उदयनिधि ने किया था सनातन पर ‘वार’, अब भगवान के दरबार; तमिलनाडु में जोर पकड़ी हिंदू पॉलिटिक्स

Himanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
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धर्मपुरी के पूर्व सांसद और वर्तमान उम्मीदवार डॉ. सेंथिल कुमार सड़क परियोजना के भूमि पूजन और धार्मिक अनुष्ठानों पर आपत्ति जताकर विवादों में रहे थे, अब अपने अभियान के दौरान मंदिरों का दौरा कर रहे हैं।

उदयनिधि ने किया था सनातन पर ‘वार’, अब भगवान के दरबार; तमिलनाडु में जोर पकड़ी हिंदू पॉलिटिक्स

Tamil Nadu Politics: तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से आत्म-सम्मान आंदोलन और तर्कवाद पर आधारित रही है। लेकिन 2026 के चुनावी मैदान में एक अलग ही दृश्य दिखाई दे रहा है। जो नेता कल तक धार्मिक कर्मकांडों का विरोध करते थे, वे आज मंदिरों में पूजा-अर्चना कर रहे हैं और जो जातिगत समीकरणों में बंधे थे वे अब विरोधी खेमों के स्मारकों पर माथा टेक रहे हैं।

द्रमुक (DMK) के दिग्गज नेता और उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन जो कई इंटरव्यू में स्पष्ट कह चुके हैं कि वे पूजा-पाठ नहीं करते, वह हाल ही में अपने निर्वाचन क्षेत्र के सेंजेनियमन मंदिर में पूजा करते देखे गए। उनके साथ सांसद दयानिधि मारन भी मौजूद थे। यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उदयनिधि को द्रविड़ विचारधारा के कट्टर समर्थक के रूप में देखा जाता है। उदयनिधि पर हाल के कुछ वर्षों में हिंदू धर्म का अपमान करने का भी आरोप लगा है। वह सनातन को लेकर दिए अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहे हैं।

डॉ. सेंथिल कुमार का बदला रुख

धर्मपुरी के पूर्व सांसद और वर्तमान उम्मीदवार डॉ. सेंथिल कुमार सड़क परियोजना के भूमि पूजन और धार्मिक अनुष्ठानों पर आपत्ति जताकर विवादों में रहे थे, अब अपने अभियान के दौरान मंदिरों का दौरा कर रहे हैं। जानकारों का मानना है कि यह 'सॉफ्ट हिंदुत्व' या बहुसंख्यक मतदाताओं को नाराज न करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।

मस्जिद में हिंदू, रैलियों में विभूति

इस बार चुनाव प्रचार में धार्मिक सीमाओं का धुंधला होना एक प्रमुख ट्रेंड है। शिवकाशी की उम्मीदवार कीर्तना जैसे हिंदू नेता मस्जिदों में जाकर प्रचार कर रहे हैं। कई रैलियों में मुस्लिम उम्मीदवारों के माथे पर विभूति के निशान देखे जा रहे हैं, जो उनकी सर्व समावेशी छवि पेश करने की कोशिश है।

तमिलनाडु में जाति हमेशा से एक निर्णायक कारक रही है। 'थेवर' समुदाय से आने वाले मंत्री थंगम थेनारासु का परमकुडी में दलित नेता इमैनुएल सेकरन के स्मारक पर जाना एक बड़ी राजनीतिक घटना मानी जा रही है। आमतौर पर गैर-दलित नेता ऐसे स्मारकों पर केवल विशिष्ट जयंतियों के दौरान ही जाते हैं, लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान ऐसी यात्राएं संकेत देती हैं कि द्रमुक किसी भी वर्ग को अछूता नहीं छोड़ना चाहती।

क्यों हो रहा है ऐसा?

टाइम्स ऑफ इंडिया ने राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर एम राजमुरुगन के हवाले से कहा है कि तमिलनाडु में सांप्रदायिक रेखाएं कभी बहुत गहरी नहीं रही हैं, लेकिन अब इन गतिविधियों की बारंबारता और समय बदल गया है। राज्य में करीब 20% अल्पसंख्यक मतदाता हैं। उनकी गोलबंदी के लिए नेता हर संभव प्रयास कर रहे हैं। इमैनुएल सेकरन स्मारक जैसे प्रतीकों का दौरा करना यह सुनिश्चित करने के लिए है कि दलित और पिछड़े वर्गों का वोट बैंक छिटकने न पाए।

गुम्मिडीपूंडी का अनोखा उदाहरण

राजनीति में जहां अक्सर कटुता देखी जाती है, वहीं गुम्मिडीपूंडी में अन्नाद्रमुक (AIADMK) उम्मीदवार वी. सुधाकर ने सबको चौंका दिया। उन्होंने किसी देवता का आशीर्वाद लेने के बजाय अपने प्रतिद्वंद्वी द्रमुक उम्मीदवार टी. जे. गोविंदराजन के पैर छुए। उनका तर्क था कि राजनीति अपनी जगह है, लेकिन गोविंदराजन उनसे वरिष्ठ हैं। यह घटना दिखाती है कि जमीनी स्तर पर उम्मीदवार अपनी छवि को विनम्र और सुसंस्कृत बनाने पर जोर दे रहे हैं।

Himanshu Jha

लेखक के बारे में

Himanshu Jha

बिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।


एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।


हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।


काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।

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