उद्धव ठाकरे को भी भारी पड़ी ममता बनर्जी वाली गलती? 'शावक' के चक्कर में हो गया खेल
महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की पार्टी एक बार फिर से टूट की कगार पर है। पार्टी के 6 सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना में मिल सकते हैं। पार्टी के सांसद संजय राउत ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बागी सांसदों पर जमकर निशाना साधा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें केवल बगावत की खबर मिली है।

Mamata Banerjee and Uddhav Thackeray: भारतीय राजनीति में इन दिनों गजब का दल-बदल देखा जा रहा है। पंजाब में आम आदमी पार्टी के सांसद भाजपा में शामिल हो गए। 4 मई को बंगाल में भाजपा की जीत के साथ ही ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस बिखरने लगी और अब महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की पार्टी के 6 सांसद भी बगावत की कगार पर हैं। आम आदमी पार्टी का मामला भले ही अलग हो लेकिन ममता बनर्जी और उद्धव ठाकरे एक ही नाव पर सवार दिखाई दे रहे हैं। ममता बनर्जी की पार्टी में टूट की जिम्मेदारी अभिषेक बनर्जी के कंधों पर जाती हुई दिख रही है, तो वहीं उद्धव के मामले में यह आदित्य ठाकरे के ऊपर जाती दिख रही है।
न्यूज 18 की मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 19 जून को शिवसेना के स्थापना दिवस के मौके पर उद्धव ठाकरे अपने बेटे आदित्य ठाकरे को पार्टी में बड़ा पद देना चाहते थे। उनकी इस योजना से पार्टी के कुछ नेता खुश नहीं थे। पहले से चली आ रही 'ऑपरेशन टाइगर' की तैयारियों ने ठाकरे के इस फैसले के बाद सांसदों को फैसला लेने के लिए तैयार कर दिया।
आदित्य ठाकरे को लेकर क्या थी योजना?
न्यूज 18 मराठी की रिपोर्ट के मुताबिक, उद्धव ठाकरे ठीक अपनी तरह ही अपने बेटे को भी शिवसेना दिवस के मौके पर पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाना चाहते थे। वह इस कार्यक्रम को 2003 के महाबलेश्वर अधिवेशन की तरह करना चाहते थे, जिसमें उनके पिता बाल ठाकरे ने कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में उन्हें नामित किया था। हालांकि, इन रिपोर्ट्स के बारे में जब आदित्य ठाकरे से पूछा गया था, तो उन्होंने इसे पूरी तरह से खारिज कर दिया था। इतना ही नहीं उन्होंने कहा था कि पार्टी में उनके लिए किसी पद को लेकर अभी चर्चा नहीं हुई है।
एक नाव पर सवार उद्धव ठाकरे और ममता बनर्जी?
पश्चिम बंगाल में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 4 मई को चुनाव हारने के बाद से ही लगातार मुश्किलों से घिरी हुई हैं। तमाम सांसद उनका साथ छोड़ चुके हैं, पार्टी के 60 से ज्यादा विधायक भी ममता और अभिषेक को राजनीतिक हाशिए पर धकेलने की कोशिश में हैं। पार्टी छोड़कर जाने वाले ज्यादातर लोगों को ममता बनर्जी से नहीं बल्कि अभिषेक बनर्जी के काम करने के तरीके से दिक्कत है। ठीक ऐसा ही हाल महाराष्ट्र में उद्धव परिवार के साथ भी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिवसेना उद्धव गुट के कई सांसद आदित्य ठाकरे के काम करने के तरीके से खुश नहीं है। इतना ही नहीं यह नेता पार्टी में आदित्य ठाकरे के बढ़ते हुए कद से भी असहज महसूस कर रहे हैं। असंतुष्ट सांसदों की सीधी शिकायत है कि उन्हें आदित्य ठाकरे से मिलने का सीधा समय नहीं मिलता है। सूत्रों के मुताबिक, सांसदों की शिकायत है कि वह कई बार अपने क्षेत्र की समस्याओं को लेकर आदित्य ठाकरे के पास जाने की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन ठाकरे ने उन्हें समय ही नहीं दिया।
उद्धव गुट के कई नेताओं का आरोप है कि उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे की जोड़ी का अहंकार उन्हें पार्टी कार्यकर्ताओं से दूर कर रही है। हालांकि, इन रिपोर्ट्स को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
बता दें, यह पूरा मामला बुधवार को उस वक्त सार्वजनिक चर्चा का केंद्र बना, जब शिवसेना उद्धव गुट के सांसद संजय राउत और उनके साथ सांसद अरविंद सावंत और अनिल देसाई ने खुले तौर पर कथित बागी सांसदों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। संजय राउत ने हद पार करते हुए बागी सांसदों को गाली तक दे डाली। उन्हें गद्दार करार देते हुए राउत ने कहा कि अगर उन्हें जाना है तो पार्टी और पद से इस्तीफा दें और जहां जाना चाहें चले जाएं। हालांकि, राउत ने इस बात को भी स्वीकार किया कि अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हुई है, हालांकि उनके पास खबर आई है कि सांसदों को 50 करोड़ रुपए ऑफर किए गए हैं। 15 करोड़ लेने के बाद वह चार्टर्ड प्लेन में बैठकर गए हैं।


