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भारत-रूस को एकजुट कर दिया, ट्रंप नोबेल के हकदार; अपने ही राष्ट्रपति पर भड़के पूर्व US अधिकारी

भारत-रूस को एकजुट कर दिया, ट्रंप नोबेल के हकदार; अपने ही राष्ट्रपति पर भड़के पूर्व US अधिकारी

संक्षेप:

अधिकारी ने कहा कि भारतीयों ने नरेंद्र मोदी को इसलिए चुना है कि वे भारतीय हितों का प्रतिनिधित्व करें। भारत दुनिया की सबसे आबादी वाला देश है, जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा, और उसे ऊर्जा चाहिए।

Dec 06, 2025 07:41 am ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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भारत-रूस कूटनीति को लेकर अमेरिका के पूर्व पेंटागन अधिकारी ने अपने ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर कटाक्ष किया है। उन्होंने कहा है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को नई दिल्ली में जो गर्मजोशी और सम्मान मिला, उसका श्रेय रूस नहीं बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जाता है। माइकल रुबिन के अनुसार ट्रंप ने ही भारत और रूस को एक-दूसरे के और करीब धकेला, और इसके लिए वे नोबेल पुरस्कार के हकदार हैं।

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ट्रंप को दिया ‘नोबेल’ का सुझाव

ANI से बातचीत में रुबिन ने कहा कि पुतिन की भारत यात्रा मॉस्को के नजरिए से बेहद सकारात्मक रही और भारत द्वारा दिया गया सम्मान दुनिया में कहीं और देखने को नहीं मिला। उन्होंने कहा- मैं यह तर्क दूंगा कि भारत और रूस को जिस तरह डोनाल्ड ट्रंप ने एक-दूसरे के करीब लाया है, उसके लिए वे नोबेल पुरस्कार के हकदार हैं।

रुबिन ने यह भी सवाल उठाया कि पुतिन की यात्रा के दौरान हुए समझौतों में से कितने वास्तविक सहयोग में तब्दील होंगे और कितने ऐसे हैं जो भारत की उस नाराजगी से उपजे हैं जो हाल के समय में ट्रंप के रवैये के कारण बनी है- चाहे वह पीएम मोदी के प्रति उनका व्यवहार हो या भारत के व्यापक हितों के प्रति उदासीनता।

अमेरिका में दो धाराएं- ट्रंप का दावा’ बनाम ‘ट्रंप की अक्षमता

रुबिन ने बताया कि अमेरिका में इस घटनाक्रम को लेकर दो बिल्कुल अलग नजरिए हैं। उन्होंने कहा, यदि आप डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक हैं, तो आप इसे ‘मैंने कहा था न’ वाले चश्मे से देखते हैं। लेकिन यदि आप उन 65 प्रतिशत अमेरिकियों में से हैं जो ट्रंप को पसंद नहीं करते, तो यह सब डोनाल्ड ट्रंप की भारी कूटनीतिक अक्षमता का नतीजा दिखता है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप ने भारत-अमेरिका संबंधों को पीछे धकेल दिया और कई फैसले ऐसे लिए जिन पर पाकिस्तान, तुर्किये और कतर जैसी देशों की चापलूसी या कथित प्रलोभनों का असर दिखा।

ट्रंप के दौर की तीखी आलोचना: ‘रणनीतिक नुकसान’

रुबिन के अनुसार वॉशिंगटन के कई विशेषज्ञ इस बात से हैरान हैं कि ट्रंप ने कैसे अमेरिका–भारत की बढ़ती रणनीतिक एकजुटता को कमजोर कर दिया। उन्होंने कहा कि ट्रंप इसे कभी स्वीकार नहीं करेंगे, बल्कि भारत–रूस निकटता को अपनी विदेश नीति की दूरदर्शिता साबित करने में इस्तेमाल करेंगे।

‘भारत को नसीहत देना बंद करे अमेरिका’

पुतिन द्वारा भारत को निरंतर ऊर्जा आपूर्ति देने के वादे पर टिप्पणी करते हुए रुबिन ने कहा कि अमेरिका भारत की ऊर्जा जरूरतों और रणनीतिक अनिवार्यताओं को समझने में लगातार विफल रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीयों ने नरेंद्र मोदी को इसलिए चुना है कि वे भारतीय हितों का प्रतिनिधित्व करें। भारत दुनिया की सबसे आबादी वाला देश है, जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा, और उसे ऊर्जा चाहिए। अमेरिका को भारत को लेक्चर देना बंद कर देना चाहिए।

उन्होंने अमेरिका की आलोचना करते हुए कहा कि स्वयं अमेरिका भी तब रूस से ऊर्जा खरीदता है जब विकल्प सीमित हों। रुबिन ने सवाल उठाया कि यदि अमेरिका नहीं चाहता कि भारत रूसी ईंधन खरीदे, तो वह भारत को सस्ते दाम पर और पर्याप्त मात्रा में ईंधन उपलब्ध कराने के लिए क्या कर रहा है? उन्होंने तीखे अंदाज में कहा- यदि हमारे पास कोई विकल्प नहीं है, तो सबसे अच्छा यह होगा कि हम चुप रहें, क्योंकि भारत को अपनी सुरक्षा और जरूरतों को पहले रखना ही पड़ेगा।

Amit Kumar

लेखक के बारे में

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अमित कुमार एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में नौ वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। हिन्दुस्तान डिजिटल के साथ जुड़ने से पहले अमित ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया है। अमित ने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला (डिजिटल) से की। इसके अलावा उन्होंने वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे मीडिया हाउस में काम किया है, जहां उन्होंने न्यूज रिपोर्टिंग व कंटेंट क्रिएशन में अपनी स्किल्स को निखारा। अमित ने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी, हिसार से मास कम्युनिकेशन में मास्टर (MA) किया है। अपने पूरे करियर के दौरान, अमित ने डिजिटल मीडिया में विभिन्न बीट्स पर काम किया है। अमित की एक्सपर्टीज पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेट रिपोर्टिंग और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई है। अमित नई मीडिया तकनीकों और पत्रकारिता पर उनके प्रभाव को लेकर काफी जुनूनी हैं। और पढ़ें
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