देश का अब तक का सबसे बड़ा डिफेंस बजट, निर्मला सीतारमण ने खोला खजाना, अब धड़ाधड़ बनेंगी मिसाइलें
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान से जारी तनाव और चीन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए केंद्र की मोदी सरकार ने रक्षा क्षेत्र के लिए खजाना खोल दिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा बजट में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बढ़ोतरी करते हुए रिकॉर्ड आवंटन किया है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान से जारी तनाव और चीन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए केंद्र की मोदी सरकार ने रक्षा क्षेत्र के लिए खजाना खोल दिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा बजट में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बढ़ोतरी करते हुए रिकॉर्ड आवंटन किया है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में रक्षा मंत्रालय के लिए कुल 7.85 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो कुल बजट का 14.68 प्रतिशत है और पिछले वर्ष के बजट से 15 प्रतिशत अधिक है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को लोकसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया, जिसमें रक्षा मंत्रालय को सबसे अधिक 7.85 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि मंत्रालय को मिली यह राशि केंद्रीय बजट का 14.68 प्रतिशत है। इसका मुख्य उद्देश्य सैन्य तैयारियों को मजबूत करना, नवाचार को प्रोत्साहन देना और देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को और सुदृढ़ करना है। मंत्रालय ने इसे प्रौद्योगिकी की दृष्टि से उन्नत और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर एक निर्णायक कदम बताया है, जो 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के विजन से पूरी तरह मेल खाता है।
इस बजट में आधुनिकीकरण, प्रौद्योगिकी नवाचार और संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए सरल एवं प्रभावी खरीद प्रक्रियाओं पर विशेष जोर दिया गया है। मंत्रालय ने कहा कि मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से रक्षा बजट में लगातार वृद्धि हो रही है। पिछले वर्षों के आंकड़े इस प्रकार हैं...
- वित्त वर्ष 2021-22: 4.84 लाख करोड़ रुपये
- 2022-23: 5.25 लाख करोड़ रुपये
- 2023-24: 5.94 लाख करोड़ रुपये
- 2024-25: 6.2 लाख करोड़ रुपये
- 2025-26: 6.81 लाख करोड़ रुपये
वहीं, रक्षा क्षेत्र को बढ़ावा देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की कि रक्षा क्षेत्र की इकाइयों द्वारा रखरखाव, मरम्मत या समग्र आवश्यकताओं के लिए उपयोग किए जाने वाले विमान के पुर्जों के निर्माण हेतु आयातित कच्चे माल पर मूल सीमा शुल्क से छूट देने का प्रस्ताव है। यह कदम घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने और आत्मनिर्भरता बढ़ाने में मदद करेगा।


