तुकाराम मुंढे के विभाग ने छीना लाइसेंस, HC भड़का; पूरे FDA को लगाई लताड़
बम्बई उच्च न्यायालय ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन या FDA को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट का कहना है कि कमियों को दूर करने के बाद भी निलंबन वापस नहीं लेने का असर कर्मचारियों और प्रतिष्ठानों पर पड़ रहा है। पुणे की एक कंपनी ने याचिका दाखिल की थी।

तुकाराम मुंढे का ऐक्शन जारी है। इसी बीच बॉम्बे हाई कोर्ट ने FDA यानी खाद्य एवं औषधि प्रशासन और महाराष्ट्र सरकार को भी कड़ी फटकार लगाई है। दरअसल, कोर्ट ने आपत्ति जताई है कि खामियां ठीक कर लेने के बाद भी लाइसेंस बहाल क्यों नहीं किए गए थे। उच्च न्यायालय में पुणे की एक कंपनी सिद्धार्थ एग्रो की तरफ से याचिका दाखिल की गई थी।
याचिका पर जस्टिस रविंद्र वी घुघे और जस्टिस गौतम ए अंखड़ की बेंच सुनवाई कर रही थी। अदालत का कहना था कि प्रतिष्ठानों को काम करने से रोका जा रहा है। बेंच ने कहा, 'इससे प्रतिष्ठानों को नुकसान हो रहा है और इसका कर्मचारियों और सप्लाई चेन पर पड़ रहा है।' फिलहाल, राज्य सरकार और एफडीए की तरफ से प्रतिक्रिया नहीं आई है।
याचिका में क्या है मांग
याचिकाकर्ता कंपनी पुणे में जानवरों का खाना बनाती है और डेयरी प्रोडक्ट्स तैयार करती है। कंपनी ने फूड सेफ्टी के उल्लंघन के आरोपों के चलते लाइसेंस रद्द किए जाने के खिलाफ कोर्ट में याचिका दी थी।
कंपनी में 15 जुलाई को FDA अधिकारियों ने दबिश दी थी और कार्रवाई की थी। अधिकारियों का कहना था कि 29 जुलाई को दोबारा जांच के दौरान कमियां मिली थीं, जिसके चलते निलंबन नहीं हटाया गया। जबकि, कंपनी का कहना था कि कमियों को दूर कर दिया गया है और नए सिरे से जांच की मांग की गई थी। इसके बाद कोर्ट ने FDA से 31 अगस्त को जांच करने और ताजा रिपोर्ट देने के आदेश दिए थे।
किस बात से नाराज है कोर्ट
हाई कोर्ट ने खासतौर पर नाराजगी इस बात पर जताई है कि कमियां दूर करने के बाद भी प्रतिष्ठानों पर निलंबन जारी है। कोर्ट ने कहा, 'जिस आदेश का कोई असर ही नहीं बचा है, उसे रद्द कराने के लिए किसी संस्थान को अदालत जाने के लिए बाध्य करने का कोई तुक नहीं बनता। इस प्रकार के मुकदमों से आसानी से बचा जा सकता है और यह संस्थान व अदालत दोनों के लिए बेवजह का बोझ है।'
साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा है कि जिन संस्थानों ने कमियों को दूर कर लिया है, उन्हें राज्य के अधिकारियों की तरफ से देरी की सजा नहीं मिलनी चाहिए। बेंच ने कहा कि सिद्धार्थ एग्रो को जुलाई में जारी आदेश अपने आप खत्म हो गए हैं। इसकी वजह अपने आप तैयार हुई एक अनुपालन रिपोर्ट है।
कैलेंडर जारी
आयुक्त तुकाराम मुंढे ने स्पष्ट किया है कि हाल ही में जारी सालभर का त्योहार कैलेंडर और खाद्य सुरक्षा निर्देश केवल मिलावट रोकने और लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए हैं, न कि किसी त्योहार या धार्मिक परंपरा पर पाबंदी लगाने के लिए। मुंढे ने कहा, 'एफडीए का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि त्योहारों और बड़ी सभाओं के दौरान परोसा और बांटा जाने वाला खाना सुरक्षित, साफ-सुथरा और मिलावट-मुक्त हो।'


