मोदी कैबिनेट के दलित मंत्री आरक्षण छोड़ने तैयार, बस एक शर्त रख दी; क्या मांगा?

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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भारत की राजनीति के बड़े दलित चेहरों में शामिल रामदास आठवले केंद्र सरकार में केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री हैं। उन्होंने आरक्षण को लेकर बड़ा ऐलान कर दिया है। इसमें उन्होंने कहा है कि वह एक शर्त पूरी होने पर रिजर्वेशन छोड़ने के लिए तैयार हैं।

Ramdas Athawale
केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कहा है कि वह चाहते हैं कि देश से जातिवाद खत्म हो जाए। (ANI Photo)

आरक्षण को लेकर जारी बहस के बीच केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने बड़ा ऐलान कर दिया है। उन्होंने एक शर्त रखी है और कहा है कि अगर उसे पूरा कर दिया जाता है, तो वह आरक्षण छोड़ने के लिए तैयार हैं। उनका बयान इसलिए भी अहम है, क्योंकि वह केंद्रीय कैबिनेट शामिल बड़ा दलित चेहरा हैं। यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब दिल्ली में आरक्षण हटाओ आंदोलन के तहत जमकर प्रदर्शन हुआ था।

वार्ता के मुताबिक, छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर पहुंचे आठवले ने कहा, 'जाति के आधार पर आरक्षण का प्रावधान है। अगर जातिवाद खत्म हो तो हम आरक्षण छोड़ने को तैयार हैं। जब तक जातिवाद खत्म नहीं होगा आरक्षण लागू रहेगा।' खास बात है कि वह इसी तरह का दावा पिछले सप्ताह झारखंड में भी कर चुके हैं। रांची में उन्होंने कहा था, 'अगर जाति व्यवस्था खत्म हो जाती है, तो हम आरक्षण छोड़ने के लिए तैयार हैं।'

दिल्ली में हो चुका है आंदोलन

अगस्त में राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ बड़ा आंदोलन हुआ था। तब 50 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। उस दौरान प्रदर्शनकारी मांग कर रहे थे कि जाति के बजाए आरक्षण गरीबों को मिलना चाहिए। सोशल मीडिया पर भी आरक्षण हटाओ आंदोलन के नाम से मुहिम शुरू की गई थी।

बिहार में भी हुआ था प्रदर्शन

खास बात है कि आरक्षण के मुद्दे पर बिहार की राजधानी पटना में भी मंगलवार को बड़ी संख्या में अनुसूचित जाति और OBC यानी अन्य पिछड़ा वर्ग से आने वाले प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए थे। ये प्रदर्शन आरक्षण बढ़ाओ संविधान बचाओ संघर्ष समिति की अगुवाई में किए गए थे। इनकी मांग की थी कि राज्य सरकार 65 फीसदी कोटा को लागू करे। जबकि, मौजूदा समय में यह आंकड़ा 50 प्रतिशत पर है। साल 2024 में पटना हाई कोर्ट ने 65 फीसदी कोटा को असंवैधानिक घोषित कर दिया था।

पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई में बिहार सरकार ने आरक्षण बढ़ाकर 65 फीसदी कर दिया था। 2022-23 की जाति पर आधारित सर्वे रिपोर्ट के आधार पर यह फैसला लिया गया था। बाद में यह मामला पटना हाई कोर्ट पहुंचा और फैसले पर रोक लगा दी गई थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा था।

सरकार मिली

इसके कुछ दिनों के बाद केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आंदोलन का नेतृत्व कर रहे लोगों से मुलाकात भी की थी। इनमें हर्ष दुबे, मृत्युंजय पाठक और रण बहादुर सिंह चौहान शामिल थे। साथ ही उन्होंने इस संबंध में जल्द ही एक और बैठक करने की भी बात कही थी। हालांकि, अगले दौर की मीटिंग को लेकर स्थिति साफ नहीं हो सकी है। साथ ही यह भी पता नहीं चल सका है कि मीटिंग के दौरान क्या बात हुई थी।

NDA के दूसरे मंत्री क्या बोले

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने अगस्त में कहा था, 'आरक्षण के बारे में मेरी साफ राय है कि अगर किसी एक सामाजिक वर्ग की अपनी चिंताएं हैं, तो दूसरों की आशंकाओं का ध्यान रखना भी हमारी सरकार की जिम्मेदारी है।' उन्होंने कहा था, 'एक ओर हमें अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के हितों की रक्षा करनी है, लेकिन दूसरी ओर हमें ऊंची जातियों की आशंकाओं को भी दूर करना चाहिए। किसी एक जाति के हितों की रक्षा करने का नतीजा दूसरी जाति के शोषण के रूप में नहीं निकलना चाहिए।'

इससे पहले उन्होंने कहा था, 'आरक्षण को लेकर किसी भी तरह की गलतफहमी देश की बड़ी आबादी में नाराजगी पैदा कर सकती है। जब प्रदर्शनकारी अपनी मांगें व्यवस्थित तरीके से रखेंगे तो सरकार उनसे बातचीत करेगी।'

Nisarg Dixit

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Nisarg Dixit

निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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