तमिलनाडु विधानसभा में अनोखी बहस: 'नागदोषम' पर थलपति विजय के मंत्री ने दिया 'जलदोषम' वाला जवाब
तमिलनाडु विधानसभा में बुधवार को प्रश्नकाल के दौरान सांप काटने की घटनाओं को 'नाग दोषम' से जोड़कर विपक्षी डीएमके विधायक ओ पनीरसेल्वम और सत्ताधारी टीवीके सरकार के स्वास्थ्य मंत्री के बीच हंसी-मजाक भरी नोकझोंक देखने को मिली।

तमिलनाडु विधानसभा में बुधवार को प्रश्नकाल के दौरान 'नाग दोषम' (सर्प दोष) और 'जलदोषम' (सामान्य सर्दी-जुकाम) को लेकर विपक्षी दल डीएमके और मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय सरकार के विधायकों के बीच काफी हंसी-मजाक वाली नोकझोंक देखने को मिली। प्रश्नकाल के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके विधायक ओ पनीरसेल्वम ने राज्य के विभिन्न जिलों में सांप काटने की बढ़ती घटनाओं का हवाला दिया। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे प्रभावित क्षेत्रों में 'नाग दोषम' का असर है। इसके साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए स्वास्थ्य मंत्री से पूछा कि क्या सरकार पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठानों के जरिए इस 'दोष' को दूर करने के लिए कदम उठाएगी।
इस पर जवाब देते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ केजी अरुणराज ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार वैज्ञानिक दृष्टिकोण से काम करती है और 'दोष' जैसी धारणाओं पर विश्वास नहीं करती। उन्होंने ज्योतिषीय सिद्धांत को खारिज करते हुए कहा कि राज्य सरकार केवल विज्ञान पर भरोसा करती है और फिलहाल वह केवल 'जलदोषम' (सर्दी-जुकाम) से निपट रही है, न कि 'नाग दोषम' से। मंत्री ने कहा कि यदि विधायक खुद ऐसी मान्यताओं में विश्वास करते हैं तो वे अपने निर्वाचन क्षेत्र में निजी रूप से ऐसे उपाय कर सकते हैं, लेकिन सरकार केवल वैज्ञानिक तरीके ही अपनाएगी।
इसके बाद पनीरसेल्वम ने फिर कहा कि अगर मंत्री चाहें तो वे विशेष विशेषज्ञों की व्यवस्था कर सकते हैं जो इस दोष को दूर करने के लिए अनुष्ठान कर सकें, जिस पर अरुणराज ने दोहराया कि उन्हें ऐसी प्रथाओं में न तो कोई दिलचस्पी है और न ही कोई विश्वास। बहस में हस्तक्षेप करते हुए लोक निर्माण और खेल विकास मंत्री आधव अर्जुन ने कहा कि द्रमुक पार्टी वैसे तो तर्कवादी नेता पेरियार के आदर्शों का पालन करने का दावा करती है, वो आज विधानसभा में 'दोष' की बात कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार पेरियार के आदर्शों पर चलते हुए समस्याओं का समाधान तंत्र-मंत्र के बजाय तर्कसंगत और वैज्ञानिक तरीकों से करती है।
विवाद बढ़ता देख नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन ने स्थिति को संभालते हुए स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के सदस्य का इशारा वास्तव में आम सर्दी-जुकाम ('जलदोषम') की तरफ था। उन्होंने बताया कि उपनेता प्रतिपक्ष और पूर्व मंत्री के.एन. नेहरू पिछले दो दिनों से सर्दी-जुकाम से पीड़ित हैं और पनीरसेल्वम का संदर्भ इसी से जुड़ा था।
दोनों पक्षों के बीच हुई इस तीखी लेकिन मजेदार बहस से सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही दीर्घाओं में ठहाके गूंज उठे। बाद में अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर ने हस्तक्षेप करते हुए बहस को समाप्त कराया और कहा कि इसे हल्के-फुल्के अंदाज में ही लिया जाना चाहिए।


