सनातन धर्म को खत्म करना होगा... अब क्या बोले उदयनिधि स्टालिन? पूर्व सीएम के बेटे की सफाई
तमिलनाडु विधानसभा में 'सनातन धर्म' पर अपने बयान से विवाद खड़ा करने वाले उदयनिधि स्टालिन ने अब सफाई दी है। उन्होंने कहा कि उनका मकसद किसी की आस्था का विरोध करना नहीं, बल्कि लोगों को बांटने वाली जाति व्यवस्था को खत्म करना है। पढ़ें पूरी खबर।

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) नेता उदयनिधि स्टालिन ने तमिलनाडु विधानसभा में सनातन धर्म को खत्म करने संबंधी अपने बयान पर सफाई दी है। विवाद के बीच उन्होंने कहा कि उनका आशय उस व्यवस्था को खत्म करने से था, जो लोगों को ऊंची और नीची जातियों में बांटती है। उदयनिधि स्टालिन पहले भी सीधे 'सनातन धर्म' को खत्म करने की बात कह चुके हैं जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें फटकार लगाई थी।
सोशल मीडिया 'X' पर दी सफाई
गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट शेयर करते हुए उदयनिधि ने अपने बयान का अर्थ और संदर्भ समझाया। उन्होंने कहा कि जाति व्यवस्था को खत्म करने की बात कहने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि किसी को मंदिर जाने से रोका जाए। इसका वास्तविक अर्थ यह है कि समाज के साथ-साथ मंदिरों में भी हर व्यक्ति को समान अधिकार मिलने चाहिए।
तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा, "जब मैंने तमिलनाडु विधानसभा में कहा कि लोगों को बांटने वाली जाति व्यवस्था खत्म होनी चाहिए, तो कुछ लोगों ने मेरी आलोचना की। मैं ऐसा व्यक्ति नहीं हूं जो डर जाए। द्रविड़ आंदोलन का जन्म ही विरोध से हुआ है, इसलिए मैं इस पर एक छोटा सा स्पष्टीकरण देना चाहता हूं।" उदयनिधि ने जोर देकर कहा कि उनके विचार पेरियार, डॉ. बी.आर. अंबेडकर, सी.एन. अन्नादुरई (अन्ना) और एम. करुणानिधि (कलैनार) जैसे विचारकों के सिद्धांतों पर आधारित हैं। उन्होंने अपनी पार्टी का रुख साफ करते हुए कहा, "हम किसी की भी ईश्वर में आस्था या धार्मिक विश्वास के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन हम समाज में मौजूद असमानता और उत्पीड़न का पुरजोर विरोध करते रहेंगे।"
क्या है पूरा विवाद?
मंगलवार को तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) के रूप में अपने पहले आधिकारिक भाषण के दौरान, उदयनिधि स्टालिन ने एक बार फिर 'सनातन धर्म' को खत्म करने का आह्वान किया था। उन्होंने दावा किया था कि यह लोगों के बीच भेदभाव और बंटवारा पैदा करता है।
गौरतलब है कि यह वही विवादास्पद टिप्पणी है जो उन्होंने सबसे पहले सितंबर 2023 में की थी, जब उन्होंने सनातन धर्म की तुलना कुछ बीमारियों से करते हुए इसे जड़ से मिटाने की बात कही थी। उनके उस बयान के बाद पूरे देश में भारी राजनीतिक घमासान मच गया था। अब नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद विधानसभा में उसी बात को दोहराने से यह मुद्दा फिर से गरमा गया है, जिसके बाद उन्हें यह ताजा स्पष्टीकरण देना पड़ा है।
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