JPSC भर्ती मामले का पूरा खेल यहां समझिए, इन 3 अधिकारियों की ऐसे ही लगी नौकरी
झारखंड भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन गुरुवार को 20वें दिन भी जारी है। वहीं, प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन वापस लेने से साफ इनकार कर दिया है।

JPSC यानी झारखंड लोकसेवा आयोग भर्ती परीक्षा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को 20 दिन हो गए हैं। परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर जांच भी शुरू हो चुकी है। इसी बीच खबर है कि इस पूरे रैकेट से जुड़े एक शख्स ने CID के सामने कथित घोटाले की पुरी जानकारी खोलकर रख दी है। उसने बताया है कि कैसे एक उम्मीदवार 8 चरणों में रुपये देने से लेकर सिलेक्शन तक की प्रक्रिया से गुजरता है।
CID ने अब तक कम से कम 20 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। इसमें TDPL यानी राज्य में परीक्षा कराने वाली एजेंसी का मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी भी शामल है।
कैसे होता था खेल
एनडीटीवी की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि तिवारी ने CID को बताया कि उम्मीदवार अधिकारियों तक बिचौलियों की मदद से पहुंचते थे। उसने कहा है कि आदित्य पांडे नाम का एक एजेंट उम्मीदवारों को टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह से मिलाता था। बाद में उसे आयोग के सदस्य के पास भेजा जाता था और यहीं से उम्मीदवार के नंबर बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू होती थी।
कई लोगों के नाम लिए
रामवीर सिंह के अलावा तिवारी ने कई और लोगों के नाम लिए हैं। इनमें JPSC के पूर्व चेयरमैन एल ख्यांग्ते, आयोग के सदस्य डॉक्टर अजिता भट्टाचार्य, डॉक्टर जमाल अहमद और डॉक्टर अनीमा हसदा का नाम शामिल है। उसने कहा है कि कोडरमा का रहने वाला लालू यादव इन उम्मीदवारों के लिए एजेंट का काम करता था।
ख्यांग्ते की गिरफ्तारी के बाद तीनों ने आयोग से इस्तीफा दे दिया है। अब CID ने इन्हें पूछताछ के लिए बुलाया है।
उसने बताया कि लालू उम्मीदवारों को उसके पास लाता था और बाद में रामवीर सिंह के जरिए इंटरव्यू अजिता भट्टाचार्य बोर्ड में फिक्स कराया जाता था।
रिपोर्ट के मुताबिक, तिवारी ने तीन उन अधिकारियों के भी नाम लिए हैं, जो कथित तौर पर इस रैकेट की मदद से नौकरी में लगे थे। इनमें पुलिस अधीक्षक रॉबिन कुमार, डीएसपी शैलेष सिंह और डिप्टी जेलर राजेश कुमार रजक शामिल हैं। इसके अलावा उसने एग्जाम कंट्रोलर श्वेता गुप्ता और पतंजलि कोचिंग ऑपरेटर रवि कुमार समेत कई लोगों के भी रैकेट में शामिल होने की बात कही है।
ऐसे होता था खेल
वेबसाइट को सूत्रों ने बताया कि तिवारी का कहना है कि उम्मीदवारों से अलग-अलग स्तर पर रुपये लिए जाते थे। इनमें पसंद के बोर्ड से इंटरव्यू की सेटिंग कराना शामिल है। इसके लिए अधिकारी एक उम्मीदवार से 15 लाख रुपये तक लेते थे। सिलेक्शन होने तक उम्मीदवार से ली जाने वाली रकम 12वें और 13वें जेपीएससी परीक्षाके लिए 60 से 70 तक लाख तक पहुंच जाती थी।
रिपोर्ट के अनुसार, सूत्र बताते हैं कि तिवारी ने CID को बताया है कि जो उम्मीदवार जिस JPSC सदस्य को पैसे देते थे, उन्हें उसके पास इंटरव्यू के लिए भेजा जाता था। उसने कहा कि उम्मीदवार का कोड एक दिन पहले डिकोड किया जाता था और बाद में उम्मीदवार को भट्टाचार्य या चेयरमैन के पास भेजा जाता था।
अब समझें रुपये का खेल
रिपोर्ट के मुताबिक, तिवारी ने जांच एजेंसी को बताया है कि अलग-अलग लोगों के जरिए पैसा मुख्य व्यक्ति तक पहुंचता था। उसने बताया कि भट्टाचार्य को रकम पीएम बृजराम के जरिए पहुंचती थी। जबकि, ख्यांग्ते के पास धर्मेंद्र नाम का व्यक्ति पैसा लेकर जाता था।


