
तो मैं जीने का हकदार नहीं… जब गांव जाते समय CJI गवई ने सिक्योरिटी ले जाने से कर दिया था मना
CJI ने विदाई के दिन एक वकील से उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश और बाद में देश के मुख्य न्यायाधीश बनने के अपने 40 साल से ज्यादा के सफर को बेहद संतोषजनक बताया।
देश के मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई रविवार को पद से सेवानिवृत्त हो रहे हैं और शुक्रवार को उनका आखिरी कार्य दिवस था। इस मौके पर आयोजित विदाई समारोह में जस्टिस गवई बेहद भावुक नजर आए। CJI गवई ने जाते जाते कहा है कि वह इस संतोष के साथ अदालत छोड़ रहे हैं कि देश के लिए जो कर सकते थे वह सब कुछ किया। भावुक दिख रहे मुख्य न्यायाधीश ने रस्मी पीठ के समक्ष विधि अधिकारियों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं और युवा वकीलों से खचाखच भरे अदालत कक्ष में भाषण दिया। वहीं भावी CJI जस्टिस सूर्यकांत सहित अन्य वकीलों ने CJI गवई की तारीफ करते हुए उनसे जुड़े कई वाकये भी सुनाए।
52वें प्रधान न्यायाधीश के लिए आयोजित विदाई समारोह में अधिवक्ताओं ने जस्टिस गवई की न्यायपालिका पर छोड़ी गई छाप को याद किया। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट बार एसोशिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने गवई की सादगी को याद करते हुए एक दिलचस्प किस्सा सुनाया। उन्होंने CJI गवई की उस बात को याद किया कि वह जब अपने गांव गए थे तो सुरक्षाकर्मी नहीं ले गए थे। वहीं यह पूछे जाने पर कि उन्होंने ऐसा क्यों किया, CJI गवई ने कहा था, ‘‘अगर कोई मुझे मेरे ही गांव में मार रहा है, तो मैं जीने का हकदार नहीं हूं।’’
भावी CJI ने बांधे तारीफों के पुल
वहीं प्रधान न्यायााधीश की तारीफ करते हुए देश के भावी CJI जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, ‘‘वह एक सहकमी से कहीं ज्यादा रहे…। वह मेरे भाई और विश्वस्त हैं, और बहुत ईमानदार इंसान हैं।’’ उन्होंने कहा, उन्होंने धैर्य और गरिमा के साथ मामलों को संभाला। उन्होंने युवा वकीलों को हिम्मत दी। उनकी सख्ती हमेशा हास्य से भरी होती थी…। एक भी दिन ऐसा नहीं जाता था जब वह उन्होंने किसी हठी वकील को जुर्माना लगाने की धमकी न दी हो, लेकिन उन्होंने कभी ऐसा नहीं किया।’’
अधिवक्ताओं ने भी किया सादगी को याद
विदाई समारोह में अटॉर्नी जनरल वेंकटरमणी ने “भूषण” का अर्थ आभूषण या साज-सज्जा बताते हुए कहा कि जस्टिस गवई ने न्यायपालिका और कानून की दुनिया को सजाया है। वहीं सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उनसे एक न्यायाधीश के तौर पर हुई मुलाकात को याद करते हुए कहा, “आप एक इंसान के तौर पर कभी नहीं बदले।”
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि उच्चतम न्यायालय में न्यायमूर्ति गवई की नियुक्ति इस देश में हुए ‘‘बहुत बड़े सामाजिक मंथन’’ का प्रतीक है। सिब्बल ने कहा कि उनके सफर ने दिखाया है कि एक आदमी अपने न्यायिक करियर के सबसे ऊंचे मुकाम पर पहुंचकर भी एक आम आदमी की सादगी बनाए रख सकता है।
CJI गवई हुए भावुक
विदाई वाले दिन CJI बहुत भावुक हो गए। उन्होंने कहा, ‘‘‘‘आप सभी को सुनने के बाद, और खासकर अटॉर्नी जनरल (आर वेंकटरमणि) और कपिल सिब्बल की कविताओं और आप सभी की गर्मजोशी भरी भावनाओं को जानने के बाद, मैं भावुक हो रहा हूं।’’ उन्होंने आगे कहा, “जब मैं इस अदालत कक्ष से आखिरी बार निकल रहा हूं तो पूरी संतुष्टि के साथ निकल रहा हूं, इस संतोष के साथ कि मैंने इस देश के लिए जो कुछ भी कर सकता था, वह किया है। धन्यवाद। बहुत-बहुत धन्यवाद।’’





