ट्विशा शर्मा केस: फंदे पर मिले स्किन टिश्यू, दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट से नया मोड़
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के कारण, इस 11 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट की आधिकारिक जानकारियों को अभी पूरी तरह गोपनीय रखा गया है। यह रिपोर्ट शुक्रवार (10 जुलाई) को सीबीआई को सौंपी गई थी।

हाई-प्रोफाइल ट्विषा शर्मा मौत मामले में एक बड़ा और महत्वपूर्ण मोड़ आया है। AIIMS दिल्ली के मेडिकल बोर्ड ने अदालत के आदेश पर किए गए दूसरे पोस्टमॉर्टम की अंतिम फोरेंसिक रिपोर्ट केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है। यह रिपोर्ट अदालती निर्देशों का पालन करते हुए एक सीलबंद लिफाफे में दी गई है, जिसके कारण इसके निष्कर्षों को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एम्स के मेडिकल बोर्ड की तरफ से किए गए लैब और हिस्टोपैथोलॉजिकल परीक्षणों में कुछ अहम सबूत मिले हैं।
जांच में उस कथित फंदे पर स्किन की मौजूदगी की पुष्टि हुई है, जिसका इस्तेमाल किया गया था। यह फंदा लोहे की रिंग वाली एक जिम्नास्टिक बेल्ट थी। परीक्षणों में यह भी स्थापित हुआ है कि इस जिम्नास्टिक बेल्ट से बनने वाला पैटर्न, ट्विषा शर्मा के गले पर पाए गए चोट के निशानों से पूरी तरह मेल खाता है।
हालांकि, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के कारण, इस 11 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट की आधिकारिक जानकारियों को अभी पूरी तरह गोपनीय रखा गया है। यह रिपोर्ट शुक्रवार (10 जुलाई) को सीबीआई को सौंपी गई थी।
क्यों कराना पड़ा दूसरा पोस्टमॉर्टम?
इस मामले में पहले पोस्टमॉर्टम के बाद एक बड़ा फोरेंसिक विवाद खड़ा हो गया था, जिसे सुलझाने के लिए अदालत ने दोबारा पोस्टमॉर्टम का आदेश दिया।
दरअसल, सबसे बड़ा सवाल यह था कि क्या जिस लोहे की रिंग वाली जिम्नास्टिक बेल्ट से लटकने का दावा किया जा रहा है, वास्तव में वही फंदा था? और क्या उससे लगे जख्म ट्विषा के गले के निशानों से मेल खाते हैं? पहले पोस्टमॉर्टम के दौरान यह कथित बेल्ट मेडिकल बोर्ड के सामने पेश ही नहीं की गई थी, जिसके कारण डॉक्टरों ने इस पर कोई स्पष्ट राय नहीं दी थी। शुरुआती जांच में खामियों का आरोप लगाते हुए ट्विषा के परिवार ने हाई कोर्ट का रुख किया था।
इसके बाद मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एम्स दिल्ली के स्वतंत्र विशेषज्ञों से दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने का आदेश दिया। इसके साथ ही मामले की जांच भी सीबीआई को सौंप दी गई थी।
एम्स के विशेषज्ञों की गहन जांच
अदालत के आदेश पर एम्स के निदेशक ने फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञों को मिलाकर एक 5-सदस्यीय मेडिकल बोर्ड का गठन किया था।
इस बोर्ड ने 24 मई को न सिर्फ दूसरा पोस्टमॉर्टम किया, बल्कि मामले को गहराई से समझने के लिए भोपाल में कथित क्राइम सीन का दौरा भी किया था।
लगभग एक महीने तक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मेडिकल जर्नल्स और वैज्ञानिक साक्ष्यों का अध्ययन करने के बाद बोर्ड ने अपनी 11 पन्नों की राय तैयार की।
एम्स दिल्ली के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता ने रिपोर्ट के निष्कर्षों पर सीधे बोलने से इनकार करते हुए कहा, "मेडिकल बोर्ड ने हर संभावित कोण से इस मामले पर बेहद बारीकी से विचार-विमर्श किया है। लगभग एक महीने तक सभी उपलब्ध राष्ट्रीय और इंटरनेशनल जर्नल्स को ध्यान में रखा गया और वैज्ञानिक औचित्य के साथ एक विस्तृत राय दी गई है। यह राय सीबीआई और न्यायपालिका के लिए सच्चाई और न्याय के हित में बिल्कुल साफ है।"
क्या है पूरा मामला?
ट्विषा शर्मा, मध्य प्रदेश की रिटायर्ड प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की बहू थीं। इस साल की शुरुआत में भोपाल स्थित उनके ससुराल में उनका शव फंदे से लटका हुआ मिला था।
ससुराल पक्ष का दावा था कि यह आत्महत्या का मामला है, जबकि ट्विषा के मायके वालों ने हत्या का अंदेशा जताते हुए शुरुआती पुलिस जांच और पोस्टमॉर्टम पर गंभीर सवाल उठाए थे। अब सीबीआई के पास सौंपी गई एम्स की यह 'क्रिस्टल क्लियर' वैज्ञानिक रिपोर्ट ही इस हाई-प्रोफाइल मौत के रहस्य से पर्दा उठाएगी।


