सभी 136 विधायकों का समर्थन हासिल, मुख्यमंत्री पद की खींचतान को लेकर क्या बोले डीके शिवकुमार
कांग्रेस के पास कर्नाटक विधानसभा में कुल 136 विधायक हैं, जो बहुमत का आंकड़ा है। शिवकुमार का दावा है कि इन सभी विधायकों का भरोसा उन पर है, जो मुख्यमंत्री पद की दौड़ में उनकी स्थिति को मजबूत करता है।

कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान के बीच उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने मंगलवार को कहा कि उन्हें राज्य के सभी 136 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। दिल्ली में पार्टी की बैठकों में शामिल होने के दौरान शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि कुछ वर्गों द्वारा उनके समर्थन में केवल 80 विधायकों का दावा किया जा रहा है, जो गलत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पूरी विधायक दल उनकी साथ है, जिसमें मुख्यमंत्री सिद्धारमैया भी शामिल हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब पार्टी के अंदर नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज हो गई हैं और सिद्धारमैया के कार्यकाल को लेकर चर्चाएं चल रही हैं।
शिवकुमार ने पहले भी साफ किया था कि राज्य सरकार में नेतृत्व को लेकर कोई अस्पष्टता नहीं है। उन्होंने कहा कि सिद्धारमैया के साथ उनका समझौता पहले से ही कांग्रेस हाईकमान को बता दिया गया है। दिल्ली दौरे के दौरान वे असम विधानसभा चुनावों की समीक्षा जैसी महत्वपूर्ण बैठकों में शामिल हुए, लेकिन कर्नाटक की राजनीतिक स्थिति पर उनका यह बयान सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रहा है। विपक्षी दल भाजपा लगातार सरकार में कलह और मुख्यमंत्री पद की लड़ाई को मुद्दा बना रही है, जिसके जवाब में शिवकुमार ने अपनी ताकत दिखाते हुए कहा कि उनकी और सिद्धारमैया की जोड़ी चुनौतियों का सामना एक साथ कर चुकी है।
क्या कहते हैं आंकड़े
कांग्रेस के पास कर्नाटक विधानसभा में कुल 136 विधायक हैं, जो बहुमत का आंकड़ा है। शिवकुमार का दावा है कि इन सभी विधायकों का भरोसा उन पर है, जो मुख्यमंत्री पद की दौड़ में उनकी स्थिति को मजबूत करता है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि वर्तमान में सिद्धारमैया ही मुख्यमंत्री बने रहेंगे और कोई बदलाव की मांग नहीं है। यह बयान पार्टी के भीतर एकता का संदेश देने के साथ-साथ अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश लगती है। पिछले कुछ महीनों से 'नवंबर क्रांति' जैसी अफवाहें और कैबिनेट विस्तार की चर्चाएं चल रही थीं, लेकिन शिवकुमार ने इन सबको खारिज करते हुए कहा कि सब कुछ सुचारू रूप से चल रहा है।
लंबी हो रही खींचतान
विश्लेषकों का मानना है कि शिवकुमार का यह मजबूत बयान पार्टी हाईकमान को संकेत देता है कि कर्नाटक में कोई फूट नहीं है। दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठकें और विधायकों का समर्थन दावा दोनों ही नेताओं के बीच सत्ता संतुलन को दर्शाते हैं। फिलहाल, सिद्धारमैया सरकार चलाते रहेंगे, लेकिन शिवकुमार की सक्रियता से साफ है कि भविष्य में नेतृत्व परिवर्तन की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। कांग्रेस को इस आंतरिक कलह को जल्द संभालना होगा ताकि राज्य में विकास कार्य प्रभावित न हों और विपक्ष को हमला करने का मौका न मिले।



