ब्रिटिश महिला के दिमाग में निकले 38 कीड़े, भारत पर मढ़ा आरोप; लोग बोले- एलिजाबेथ भी मर गईं...
दिमाग में 38 कीड़े मिलने पर एक ब्रिटिश महिला ने 2007 के भारत दौरे को जिम्मेदार बताया। इस अजीब दावे पर भड़के भारतीयों ने महारानी एलिजाबेथ का उदाहरण देकर सोशल मीडिया पर जमकर मजे लिए हैं।

हाल ही में एक 42 वर्षीय ब्रिटिश महिला लोरी डेनमैन की खबर पश्चिमी मीडिया में छाई हुई है, जिनके दिमाग में 38 परजीवी सिस्ट पाए गए हैं। महिला और कुछ विशेषज्ञों का दावा है कि 2007 में अपनी दो महीने की भारत यात्रा के दौरान उन्हें सूअर के फीताकृमि से यह दुर्लभ संक्रमण- न्यूरोसिस्टीसर्कोसिस हुआ था। हालांकि, भारत में सोशल मीडिया यूजर्स इस खबर के सामने आने के बाद महिला और पश्चिमी मीडिया पर बुरी तरह भड़क गए हैं। इंटरनेट पर भारतीय इसे पूरी तरह से एक 'भारत विरोधी एजेंडा' करार दे रहे हैं।
'एंटी-इंडिया एजेंडा' बताकर भड़के लोग
भारत में सोशल मीडिया पर लोग इस बात पर तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं कि करीब 19 साल पहले की गई एक यात्रा को बिना किसी ठोस वैज्ञानिक प्रमाण के इस तरह से क्यों उछाला जा रहा है। यूजर्स का कहना है कि विदेशी मीडिया अक्सर भारत की छवि एक 'अस्वच्छ' देश के रूप में पेश करने की फिराक में रहता है। लोगों का आरोप है कि 2007 की यात्रा की आड़ में अब भारत को दुनिया भर के पर्यटकों के बीच असुरक्षित बताने की यह एक सोची-समझी साजिश है। इंटरनेट पर लोग सवाल पूछ रहे हैं कि दशकों पुरानी यात्रा को अचानक सुर्खियों में लाकर भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा क्यों चलाया जा रहा है।
महारानी एलिजाबेथ का उदाहरण देकर उड़ा रहे मजाक
गुस्से के साथ-साथ सोशल मीडिया पर मीम्स और तंज की भी बाढ़ आ गई है। भारतीय यूजर्स ब्रिटिश महिला के दावे के लॉजिक को आड़े हाथों लेते हुए मजेदार कमेंट्स कर रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लोग मजे लेते हुए लिख रहे हैं, "ब्रिटेन की दिवंगत महारानी एलिजाबेथ द्वितीय भी 1997 में भारत आई थीं और 2022 में उनका निधन हो गया... तो क्या अब उनके निधन का जिम्मेदार भी उनके भारत दौरे को ठहराया जाएगा?" यूजर्स तंज कस रहे हैं कि 2007 से लेकर अब तक सालों तक दुनिया भर में रहने, घूमने और खाने-पीने के बाद किसी बीमारी के लिए सिर्फ अपनी भारत यात्रा को दोष देना पूरी तरह से बेतुका और हास्यास्पद है।
क्या है मामला?
42 वर्षीय ब्रिटिश महिला लोरी डेनमैन के दिमाग में 38 परजीवी सिस्ट पाए गए हैं। महिला का मानना है कि साल 2007 में उसकी दो महीने की भारत यात्रा के दौरान उसे यह संक्रमण हुआ था। वह 'न्यूरोसिस्टीसर्कोसिस' नामक एक दुर्लभ बीमारी का शिकार हो गई हैं, जो सूअर के फीताकृमि 'टीनिया सोलियम' के कारण होती है। यह बीमारी दिमाग और नर्वस सिस्टम को प्रभावित करती है और दुनिया भर में मिर्गी का एक प्रमुख कारण है।
4 साल बाद चला बीमारी का पता
भारत से लौटने के चार साल बाद 2011 में लोरी को पहली बार कुछ गड़बड़ होने का अहसास हुआ, जब टॉयलेट जाने पर उन्हें एक मीटर लंबा टेपवर्म (फीताकृमि) मिला। इसके बाद हुए एमआरआई (MRI) स्कैन में उनके दिमाग के अंदर 38 परजीवी सिस्ट होने का खुलासा हुआ। इस संक्रमण के कारण होने वाली मिर्गी को नियंत्रित करने के लिए महिला को अब जीवन भर दवाएं खानी पड़ेंगी।
सिर्फ सूअर का मांस नहीं, इन चीजों से भी फैलता है संक्रमण
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, लोग दूषित भोजन या पानी के जरिए अनजाने में फीताकृमि के सूक्ष्म अंडे निगल लेते हैं, जिससे 'न्यूरोसिस्टीसर्कोसिस' होता है। आमतौर पर कच्चा या अधपका सूअर का मांस खाने से आंतों में टेपवर्म का संक्रमण होता है, लेकिन दिमाग तक लार्वा पहुंचने का कारण संक्रमित भोजन और पानी है।
यह अंडे केवल सूअर के मांस में नहीं, बल्कि कच्चे फलों, सब्जियों और अन्य खाने-पीने की चीजों को भी दूषित कर सकते हैं, खासकर तब जब इन्हें संक्रमित व्यक्ति द्वारा बिना साफ-सफाई के छुआ गया हो।
दूषित पानी पीने से भी यह संक्रमण तेजी से फैलता है। पेट में जाने के बाद अंडे लार्वा बनते हैं और खून के जरिए दिमाग, मांसपेशियों और अन्य ऊतकों तक पहुंच कर सिस्ट बना लेते हैं।
क्या वाकई भारत यात्रा थी वजह?
लोरी डेनमैन का कहना है कि उन्होंने भारत में अपने प्रवास के दौरान जानबूझकर पशु उत्पादों का सेवन करने से परहेज किया था। हालांकि, संक्रामक रोगों और माइक्रोबायोलॉजी के विशेषज्ञ डॉ. ब्रेंडन हीली का मानना है कि महिला को संभवतः भारत में ही यह संक्रमण हुआ। इसके पीछे कुछ मुख्य तथ्य यह हैं।
ब्रिटेन में दुर्लभ, भारत में आम: ब्रिटेन में सख्त खाद्य सुरक्षा मानकों के कारण यह बीमारी बेहद दुर्लभ है। वहां 2001 से 2015 के बीच केवल 26 सक्रिय मामले सामने आए थे (औसतन साल में 2 से भी कम)। वहीं, भारत उन देशों में शामिल है जहां यह बीमारी आम है। एक अनुमान के मुताबिक, भारत में 10 लाख से अधिक लोग इस बीमारी के साथ जी रहे हो सकते हैं।
डॉक्टरों का निष्कर्ष: यह पता लगाने का कोई पक्का लैब टेस्ट नहीं है कि संक्रमण किस देश में या किस सटीक जगह पर हुआ। ऐसे में डॉक्टर मरीज की ट्रैवल हिस्ट्री और उस क्षेत्र में बीमारी के खतरे को देखकर संभावना के आधार पर निष्कर्ष निकालते हैं।
देर से आते हैं लक्षण: संक्रमण और बीमारी का पता चलने के बीच लंबा अंतर होना कोई असामान्य बात नहीं है। परजीवी के सिस्ट महीनों या सालों तक बिना कोई लक्षण दिखाए दिमाग में पड़े रह सकते हैं और बाद में मिर्गी के दौरे जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं।
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