Hindi NewsIndia NewsUnion Budget has also made Election Commission richer with allocations increasing by 25.33%
केंद्रीय बजट से निर्वाचन आयोग की बल्ले-बल्ले, आगामी चुनावों के लिए  25.33 फीसदी बढ़ा आवंटन

केंद्रीय बजट से निर्वाचन आयोग की बल्ले-बल्ले, आगामी चुनावों के लिए 25.33 फीसदी बढ़ा आवंटन

संक्षेप:

केंद्रीय बजट में सरकार ने निर्वाचन आयोग के लिए आवंटित की जाने वाली धनराशि में बढ़ोतरी की है। सरकार की तरफ से इसे 25.33 फीसदी तक बढ़ा दिया गया है। आने वाले महीनों में तमाम विधानसभा चुनावों की तैयारियों के हिसाब से यह महत्वपूर्ण है।

Feb 01, 2026 05:35 pm ISTUpendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट क पेश कर दिया है। सत्ता पक्ष इस बजट को एक मास्टरस्ट्रोक बता रहा है, तो वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने इसे कमजोर बजट करार दिया। विपक्ष द्वारा लगातार निशाना बनाए जा रहे चुनाव आयोग के लिए भी सरकार ने इस बजट में अपना खजाना खोल दिया है। आने वाले महत्वपूर्ण चुनावों को देखते हुए सरकार ने इस वर्ष आयोग के बजट में 25.33 फीसदी की बढ़ोतरी की है, जिससे यह आवंटन 2025-26 में 304.98 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 382.22 करोड़ रुपये हो गया है।

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सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कुल आवंटित धनराशि में से 367.69 करोड़ रुपये चुनाव संबंधी खर्चों के लिए रखे गए हैं, जबकि शेष राशि प्रशासनिक और संचालन व्ययों पर खर्च होगी।

चुनाव आयोग के लिए बढ़ा हुआ फंड ऐसे समय में आया है, जब विपक्ष उस पर सत्तारूढ़ बीजेपी से कथित मिलीभगत के आरोप लगा रहा है। अगले दो वर्षों में होने वाले कई अहम राज्य चुनावों इस साल तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम और केरल इसके अलावा 2027 में उत्तर प्रदेश और पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच यह बढ़ोतरी अहम मानी जा रही है।

चुनावी प्रक्रिया को मजबूत बनाने के लिए सरकार ने चुनाव आयोग के अलावा कानून मंत्रालय के बजट को भी बढ़ाया है। सरकार ने मतदाता पहचान पत्र के लिए कानून मंत्रालय को 250 करोड़ और पिछले लोकसभा चुनाव से जुड़े खर्चों के लिए 500 करोड़ रुपयों का आवंटन किया है। अधिकारियों के अनुसार, ये 500 करोड़ रुपये विभिन्न एजेंसियों और राज्य सरकारों द्वारा किए गए खर्चों की अदायगी हैं।

गौरतलब है कि देश में मतदाताओं की संख्या फिलहाल करीब 99 करोड़ है, लेकिन चुनाव आयोग द्वारा आदेशित विशेष गहन पुनरीक्षण के चलते आने वाले वर्षों में इसमें संभावित गिरावट हो सकती है। बिहार में पिछले वर्ष हुए इसको लेकर काफी विवाद रहा था, जहां चुनाव से पहले 47 लाख नाम काटे गए थे। विपक्ष लगातार इसको लेकर चुनाव आयोग और भाजपा की मिलीभगत का आरोप लगाता रहा है। हालांकि आयोग और भाजपा दोनों ने किसी भी तरह की मिलीभगत के आरोपों को खारिज किया है।

Upendra Thapak

लेखक के बारे में

Upendra Thapak
उपेन्द्र पिछले कुछ समय से लाइव हिन्दुस्तान के साथ बतौर ट्रेनी कंटेंट प्रोड्यूसर जुड़े हुए हैं। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली (2023-24 बैच) से पूरी की है। इससे पहले भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से अपना ग्रैजुएशन पूरा किया। मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के रहने वाले हैं। अंतर्राष्ट्रीय संबंधों, राजनीति के साथ-साथ खेलों में भी दिलचस्पी रखते हैं। और पढ़ें
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