने रद्द की थी अकृति की हिरासत, 5 लाख रुपये मुआवजा

इलाहाबाद हाईकोर्ट की जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की खंडपीठ ने 2 सितंबर को अकृति चौधरी की हिरासत रद्द कर दी थी। कोर्ट ने उन्हें 5 लाख रुपये मुआवजा देने का भी निर्देश दिया था।

कोर्ट ने आदेश दिया था कि यह रकम जिलाधिकारी के वेतन से और उन सभी अधिकारियों से वसूल की जाए, जो अकृति को NSA के तहत हिरासत में लेने की वजह बनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए जिम्मेदार थे।

पुलिस रिपोर्ट में विश्वसनीय सामग्री नहीं थी- हाई कोर्ट

हाईकोर्ट ने कहा था कि अकृति के खिलाफ पुलिस की रिपोर्ट में कोई विश्वसनीय सामग्री नहीं थी। ऐसे में जिलाधिकारी से अपेक्षा थी कि वह सतर्कता बरततीं और NSA जैसे “दमनकारी प्रावधानों” का सहारा लेने से पहले रिकॉर्ड की बारीकी से जांच करतीं। कोर्ट ने मामले में मेधा रूपम के आचरण को उपहास के योग्य भी बताया था।

अप्रैल में नोएडा में मजदूरों के प्रदर्शन से जुड़ा है मामला

अकृति चौधरी को अप्रैल में नोएडा में औद्योगिक श्रमिकों के प्रदर्शन के सिलसिले में हिरासत में लिया गया था। वह अभी भी हिरासत में हैं और प्रदर्शन से जुड़े कई आपराधिक मामलों का सामना कर रही हैं। हालांकि, अकृति की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने पाया कि उन्हें NSA के तहत हिरासत में रखने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद नहीं थी।

IAS-IPS अधिकारियों को संविधान के प्रति निष्ठा की याद दिलाई

इसी फैसले में हाईकोर्ट ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारियों को भी याद दिलाया कि उनकी निष्ठा संविधान के प्रति है, न कि राजनीतिक कार्यपालिका के प्रति।

कोर्ट ने कहा था कि जब भी नौकरशाह और पुलिस अधिकारी भारत और उसके संविधान के प्रति अपनी शपथ और निष्ठा की अनदेखी करते हैं, तो लोग उन्हें ब्रिटिश साम्राज्य की दमनकारी विरासत के रूप में देखने लगेंगे।

हाई कोर्ट ने यह चेतावनी भी दी थी कि अगर अदालत नौकरशाहों की ज्यादतियों के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रहती है तो राज्य एक ‘ऑरवेलियन डिस्टोपिया’ में तब्दील हो सकता है।

Amit Kumar

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