केंद्रीय गृह सचिव कल हाजिर हों... सुप्रीम कोर्ट ने क्यों किया तलब, क्या मामला?

Apr 06, 2026 04:21 pm ISTPramod Praveen भाषा, नई दिल्ली
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सुनवाई के दौरान, पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील से हाल ही में मीडिया में आई उस खबर के बारे में भी पूछा जिसमें सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए कई स्थानों पर लगे चीन कंपनी निर्मित सीसीटीवी कैमरों को हटाए जाने की बात कही गई थी।

केंद्रीय गृह सचिव कल हाजिर हों... सुप्रीम कोर्ट ने क्यों किया तलब, क्या मामला?

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय गृह सचिव को मंगलवार (7 अप्रैल) को सशरीर अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने यह आदेश सोमवार को पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों की कार्यक्षमता में कमी से संबंधित एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई करते हुए पारित किया। कोर्ट ने कहा कि केंद्रीय गृह सचिव को बुलाया जाए ताकि पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना के क्रियान्वयन में उनसे उचित सहायता प्राप्त की जा सके।

सुनवाई के दौरान, पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील से हाल ही में मीडिया में आई उस खबर के बारे में भी पूछा जिसमें सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए कई स्थानों पर लगे चीन कंपनी निर्मित सीसीटीवी कैमरों को हटाए जाने की बात कही गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए जस्टिस मेहता ने कहा कि केंद्र ने स्वयं पड़ोसी देश से लिए गए कैमरों को हटाने के निर्देश दिए हैं क्योंकि वे डेटा एकत्र कर रहे हैं और उसे वहां भेज रहे हैं।

केंद्रीकृत डैशबोर्ड स्थापित करने की प्रक्रिया जारी

पीठ ने टिप्पणी की, ''अब सरकार ने कुछ विशेष कैमरों को हटाने के निर्देश जारी किए हैं।" केंद्र की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल राजा ठाकरे ने कहा कि इस संबंध में अभी तक कोई औपचारिक आदेश पारित नहीं किया गया है। इस मामले में उच्चतम न्यायालय की सहायता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने पीठ को बताया कि अधिकांश राज्यों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके हैं और वे केंद्रीकृत डैशबोर्ड स्थापित करने की प्रक्रिया में हैं।

अन्य राज्य केरल का अनुसरण क्यों नहीं कर सकते?

जब दवे ने कहा कि केरल में सबसे अच्छी व्यवस्था है, तो जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा, "यदि आप कहते हैं कि केरल में सबसे अच्छी व्यवस्था है, तो अन्य राज्य इसका अनुसरण क्यों नहीं कर सकते?" पीठ ने कहा कि इस पर संबंधित प्राधिकारियों द्वारा चर्चा की जानी चाहिए। ठाकरे ने कहा कि 60 प्रतिशत निधि केंद्र सरकार द्वारा दी जाती है। इस दौरान पीठ को सूचित किया गया कि उच्चतम न्यायालय द्वारा पहले पारित आदेशों में उठाए गए मुद्दों की व्यवहार्यता, तौर-तरीकों और क्रियान्वयन ढांचे पर विचार-विमर्श करने के लिए आयोजित बैठक में एक अवर सचिव स्तर के अधिकारी उपस्थित थे।

मामले पर कल फिर से सुनवाई

पीठ ने असंतोष व्यक्त करते हुए ठाकरे से कहा, "हम आदेश पारित कर रहे हैं और आप बैठक में एक अवर सचिव स्तर के अधिकारी को भेज रहे हैं?" विधि अधिकारी ने अदालत को आश्वासन दिया कि बैठक में एक उच्च स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहेंगे। इस पर पीठ ने कहा, "इस मामले पर कल फिर से सुनवाई होगी। भारत के गृह सचिव इस न्यायालय के समक्ष उपस्थित रहें ताकि इस योजना के क्रियान्वयन में उनसे उचित सहायता प्राप्त की जा सके, जिसकी निगरानी इस न्यायालय द्वारा की जा रही है।"

SC ने लिया था स्वत: संज्ञान

बता दें कि 26 फरवरी को उच्चतम न्यायालय ने केंद्र और अन्य पक्षों को एक बैठक में भाग लेने का निर्देश दिया था ताकि केंद्रीकृत डैशबोर्ड के निर्माण और पुलिस थानों में सीसीटीवी उपकरणों के मानकीकरण सहित मुद्दों की व्यवहार्यता, तौर-तरीकों और कार्यान्वयन ढांचे पर विचार-विमर्श किया जा सके। उच्चतम न्यायालय ने इससे पहले मीडिया की एक खबर का संज्ञान लेते हुए पुलिस थानों में कार्यशील सीसीटीवी कैमरों की कमी को लेकर स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था।

कम से कम एक वर्ष तक डेटा स्टोर हो

उच्चतम न्यायालय ने 2018 में मानवाधिकारों के हनन की रोकथाम के लिए सभी पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश दिया था। दिसंबर 2020 में, उच्चतम न्यायालय ने केंद्र को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) सहित जांच एजेंसियों के कार्यालयों में सीसीटीवी कैमरे और रिकॉर्डिंग उपकरण स्थापित करने का निर्देश दिया था। अदालत ने केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए ऐसी प्रणाली की खरीद अनिवार्य कर दी है जो कम से कम एक वर्ष तक डेटा स्टोर कर सकें।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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